Sunday, May 22, 2022
Homeउज्जैनउज्जैन:डेंगू कंट्रोल में नहीं, वायरल मरीजों की संख्या में इजाफा

उज्जैन:डेंगू कंट्रोल में नहीं, वायरल मरीजों की संख्या में इजाफा

अब तक चार मौत, विभाग एक भी मानने को तैयार नहीं…

उज्जैन।उज्जैन जिले में डेंगू का असर बना हुआ हैं। सोमवार को आई जांच रिपोर्ट में 17 नए मरीज मिले हैं। बीते 18 दिन में 330 मरीज सामने आए हैं। मलेरिया विभाग के अनुसार जिले में अब तक डेंगू के 663 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से चार मौत भी हो चुकी है। इनमें नागदा में दो, माकड़ोन व उज्जैन में एक-एक मरीजों की मौत हुई है।

IMG 20211012 WA0009

निगम व मलेरिया विभाग की टीम मरीजों के घरों के आसपास लार्वा तलाश रही है, इसके अलावा दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि अब डेंगू का असर कम हो रहा है। पहले जहां रोजाना 30 से 35 मरीज रोजाना मिल रहे थे, वहीं अब यह आंकडा 15 से 20 मरीज तक पहुंच गया है। जानकारों के अनुसार डेंगू का मच्छर सिंतबर व अक्टूबर में अधिक पनपता है।

तापमान 14 डिग्री से कम होने पर मच्छरों की संख्या कम हो जाती है। डेंगू से जिले में चार मौत हो चुकी है। उज्जैन में चरक अस्पताल की लैब में पदस्थ एक महिला टेक्नीशियन की मौत हो चुकी है। वहीं नागदा में दो तथा माकड़ोन में भी एक मौत हो चुकी है। मगर मलेरिया विभाग का कहना है कि चरक अस्पताल की सेंट्रल लैब में की गई जांच में डेंगू की पुष्टि होने पर ही मान्य किया जाता है। हालांकि चारों लोगों की जांच सेंट्रल लैब में एलिजा टेस्ट के माध्यम से नहीं की गई थी।

कार्यशाला में बताया मरीजों का उपचार

मलेरिया विभाग ने डेंगू को लेकर एक निजी होटल में सरकारी व निजी डाक्टरों की कार्यशाला का आयोजन किया था। इसमें करीब 100 से अधिक चिकित्सक शामिल हुए थे। डाक्टरों को बताया गया कि डेंगू के मरीजों का उपचार किस तरह किया जाए जिससे की वह गंभीर स्थिति में ना पहुंचे। इसके अलावा डेंगू की रोकथाम के विषय पर भी चर्चा की गई।

TRAIL

इससे बचाव के लिए जागरूकता जरूरी…

वायरल, सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार का असर भी ज्यादा

बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने की भी आवश्यकता है कि वे अपने घर के आसपास पानी का जमाव नहीं होने दें। बुखार आने पर ब्लड की जांच आवश्यक रूप से करवाई जाए।

जिला अस्पताल सहित जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में ब्लड की जांच मुफ्त में की जा रही है। नियमित साफ-सफाई नहीं होने से मच्छरों के लार्वा पैदा होते हैं, इसके लिए जरूरी है कि लोग अपने घर के आसपास और कॉलोनियों में साफ-सफाई का ध्यान रखें। बता दें कि नगर निगम द्वारा शहर में अलग-अलग क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाया जा रहा है।

जिला चिकित्सालय सहित अन्य अस्पताल में ओपीडी मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई। इसकी मुख्य वजह इन दिनों सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार आदि लक्ष्ण वाले मरीजों की संख्या में इजाफा होना है।

चिकित्सकों के अनुसार किसी भी व्यक्ति को सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार, सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द, भूख न लगना, दस्त लगना आदि के लक्षण होने पर तत्काल डॉक्टर्स की सलाह लें। आमतौर पर देखा गया है कि मरीज घर पर ही पारंपरिक उपचार इलाज करते रहते हैं। ठीक होने की उम्मीद में 5 से 7 दिन गुजार देते है, जिससे स्वास्थ्य लाभ होने के बजाय उनकी बीमारी और बढ़कर जटिल हो जाती है। ऐसे लोंगो को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में अगर कोविड-19 की जांच पॉजीटिव आती है तो इलाज करना मुश्किल हो जाता है।

जरूर पढ़ें

मोस्ट पॉपुलर