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उज्जैन:कुछ प्रायवेट हॉस्पिटल्स के मेडिकल स्टोर से ब्लैक में बिक गए रेमडेसिविर

प्रशासन की कोई मॉनिटरिंग नहीं

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उज्जैन। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोरोना पॉजीटिव मरीज के शरीर के लक्षण के आधार पर तय करना है कि उसे रेमडेसिविर इंजेक्शन का डोज लगाया जाए या नहीं? एक दिन पूर्व प्रदेश के हेल्थ सेक्रेटरी आकाश त्रिपाठी पत्र जारी कर चुके हैं कि प्रायवेट हॉस्पिटल मेरीट के आधार पर रिक्वायरमेंट भेजे और उसी अनुसार उनसे 1568 रू.प्रति रेमडेसिविर इंजेक्शन लेकर हॉस्पिटल में मरीजों को लगवाए जाए। इसकी मानीटरिंग जिला प्रशासन पर छोड़ी गई है।

शहर में कल रेमडेसिविर इंजेक्शन आए। शासन स्तर पर आए इंजेक्शन तो माधवनगर हॉस्पिटल एवं चरक में नि:शुल्क लगवाने के लिए ड्रग इंस्पेक्टर ने भिजवा दिए। प्रायवेट हॉस्पिटल ने स्टॉकिस्ट के माध्यम से करीब 200 इंजेक्शन खरीदे। इन्हे खरीदने के बाद प्रायवेट हॉस्पिटल्स ने अपने यहां संचालित मेडिकल स्टोर्स पर कथित तौर पर रखवा दिए। जबकि सभी को भर्ती मरीजों की मेरीट के अनुसार इंजेक्शन बेचे गए थे और उन्हे मेरीट से ही लगाने के शासन के निर्देश हैं।

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प्रायवेट हॉस्पिटल्स में भर्ती मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाए कि मेडिकल स्टोर्स के माध्यम से इंजेक्शन अधिक दामों पर बेचे गए। मरीज के रोग की गंभीरता की मेरीट बनाने की अपेक्षा अपनो को, प्रभावशालियों के कहने पर मरीजों को इंजेक्शन लगाए गए। कुछ तो ऐसे हैं जिन्हे कल आवश्यकता नहीं थी लेकिन डिमांड दिखाकर स्टॉकिस्ट से खरीद लिए और अब अपने मेडिकल स्टोर्स से अपने ही यहां भर्ती मरीजों को बिकवा रहे हैं।

जांच हो-कितने इंजेक्शन कौन ले गया और किसे लगाए ?
लोगों ने मांग की कि कलेक्टर इसकी जांच करवाए। जितने इंजेक्शन कल स्टॉकिस्ट ने बेचे, उन्हे जिन प्रायवेट हॉस्पिटल्स ने खरीदा तो किसे लगाए? जिन्हे लगाए,क्या वो रोग की गंभीरता के आधार पर मेरीट पर थे? जो इंजेक्शन बच गए,उन्हे क्यों नहीं लगाया गया? कितनी राशि परिजनों से प्रति इंजेक्शन ली गई?

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परिजन शिकायत करें,हम जांच करेंगे -ड्रग इंस्पेक्टर
इस संबंध में चर्चा करने पर ड्रग इंस्पेक्टर धरमसिंह कुशवाह ने कहा कि कल प्रायवेट हॉस्पिटल्स ने स्टॉकिस्ट से इंजेक्शन खरीदे। उन्होने किसे लगाए,वे जाने। यदि अधिक दाम पर बेच रहे हैं तो परिजन शिकायत करे। मेरीट के आधार पर नहीं लगे तो भी शिकायत करें। हम जांच करेंगे।

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