Monday, May 16, 2022
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उज्जैन:एक ही व्यक्ति को थमा दिए दो अलग वैक्सीन के प्रमाण-पत्र…

वैक्सीनेशन के सर्टिफिकेट जारी करने में गंभीर खामी

टीकाधारक संशय में… आखिर कौन-सा टीका लगा उन्हें….?

उज्जैन।कोरोना महामारी के बाद अब देश में एक तरफ जहां अधिकांश कार्यों में वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को बढ़ा दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ वैक्सीन सर्टिफिकेट जारी करने में संबंधित विभाग द्वारा गंभीर लापरवाही बरती जा रही हैं। बुधवार को एक ऐसा ही मामला सामने आया। जब एक व्यक्ति को कोरोना वैक्सीनेशन के दो अलग-अलग सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए। ऐसे में उक्त व्यक्ति को संशय है कि उसका कौन सा वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट सही है और कौन सा गलत।

लक्ष्मी नगर निवासी डॉ. राम अरोरा बताते है कि उन्हें कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लग चुके है, मंगलवार को जब उन्होंने अपना फुल वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट डाउनलोड किया तो उनके होश उड़ गए।

उनके नाम पर दो अलग-अलग वैक्सीन के फुल वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट जारी हो गए। इस प्रकार को-वैक्सीन और कोविशील्ड के दो अलग-अलग वैक्सीनेशन प्रमाण पत्रों ने उन्हें भी संशय में डाल दिया है। कि उन्हें कौन सी वैक्सीन लगी थी। कोविन पोर्टल पर जारी एक वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र में राम अरोरा को 11 अप्रैल 2021 को कोविशील्ड वैक्सीन का पहला डोज लगना दर्शाया जा रहा है तो 28 अगस्त 2021 में कोविशील्ड का दूसरा डोज ।

वहीं दूसरे सर्टिफिकेट में उन्हें को-वैक्सीन का पहला डोज 11 अप्रैल 2021 को दर्शाया गया है तो दूसरा डोज 21 जून 2021को। खास बात यह है कि इन दोनों ही फुल वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट में लाभार्थी का नाम, मोबाइल नंबर और आधार नंबर एक ही है। लेकिन ड्यूटी डॉक्टर का नाम और लगाई गई वैक्सीन का कोड अलग-अलग दर्शाया जा रहा हैं।

पूर्व में भी हो चुकी है, गड़बडिय़ां…

टीकाकरण और इसके सर्टिफिकेट जारी करने के मामले में पूर्व में भी कई गड़बडिय़ां सामने आ चुकी है। इसमें मृतक व्यक्ति का वैक्सीनेशन बता दिया गया है तो जिसे टीका ही नहीं लगा उसके नाम से भी सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए है। इसके अलावा टाइम लिमिट पूरी नहीं होने के बाद भी एसएमएस भेजकर वैक्सीनेशन की सूचना दी गई है।

जिनके दूसरे डोज का समय हो गया उनको जानकारी तक नहीं मिली है। वेरिफायर्स की लापरवाही का यह भी नतीजा रहा कि गलत डाटा इंट्री की वजह से कई लोग अभी भी अपने वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट लेने के लिए परेशान है तो कई प्रमाण पत्रों की त्रुटि ठीक करवाने के लिए चक्कर लगा रहे हंै।

इनका कहना

वेरिफायर की गलत इंट्री की वजह से ऐसा संभव है, उसमें रिकार्ड देखकर सुधार किया जा सकता है। गलत प्रमाण पत्र जारी होने पर चिंता जैसी कोई बात नहीं है। स्वास्थ्य अमले के पास सारा रिकार्ड सुरक्षित है। -डॉ. के.सी परमार, जिला
टीकाकरण अधिकारी उज्जैन

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