Friday, May 27, 2022
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उज्जैन:सूदखोरों से परेशान लोग आत्महत्या करने को मजबूर

सेकंड अनलॉक के बाद आधा दर्जन से अधिक लोग दे चुके है जान, पुलिस का भी नहीं खौफ सूदखोरों में

बैंक के हस्ताक्षर किए हुए चेक देना होते हैं सूदखोरों को

उज्जैन सेकंड अनलॉक (जुलाई 201) के बाद से लेकर अब तक सूदखोरों से परेशान आधा दर्जन से अधिक लोग आत्महत्या कर चुके हैं, वहीं इससे दो गुना अधिक लोगों ने पुलिस और कलेक्टर की शरण ली है, लेकिन पुलिस और प्रशासन से बेखौफ सूदखोर अब भी लोगों से पठानी ब्याज वसूलने से बाज नहीं आ रहे हैं। दो दिन पूर्व भी सूदखोरों से परेशान होकर ट्रांसपोर्ट व्यापारी के पुत्र ने आत्महत्या कर ली। जबकि चार दिन पहले एक कपड़ा व्यापारी ने एसपी से गुहार लगाकर सूदखोरों से बचाने का आवेदन दिया है।

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सूदखोर कम से कम 5% और अधिकतम 30 से 40% ब्याज पर जरूरतमंद की जरूरत के हिसाब से उधार रुपए देते हैं। खास बात यह कि जरूरतमंद को सोना-चांदी आदि आभूषण या मकान, दुकान, जमीन अथवा कीमती वस्तु गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती है। सूदखोरों को सिर्फ बैंक के हस्ताक्षर किए हुए चेक देना होते हैं। सूदखोर अपने बचाव के लिए कई लोगों से स्टांप पर हस्ताक्षर भी करवा लेते हैं। इसका फायदा सूदखोरों को सीधे कोर्ट में होता है, वहीं दूसरी ओर यदि कोई व्यक्ति रुपए लौटाने में आनाकानी करें, तो उसे बैंक में लगाकर चेक बाउंस कराया जाता है और फिर उधार लेने वाले व्यक्ति की थाने में शिकायत भी कर दी जाती है।

पुलिस भी करती है सूदखोरों की मदद
कई थानों में ऐसे पुलिसकर्मी भी है जो सीधे तौर पर सूदखोरों से जुड़कर रुपए वसूलने में उनकी मदद करते हैं। सूदखोर बैंक से चेक बाउंस होने के बाद इन्हीं पुलिसकर्मियों की मदद से लोगों को धमकाने और जेल पहुंचाने की बात कहकर उधार रुपए लौटाने का दबाव भी बनाते हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पठानी ब्याज वसूलने वाले सूदखोर ऐसे पुलिसकर्मियों को उधारी की रकम मिलने के बाद मोटा कमीशन भेंट के रूप में देते हैं।

किसी काम की नहीं पुलिस हेल्पलाइन…उज्जैन पुलिस द्वारा सूदखोरों से परेशान लोगों को तुरंत मदद पहुंचाने के लिए पुलिस हेल्पलाइन शुरू की गई है। ऐसे लोग जो सूदखोरों से परेशान है वे हेल्पलाइन नंबर और ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं, लेकिन लोगों में सूदखोरों का भय और पुलिस थानों से सूदखोरों तक शिकायत संबंधी गोपनीय जानकारी पहुंचने के कारण लोगों में पुलिस पर भरोसा कम और सूदखोरों का भय अधिक व्याप्त है। यही कारण है कि तीन दिन पहले ट्रांसपोर्ट व्यवसायी के इकलौते युवा पुत्र ने पुलिस की मदद लिए बिना आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया।

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