Sunday, May 22, 2022
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उज्जैन:15 दिन में आएगी रिपोर्ट तो ऐसी सैंपलिंग का क्या मतलब

सैंपलिंग या चल रहा है कुछ और ? खाद्य सुरक्षा प्रशासन की कार्यवाही सवालों के घेरे में

क्या सालाना टारगेट के साथ विभाग की वसूली का भी लक्ष्य ?

उज्जैन। आम उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के नाम पर खाद्य सुरक्षा प्रशासन विभाग एक बार फिर सक्रिय हो गया है। दिवाली के पहले विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हर साल दीपावली फेस्टिवल सीजन से पहले शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चलाया जाता है, लेकिन जिले में टेस्टिंग लैब नहीं होने से इसकी रिपोर्ट आने में कई-कई माह की देरी सेहत से खिलवाड़ करने वाली है। दीपावली को सिर्फ 2 दिन ही बचे हैं।

ऐसे में अभी लिए जाने वाले सैंपलों की रिपोर्ट आएगी, तब तक त्योहारी सीजन बीत चुका होगा। दीपावली फेस्टिवल सीजन में सबसे ज्यादा मिठाइयों की बिक्री होती है और हर घर में भी मिठाइयां बनती हैं। हमेशा की तरह खाद्य सुरक्षा प्रशासन विभाग अमला त्योहारों के पहले सैंपलिंग लेने के लिए निकल पड़ा है।

सैंपलिंग का विरोध नहीं है, पर सवाल यह कि आखिर त्योहार के पहले क्यों…सालभर क्यों नहीं..? इसके साथ विभाग की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रश्न यह भी है कि क्या त्योहार के समय ही सैंपलिंग उचित है? सैंपलिंग के बाद विभाग की प्रशंसा के साथ सैंपलिंग को बढ़ा चढ़ाकर प्रतिष्ठान और संचालकों के नाम से सार्वजनिक करना ठीक है? सैंपलिंग के लिए त्योहार के समय को चुनना और विभाग का सक्रिय होना किसी के गले नहीं उतरता है। इधर त्योहारी सीजन में अपने स्तर पर प्रशासन के निर्देश का सहारा लेकर आखिर विभाग क्या करना चाहता है।

सालाना वसूली के आरोप भी: बीते वर्ष दीवाली सादगी से मनी थी और बाजार बहुत फीका रहा था। कई व्यापारियों की शिकायत थी कि लागत भी वसूल नहीं कर पाए थे। लेकिन इस बार जैसे-तैसे जब व्यापार पटरी पर लौटा है तो खाद्य एवं औषधी विभाग की काईवाई व्यापारियों को सता रही हैं। जिले का खाद्य सुरक्षा प्रशासन का अमला केवल सैंपलिंग कर अपनी सक्रियता दिखा रहा हैं।

शहर में खाद्य एवं औषधी प्रशासन ने खाद्य सामग्रियों की सेंपलिंग का अभियान छेड़ा है। कुछ व्यापारियों ने तो नाम नहीं छापने की बात पर आरोप लगाया है कि अफसर सैंपलिंग की आड़ में केवल सालाना वसूली कर रहे हैं। साथ ही व्यापारियों का कहना है कि सैंपल की रिपोर्ट आने के पहले प्रतिष्ठानों और संचालकों के नाम को प्रचारित करने से व्यापार प्रभावित होता है। सैंपलिंग में ही प्रतिष्ठान का नाम आने पर उपभोक्ता शंका की नजरों से देखते है। वहीं कतिपय लोग सैंपलिंग में नाम आने के कारण अनुचित दबाव बनाते हंै।

खाद्य सुरक्षा बसंत दत्त शर्मा से सीधी बात

सवाल- सैंपल भरने की कार्यवाही किन किन दुकानों से हुई?

जवाब- पिछले 15 दिनों की जानकारी बिना पड़लात के नहीं दे पाउंगा लेकिन रविवार को पांच दुकानों पर जाकर सैंपल लिए गए हैं।

सवाल- सैंपल के रिजल्ट कितने दिन में आएंगे?

जवाब- वैसे तो सैंपलों की जांच के रिजल्ट 15 दिनों में आ जाते है लेकिन कई बार लैब की केपिसिटी के हिसाब से सैंपलों की रिपोर्ट देर से आती है।

सवाल- यदि आपको वास्तव में शहर की जनता को गुणवत्ता पूर्ण सामान उपलब्ध करवाना है तो यह कार्यवाही पहले क्यूं नही हुई, जब रिजल्ट 15 दिन में आएंगे तब तक तो सारा माल बाजार से बिक जाएगा?

जवाब- ऐसा नहीं है वर्ष में सीजन के हिसाब से सैंपल लेने की कार्रवाई की जाती है, अभी दीपावली का त्योहार नजदीक है। ऐसे में मावा, मिठाई और खानपान के अन्य पदार्थों की मांग, उत्पादन और खपत अधिक होती है। मिलावट की गुंजाईश नहीं रहे, इसलिए प्रशासन के निर्देश पर मावा, मिठाई, दूध दुकानों के विशेषकर सैंपल लिए जा रहे हैं।

सवाल- व्यापारियों का आरोप है की इस प्रकार की कार्यवाही करके त्योहार के समय अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है, इस पर आपका क्या कहना है?

जवाब- ऐसा नहीं हमारे विभाग का काम सैंपल लेने का है और समय-समय पर चलता रहता है इसमें दबाव बनाने जैसी कोई बात नहीं है।

सवाल- क्या ऐसी कार्यवाही का मकसद शहर के स्थानीय व्यापारियों को बदनाम करके मल्टी नेशनल कंपनियों के सामान को लाभ करना है?

जवाब- मल्टीनेशनल कंपनियों के सामान को लाभ पहुंचाने का कोई उद्देश्य नहीं है, लोगों को सही क्वालिटी की सामग्री मिले इसलिए सैंपल लिए जाते हंै।

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