Monday, May 16, 2022
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उज्जैन : रजिस्ट्रेशन मोटर साइकिल का चालान बना एक्टिवा का

लापरवाह सिस्टम: नंबर एक, वाहन दो

उज्जैन।स्मार्ट इंट्रीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तहत बने चालान ने इसके संचालन पर सवाल तो उठा ही दिए है। सिस्टम की एक बड़ी चूक या यू कहें कि लापरवाही को सामने ला दिया हैं। दरअसल, बीते दिनों ट्रैफिक सिग्नल तोडऩे के मामले में एक एक्टिवा का ई-चालान बनाया है। जिस वाहन चालाक को चालान भेजा गया है। उसके पास अव्वल को एक्टिवा है नहीं और वह उज्जैन नहीं आया था। दूसरी सबसे बड़ी बात जिस एक्टिवा का चालान बना है। उस नंबर की एक मोटरसाइकिल महिदपुर तहसील के कस्बे झारड़ा निवासी के पास पंजीकृत है।

शहर के प्रमुख चौराहों से निकल कर गुजरने वाले वाहन चालकों के ट्रैफिक नियमों तोडऩे पर आईटीएमएस के जरिए स्मार्ट सिटी के कंट्रोल एंड कमांड सेंटर में बैठे स्मार्ट सिटी कंपनी के ऑपरेटर ही वाहन चालकों को ई-चालान जनरेट कर भेज रहे हैं। इसमें कई लोगों के गलत चालान भेजे जा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। इसमें एक ऐसे वाहन चालक को एक्टिवा द्वारा यातायात के नियम तोडऩे का ई-चालान पहुंचा दिया गया, जिसने कभी एक्टिवा खरीदना तो दूर चलाई भी नहीं।

मामले में झारड़ा निवासी गोकुल घुंघरवाल का कहना है कि स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा उन्हें 5 अप्रैल को एसएमएस के जरिए ५०० रुपए का ई-चालान उनके मोबाइल नंबर पर भेजा गया। इसमें मजेदार बात यह है कि जिस चौराहे से वह गया नहीं उस चौराहे में भी ट्रैफिक नियम का उल्लंघन करने पर चालान भेज दिया गया। गोकुल ने बताया कि 4 अप्रैल को वह उज्जैन आया ही नहीं, दूसरी बात जिस एक्टिवा गाड़ी के द्वारा ट्रैफिक नियम उल्लंघन बताया जा रहा है वह उसकी है ही नहीं। बावजूद उसे 500 रुपए का ई चालान भेजा गया।

इसलिए भी सवाल…दो पहिया वाहन के एक ही सीरिज के यदि दो वाहन जिले में दौड़ रहे है तो इस पर पुलिस या परिवहन विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ी। आरटीओ पोर्टल के अनुसार एमपी १३ एफ आर ९१२५ मोटरसाइकिल लगभग सात माह पहले पंजीकृत हुई है। वहीं इसी नंबर की एक्टिवा यदि सड़कों पर दौड़ रही हैं तो सवाल बड़ी चूक का है। वह यह कि पुलिस और परिवहन विभाग में इस पर गौर कैसे नहीं किया।

50 हजार से अधिक चालान बन चुके है अब तक

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 21 जनवरी 2020से शहर के 9 चौराहों में आईटीएमएस (इंट्रीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) शुरू किया गया है। अभी तक 50 हजार से अधिक ई-चालान काटे जा चुके हैं।

रोजाना 500 ई-चालान भेजने का टारगेट

शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के नाम पर स्मार्ट सिटी और ट्रैफिक पुलिस ने 500 ई-चालान रोजाना जनरेट करने का लक्ष्य रखा है। इनदिनों रोजाना करीब 350-400 ई-चालान जनरेट किए जा रहे है।

एक्टिवा का भी वहीं नंबर जो मोटर साइकिल का..स्मार्ट इंट्रीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तहत झारड़ा निवासी गोकुल घुंघरवाल को जो ये चालान भेजा गया है उसमें ट्राफिक सिग्नल तोडऩे के लिए फोटो सहित जिस एक्टिवा का नंबर लिखा गया है। वह एमपी १३ एफ आर ९१२५ है। यह नंबर चालान की प्रति में स्पष्ट तौर पर अंकित है। सबसे बड़ी बात यह है कि परिवहन विभाग के पोर्टल (देखे फोटो) पर यह नंबर दर्ज करने पर वाहन की डिटेल्स में मोटर साइकिल की जानकारी सामने आ रही हैं।

पड़ताल की जिम्मेदारी आरटीओ की

शासन की यह व्यवस्था है कि ई-चालान की एक कॉपी आरटीओ को भेजी जाती है। इसमें कार्रवाई करने के अधिकारी भी जिला आरटीओ के पास है। हमारे हाथ में कुछ नहीं। जिस मामले की जानाकरी आपने मुझे दी है, उसके पड़ताल की जिम्मेदारी भी आरटीओ साहब की है।

सुरेन्द्र सिंह राठौर, यातायात डीएसपी
हमारी कोई गलती नहीं

स्मार्ट इंट्रीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम कैमरा बेस है। जो नंबर कैमरे में कैप्चर होता है। उसी आधार पर चालान बनता है। यदि एक नंबर की दो गाडिय़ों जिले में चल रही है। तो उससे हमारा कोई लेना देना नहीं है। यह देखने का काम यातायात पुलिस और परिवहन विभाग का है। इसमें स्मार्ट सिटी की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती है।
आशीष पाठक,स्मार्ट सिटी सीईओ उज्जैन

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