Monday, May 16, 2022
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उज्जैन:जल संसाधन विभाग ने पक्के बांध की एक साल से सूध नहीं ली

स्नान तो करा दिया पर शिप्रा मैली हो गई

शिप्रा जल में घुलित ऑक्सीजन की कमी, मरने लगी मछलियां

उज्जैन।शनि मंदिर के पीछे बनाया मिट्टी का कच्चा बांध टूटने के बाद प्रशासन ने त्रिवेणी घाट पर श्रद्धालुओं को नर्मदा के जल से स्नान तो करा दिया,पर कान्ह के गंदे पानी से नर्मदा के लाखों गैलन पानी को दूषित कर दिया। शिप्रा में जमा पानी फिर से काला हो गया है। त्रिवेणी घाट के आगे से लेकर रामघाट तक शिप्रा का पानी फिर से काला हो गया है। जल में घुलित ऑक्सीजन खत्म होने से मछलियां मरने लगी। श्रद्धालु भी इस दूषित पानी में डुबकी लगाने को मजबूर है।

शनिवार तड़के त्रिवेणी पर बनाया मिट्टी का कच्चा बांध टूटने से कान्ह नदी से आने वाले गंदे पानी ने शिप्रा को मैली कर दिया। शिप्रा नदी का पानी काला पड़ गया। इसी दूषित जल में श्रद्धालुओं को स्नान करना पड़ा रहा है। कच्चा बांध टूटने के बाद जिम्मेदार प्रशासन दावा कर रहा है कि जल्द ही पक्का स्टॉपडेम बनाएंगे। जहां मिट्टी का बांध बनाया जाता है वहां पक्का बांध बनाने के लिए प्रक्रिया चल रही है। पक्का बांघ बनाने की बात एक साल से चल रही है।

बांध के केवल मौखिक आदेश हुए,तो जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने ध्यान ही नहीं दिया। बताया जाता है कि करीब एक साल जल संसाधन मंत्री ने पक्के बांध के लिए जल संसाधन के कार्यपालन यंत्री कमल कुवाल को निर्देश दिए थे। नया बांध बनाने के लिए विभाग से राशि नहीं मिलती है तो जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने इसकी सूध नहीं ली। शनिवार की घटना के बाद फिर से जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री कुवाल फिर दावा कर रहे है कि 15 दिन में नए बांध की डीपीआर तैयार होगी। यह बांध करीब 25 फीट ऊंचा बनाएंगे। इसमें गेट भी रहेंगे ताकि बारिश में पानी निकल सके। कलेक्टर आशीषसिंह का कहना है कि बांध निर्माण के लिए स्मार्ट सिटी या नगर निगम से धनराशि उपलब्ध कराने पर विचार चल रहा है।

रामघाट पर भी पहुंचा पानी…गंदे पानी को रोकने के लिए त्रिवेणी पर 60 मीटर चौड़ा और 18 फीट ऊंचा तक मिट्टी का बांध बनाया था। कच्चे बांध का हिस्सा बह गया। इससे गंदा पानी शिप्रा में मिला और यह त्रिवेणी के ब्रिज की तरफ भी तेजी से फैला। वहां तक जहां शनिश्चरी अमावस्या का मुख्य स्नान हो रहा था।

अधिकारियों ने हरनियाखेड़ी नागफनी के पाइंट चालू करवाकर नर्मदा का पानी छुड़वाना शुरू किया। ताकि स्नान के लिए साफ पानी मिल सके। त्रिवेणी घाट पर तो श्रद्धालुओं ने फव्वारों में स्नान कर लिया, लेकिन नर्मदा के तेज फ्लो से छोड़े गए पानी के साथ कान्ह का दूषित और गंदा पानी भी शिप्रा नदी में आगे बढ़ गया। ऐसी स्थिति में रामघाट सहित अन्य घाटों पर शिप्रा का पानी काला, प्रदूषित, मटमैले हो गया है। इसी पानी में लोगों को स्नान करने को मजबूर होना पड़ा रहा है। नदी के पानी के दूषित होने से रामघाट पर मछलियां मरने लगी। मरी मछलियां पानी के ऊपर आ गई थी। जल में घुलित अक्सीजन खत्म हो गया या कम होने लगा। इस वजह से मछलियां मरने लगी।

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