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उज्जैन: बालिका दुष्कर्म कांड पर उठते सवाल…

क्या हर वह व्यक्ति दोषी है, जिसने पीडि़त बच्ची को नजर अंदाज किया..? पुलिस हो या आम नागरिक

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:सतना की एक बालिका से उज्जैन में दुष्कर्म के बाद पुलिस मामले का खुलासा और अपराधी को पकड कर अपनी पीठ थपथपा रही है। लोगों में पुलिस को शाबासी देने की होड मची है।

सत्ता को राहत है कि पुलिस ने अपना काम बेहत्तर तरीके से किया। विपक्ष तो कानून-व्यवस्था की आलोचना कर रहा है। इसके बाद भी ज्वलंत प्रश्न यही है कि आखिर कौन लापरवाह,कौन असंवेदनशील था…? क्या हर वह व्यक्ति दोषी है, जिसने बच्ची को नजरअंदाज किया..? पुलिस हो या आम नागरिक…!

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किसी का मन नहीं पसीजा

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दुष्कर्म के बाद सड़क पर डरी-सहमी लड़की थी। फटे कपड़े पहने थे। शरीर से खून बह रहा था। रोते हुए मदद की गुहार लगाई लेकिन किसी ने मदद नहीं की। दो कॉलोनी के 500 से ज्यादा घरों के सामने से होते हुए बालिका दो ढाबों ,एक टोल नाके,एक एक पेट्रोल पंप के सामने से होकर निकली।

लडख़ड़ाते कदम से घटना स्थल से करीब 8 किमी दूर बडऩगर रोड स्थित दांडी आश्रम पहुंची। हैरानी की बात ये है कि इस दौरान इस लड़की को लोगों ने देखा। कई वाहन भी वहां से गुजरे। जहां से भी उसे उम्मीद दिखी, मदद की गुहार लगाई, लेकिन लोगों ने उसे अनदेखा कर दिया।

किसी ने भी उसकी इस हालत के पीछे हकीकत जानने की कोशिश नहीं की। बालिका की हालात देखकर किसी का भी दिल नहीं पसीजा…? भला हो आश्रम के पुजारी का जो उसने खून से लथपथ हालत में बालिका को भटकते हुए देख कर पुलिस को खबर दी थी।

रेल द्वारा स्कूली ड्रेस में सतना से उज्जैन तक 683 किमी की दूरी तय करने वाली बालिका पर किसी भी यात्री के मन में यह क्यों नहीं आया कि छोटी सी बच्ची अकेल सफर क्यों कर रही है।

रेलवे का दावा रहता है कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए आरपीएफ और जीआरपी हमेशा मुस्तैद रहती है,तो जब बालिका ट्रेन में सवार थी,तो दोनों सुरक्षा बल के जवान या अधिकारी कहा थे ? बच्ची स्कूल ड्रेस में थी, इसके बावजूद पुलिस ने उसके बारे में पता करने की कोशिश नहीं की।

जिस सतना पुलिस को तुरंत गुमशुदगी दर्ज करते हुए एक्शन लेना था, उसने एफआईआर 24 घंटे बाद दर्ज की। बच्चों के मामले में नियम है कि रिपोर्ट तत्काल दर्ज कर आसपास के जिलों की पुलिस को इसकी जानकारी देना अनिवार्य है। पुलिस तुरंत एक्टिव हुई होती और रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आगे बढ़ी होती,तो शायद बच्ची का जल्द पता चल जाता और वह दुष्कर्म से बच गई होती। गुमशुदगी दर्ज करने के बाद भी उज्जैन में रेप की खबर पर भी सतना पुलिस सक्रिय नहीं हुई।

बालिका की गुमशुदगी के बाद सतना पुलिस तो सोई रही,उज्जैन पुलिस भी क्या लापरवाह बनी रही। उज्जैन पुलिस यदि सिर्फ सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) का रिकॉर्ड ही खंगाल लेती तो उसे पता चल जाता कि यह बच्ची सतना जिले से गुम हुई है। गुमशुदगी वाली सूची में इस बच्ची का पूरा प्रोफाइल मिल गया होता।

उज्जैन पुलिस ने प्रदेश के अन्य जिलों को बालिका की पहचान के लिए जानकारी ही नहीं भेजी। परिजनों को बालिका के उज्जैन में मिलने और उसके साथ दुष्कर्म होने की जानकारी मीडिया से लगी। इधर, उज्जैन के पुलिस अधिकारी बच्ची की बोली के आधार पर उसे उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का बताने लगे थे।

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