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उज्जैन: इंदौर रोड पर कॉलोनाइजर की कारस्तानी

उज्जैन: इंदौर रोड पर कॉलोनाइजर की कारस्तानी

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‘उपवन’ को विकसित करने के लिए ‘विहार’ को उजाड़ा

40 से अधिक पेड़ शिफ्टिंग के नाम पर उखाड़ दिए, बाउंड्री वॉल को भी तोड़ दिया

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उज्जैन। इंदौर रोड एक कॉलोनी को बसाने के लिए दूसरी कॉलोनी को उजाडऩे का मामला सामने आया है। कॉलोनाइजर ने अपनी कॉलोनी के लिए जमीन और पैसा बचाने के उद्देश्य से पूर्व में विकसित एक कॉलोनी के 40 से अधिक पेड़ उखाड़ दिए। वहीं सुरक्षा के लिए निर्मित बाउंड्री वॉल को तोड़ दिया।

इंदौर रोड पर अंजूश्री इन के पीछे इंदौर के कॉलोनाइजर योगेंद्र जैन द्वारा उपवन नाम से कॉलोनी काटी जा रही है। यहां पर पूर्व में विकसित कॉलोनी सिद्धि विहार की बाउंड्री वॉल को तोडऩे के साथ-साथ 40 से अधिक पेड़ जेसीबी की मदद से उखाड़ दिए गए।

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कागजों में सब कुछ नियमों के अनुसार दिख रहा है, लेकिन क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि कॉलोनाइजर द्वारा अपनी कॉलोनी की जमीन बचाने के साथ-साथ कॉलोनी का फ्रंट पार्ट सिद्धि विहार की ओर रखने के उद्देश्य 10 से 15 साल पुराने वृक्षों को उखाड़ दिया गया है। यह वृक्ष सिद्धि विहार के रहवासियों द्वारा लगाए गए थे।

यह की है मनमानी

उपवन कॉलोनी के लिए 9 मीटर सड़क की अनुमति ली गई है। सिद्धि विहार कॉलोनी की सड़क पूर्व में ही 7.50 मीटर की है।

उपवन कॉलोनी के कॉलोनाइजर सिद्धि विहार की पूर्व निर्मित सड़क को मिलाते हुए मात्र डेढ़ मीटर की सड़क का निर्माण करना चाहते हैं। ताकि दोनों कॉलोनी की सड़क मिलकर 9 मीटर हो जाए। इसके लिए सिद्धि विहार की सुरक्षा दीवार को तोड़ दिया है। वहीं पेड़ भी उखाड़ दिए हैं।

उपवन कॉलोनी इंदौर के किसी योगेंद्र जैन के नाम पंजीकृत है और इसमें प्रमोटर और डेवलपर्स उज्जैन के है जो कॉलोनी विकास का काम देख रहे हैं।

सिद्धि विहार की दीवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यह कहते हुए तोड़ दिया कि यहां सड़क बनेगी, जबकि दीवार सिद्धि विहार कॉलोनी की जमीन पर थी। इसका निर्माण सिद्धि विहार कॉलोनाइजर सुरेश मोड़ द्वारा कराया गया था।

सिद्धि विहार की दीवार तोड़कर पर्यावरण दिवस के ठीक 3 दिन बाद कॉलोनाइजर ने पेड़ों को जेसीबी की मदद से उखाड़ दिया। कॉलोनीवासियों ने इसका विरोध किया तो नगर निगम की अनुमति का हवाला भी दिया गया। निगम की कॉलोनी सेल द्वारा पेड़ों को काटने की बजाय इनकी शिफ्टिंग की अनुमति दी गई है, कॉलोनाइजर ने इसका पालन नहीं किया।

उपवन कॉलोनी के कॉलोनाइजर को नगर निगम ने पेड़ की शिफ्टिंग (ट्रांसलोकेट) नगर निगम के अधीक्षण यंत्री की मौजूदगी में करने की अनुमति दी थी।

कॉलोनाइजर ने इसका पालन ही नहीं किया। मनमाने तरीके से पेड़ों को उखाड़ दिया। निगम ने 10 फीट से अधिक हाईट के 10 से 15 साल पुराने पेड़ों को शिफ्ट करने की अनुमति कॉलोनाइजर को दे रखी है।

रहवासियों के विरोध और कॉलोनी सेल में वृक्ष उखाडऩे की शिकायत के बाद कॉलोनी के प्रमोटर द्वारा कहा गया कि वह पेड़ों की शिफ्टिंग कर रहे हैं। इसके बाद उखाड़े गए पेड़ अज्ञात स्थान पर रख दिए गए हैं, जबकि शिफ्टिंग के लिए वैज्ञानिक आधार पर कार्य करना था प्रमोटर ने पेड़ शिफ्टिंग की विधि का पालन नहीं किया।
( जैसा कि सिद्धि विहार के रहवासी पुष्पेंद्र चित्तौडा ने बताया)

ऐसे होता है पेड़ ट्रांसलोकेट: पेड़ ट्रांसलोकेट के संबंध में जानकारों के मुताबिक पेड़ शिफ्टिंग (ट्रांसलोकेट) के लिए सबसे पहले स्थान का चयन किया जाता है।

वहां पर शिफ्ट किए जाने वाले पेड़ के लिए स्थान तैयार किया जाता है। जिस पेड़ को शिफ्ट किया जाना है उसे तने से तीन फीट की गोलाई में खोदा जाता है, मूल जड़ को भी पांच से छह फीट तक खोदने के बाद पेड़ की जड़ों की एक बॉल (गेंद की तरह गोल) तैयार की जाती है और फिर उसे उखाड़ कर नई जगह पर शिफ्ट किया जाता है। इसके पहले जिन पेड़ों को स्थानांतरित करना होता है उन्हें पहले छांट दिया जाता है। पेड़ की लगभग 80 फीसदी पत्तियां, तना और बाकी हिस्सा काटा जाता है।

एक मुख्य शाखा को करीब 15 फीट तक सलामत रखा जाता है। इसके बाद पेड़ के चारो ओर एक खाई को खोदा जाता है। इस खाई की गहराई पेड़ की उम्र के हिसाब से तय होती है। इसके बाद पेड़ की जड़ों में कई तरह की खाद व वर्मी कंपोस्ट व पोषक तत्व कुछ केमिकल्स लगाए जाते हैं और उन्हें टाट के बोरे में लपेटा जाता है।

इसके बाद क्रेन से वह पेड़ उठाया जाता है और उसे ट्रेलर पर रख दिया जाता है यहां से वह उस जगह पहुंचाया जाता है जहां उसे दोबारा लगाना हो।

इसके बाद पेड़ को फिर से एक गड्ढें में रखा जाता है और उसमें केमिकल्स डाले जाते हैं। सिद्धि विहार के रहवासी पुष्पेंद्र चित्तौडा का कहना है कि उपवन के कॉलोनाइजर ने पेड़ शिफ्टिंग के लिए ऐसा कुछ नहीं किया है और जेसीबी से 40 से अधिक पेडों को उखाडऩे के बाद ट्राली में भरकर अज्ञात स्थान पर भेज दिया है।

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