Wednesday, May 18, 2022
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उज्जैन : देशमुख हॉस्पिटल का हजारों वर्गफीट शासकीय जमीन पर कब्जा

संचालकों की मनमानी, अव्यवस्था और अराजकता का अड्डा है हॉस्पिटल

उज्जैन। देशमुख हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर यानि मनमानी, अव्यवस्था और अराजकता का अड्डा है। हॉस्पिटल का नया मसला सामने आया है। संचालकों ने हजारों वर्गफीट शासकीय जमीन पर कब्जा कर निर्माण कर लिया है। प्रशासन अब वास्तविकता सामने आने के बाद कब्जा हटाने की बात कर रहा है।

देशमुख हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर द्वारा शासकीय जमीन पर कब्जा करने की शिकायत प्रशासन को मिली थी। इसके बाद राजस्व विभाग के दल ने जमीन की नपती की तो हकीकत उजागर हो गई। प्रारंभिक जांच में राजस्व अमले ने ग्राम नानाखेड़ा की भूमि सर्वे क्रमांक 315 की नपती में निस्तार चरनोई की भूमि पर देशमुख हास्पिटल का पक्का निर्माण, एक स्कूल का गार्डन सहित अन्य पक्का निर्माण होना पाया है। राजस्व निरीक्षक सादिक खान के साथ पटवारी सुधीर गोस्वामी, कमलेश शर्मा ने नपती कर जमीन का पंचनामा बनाया है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार देशमुख हॉस्पिटल ने 4500 वर्ग फीट शासकीय जमीन कब्जा कर रखा है। एसडीएम कल्याणी पांडे के अनुसार जांच प्रतिवेदन पर वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश पर कार्रवाई कर हॉस्पिटल से कब्जा हटाया जाएगा।

हले ही दे दी थी ब्लड शुगर की रिपोर्ट

बता दे कि करीब ८ माह पहले देशमुख हॉस्पिटल में कोरोना मरीज जिस तारीख में भर्ती ही नहीं हुआ था, उस तारीख में उसकी ब्लड शुगर की रिपोर्ट अस्पताल प्रबंधन ने बनाकर दे दी थी। अपने बेटे की मौत के बाद सीनियर एडव्होकेट महेंद्र जैन ने पुलिस को केस दर्ज करने के लिए आवेदन दिया था। जैन के पुत्र देवेंद्र जैन को 17 अप्रैल 2021 को देशमुख अस्पताल में भर्ती किया गया था। इसकी ब्लड शुगर रिपोर्ट एक दिन पहले (१६ अप्रैल) को ही बनाकर दे दी गई थी।

जमकर हंगामा हुआ था

करीब ६ माह पहले कोरोना का कहर बना हुआ था, तब में एक मरीज के परिजनों ने जमकर हंगामा कर हॉस्पिटल की पोल खोल दी थी। मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिलने पर परिजनों ने आरोप लगाया था कि हॉस्पिटल का स्टाफ इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए पकड़ा चुका है। मरीजों के हिस्से के इंजेक्शन कहीं बेच दिए हंै। ऑक्सीजन बेड के 15 हजार रुपए और इंजेक्शन के 20 हजार रुपए लेने के आरोप लगे थे।

कालाबाजारी के मास्टरमाइंड हॉस्पिटल के कर्मचारी

कोरोनाकाल में भी कालाबाजारी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा था। उज्जैन में मरीजों को लगाने की बजाय रेमडेसिविर इंजेक्शन बाजार में बेचे जा रहे थे। इसके बाद पुलिस एक्शन में आई और जाल बिछाकर देशमुख हॉस्पिटल के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया था। गिरोह के मास्टर माइंड कुलदीप, राजेश और सरफराज थे। तीनों आईसोलेशन वार्ड में काम करते थे। यह लोग मरीजों को लगने वाले इंजेक्शन में से कटौती कर कुछ को बचा लेते थे। यानि मरीज को इंजेक्शन नहीं लगाते थे। इसके बाद इसी इंजेक्शन को बाहर लाकर बेच देते थे। उस वक्त तीनों से रेमडेसिविर और एंटी बायोटिक इंजेक्शन जब्त किए गए थे। आरोपियों ने गुनाह कबूल कर लिया था।

रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में नाम आ चुका है

कोरोना महामारी की भयावह तीसरी लहर के वक्त रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी और बाजार से अधिक दाम में इंजेक्शन बेचने के मामले मेें देशमुख हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का नाम आ चुका है। पुलिस ने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में देशमुख हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के आईसोलेशन वार्ड में काम करने वाले तीन लड़कों को गिरफ्तार किया था।

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