Friday, September 22, 2023
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इंदौर में हुए हादसे के बाद उज्जैन नगर निगम हुई सतर्क….

इंदौर में हुए हादसे के बाद उज्जैन नगर निगम हुई सतर्क….

निगमायुक्त ने कहा- स्पीड ब्रेकर्स के साथ ऐसे स्ट्रक्चर जो हादसे का कारण हो सकते हैं, उनको हटाया जाएगा

अक्षरविश्व न्यूज.उज्जैन।स्पीड ब्रेकर्स पर मोटर बाइक उछलने के बाद युवक की मौत को उज्जैन नगर निगम आयुक्त ने गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए कहा कि शहर में ऐसे स्पीड ब्रेकर्स और स्ट्रक्चर जो हादसे का कारण हो सकते हैं, उनको हटाया जाएगा। इसके लिए जोनवार सर्वे करेंगे। बता दें कि शहर के हर गली-मोहल्ले में स्पीड ब्रेकर्स है, जिनके कारण हादसे होते हैं या हो सकते हैं।

उज्जैन नगर निगम आयुक्त रोशन सिंह ने अक्षरविश्व से चर्चा में कहा कि इंदौर का हादसा दर्दनाक और कष्टप्रद है। मामला संवेदनशील और गंभीर होने के साथ ही जनरक्षा का भी है। उज्जैन नगर निगम सीमा में सर्वे कर अमानक और मनमाने तरीके से निर्मित स्पीड ब्रेकर्स के साथ ऐसे स्ट्रक्चर को हटाया जाएगा, जो खतरनाक हैं।

हाईकोर्ट के निर्देश थे- स्पष्ट संकेतक लगाकर लाइनों से भी दर्शाएं….

1983 में जबलपुर के अधिवक्ता स्व. जेपी संघी ने बेतरतीब ढंग से बनाए गए स्पीड ब्रेकर्स को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका का निराकरण किया था कि सरकार स्पीड ब्रेकर्स के लिए नियम बनाएगी। कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं, उस स्थान से पहले सड़क पर स्पष्ट संकेतक के जरिए सूचना प्रदर्शित करनी होगी। सड़क पर भी सांकेतिक लाइनों के जरिए इसे दर्शाया जाना चाहिए।

शहर के गली-मोहल्ले में स्पीड ब्रेकर्स

सड़क हादसों को रोकने के लिए स्पीड ब्रेकर्स बनाए जाते हैं, लेकिन लोगों ने इन्हें वाहनों की गति रोकने का सहारा बना लिया है। हालात यह है कि शहर के हर गली-मोहल्ले और प्रमुख सड़कों पर अमानक स्तर के स्पीड ब्रेकर बना दिए/लिए गए हैं। स्पीड ब्रेकरों में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

इनसे होने वाले संभावित हादसों को रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं दिख रहे हैं। इससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि शहर के विभिन्न इलाकों में मनमर्जी से स्पीड ब्रेकर बनाए जा रहे हैं। इन स्पीड ब्रेकरों में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

इन पर प्रशासनिक कार्रवाई की जरूरत है लेकिन मामलों में प्रशासन उदासीन रवैया अपना है। इन स्पीड ब्रेकरों पर न कलर किए गए हैं न ही को कई जगह संकेतक लगाए गए हैं। ऐसे में इनसे हादसे की आशंका बनी रहती है। ऐसे में डर है कि स्पीड को कम करने के लिए बनाए गए यह स्पीड ब्रेकर कहीं जिंदगी को ब्रेक न कर दें।

ब्रेकर के लिए ‘रोड कांग्रेस’ के मानक और हकीकत

ऊंचाई: आदर्श स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई 10 सेंटीमीटर हो

हकीकत: एक से डेढ़ फीट है ऊंचाई।

लंबाई: 3.5 मीटर व वृत्ताकार क्षेत्र यानी कर्वेचर रेडियस 17 मीटर होना चाहिए।

हकीकत: न लंबाई का पता और न चौड़ाई का। जैसा मन में आया बना दिया।

संकेतक: ड्राइवर को सचेत करने के लिए स्पीड ब्रेकर आने से 40 मीटर पहले चेतावनी बोर्ड जरूरी।

हकीकत: गिने-चुने स्थान पर बोर्ड लगे हैं। उनमें भी विज्ञापन के पोस्टर चस्पा हैं।

रफ्तार: स्पीड ब्रेकर का मकसद वाहनों की रफ्तार को 20-30 किमी प्रति घंटा तक कर हादसों की आशंका को कम करना है।

हकीकत: संकेतक बोर्ड नहीं होने से वाहन चालक को ब्रेकर नजर नहीं आता। रफ्तार अधिक होने से हादसे होते हैं।

थर्मोप्लास्टिक पेंट की पट्टियां: स्पीड ब्रेकर पर थर्मोप्लास्टिक पेंट से पट्टियां बनाई जानी चाहिए, जिससे रात में वे ड्राइवरों की नजरों से न चूकें।

हकीकत: शहर की कुछ सडक़ों को छोड़ कहीं भी थर्मोप्लास्टिक पेंट की पट्टी नहीं है।

यहां बनाए जा सकते हैं: चौराहा, अस्पताल या स्कूल, रिहाइशी इलाकों में हर 80 से 110 मीटर की दूरी पर

हकीकत: किसी मानक का पालन नहीं हो रहा। जिसकी मर्जी हो वह बना या बनवा लेता है।

वाहन चालकों के लिए परेशानी

नगरीय क्षेत्र की सड़कों पर बनाए गए ब्रेकर वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। सामान्य से अधिक ऊंचाई के ब्रेकर बना देने से वाहन असंतुलित होकर गिरते रहे हैं। हादसे की संभावना भी बनी रहती है। शहर की सडक़ों पर बेतरतीब ढंग से बनाए गए स्पीड ब्रेकर हादसों का कारण बन सकते है।

सडक निर्माण एजेंसियों की लापरवाही और रसूखदारों की मनमानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता कि शहर में मुख्य सडकों से लेकर मोहल्लों की गलियों में डेढ़-डेढ़ फीट ऊंचे स्पीड ब्रेकर बना दिए गए हैं। इन स्पीड ब्रेकर के निर्माणनगर निगम, ट्रैफिक पुलिस, रोड कांग्रेस के मानकों व हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों का भी पालन होता है। शहर की कॉलोनियों में तो यह हालत है जिसकी मर्जी होती है वह स्पीड ब्रेकर बना या बनवा लेता है। इनका फायद केवल इतना होता है कि उनकी गली-मोहल्ले से वाहन तेज गति से नहीं निकलते है,लेकिन परेशानी तो वाहन चालकों को होती है।

एक युवा की जान जा चुकी है

असंतुलित सड़क और स्ट्रक्चर के चलते एक युवक की जान जा चुकी है। फरवरी 2021 में हरिफाटक और ब्रिज से इंदौर गेट की ओर जाने वाली सड़क पर टाटा सीवरेज लाइन के ऊंचे-नीचे चैंबर के कारण मोटर बाइक उछलने से एक युवक अक्षत शर्मा की मौत हो गई थी। इस मामले में महाकाल पुलिस ने सीवरेज प्रोजेक्ट को आकार दे रही टाटा कंपनी के इंजीनियर और सुपरवाइजर को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए धारा ३०४-ए में केस दर्ज किया था। नगर निगम और पुलिस की जांच में यह सामने आया था कि सीवरेज चैंबर्स के निर्माण में तकनीकी मापदंडों की खामी सामने आई थी।

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