एस-4 मॉडल पर आधारित होगी सिंहस्थ की प्लानिंग

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर पुलिस विभाग का सेमिनार, अनुभव, संवेदनशीलता, समन्वय और भविष्य की रणनीति पर चर्चा
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उज्जैन। सिंहस्थ-2028 के सुचारू आयोजन की रूपरेखा तैयार करने के उद्देश्य से सोमवार को इंदौर रोड स्थित होटल अंजूश्री में पुलिस विभाग ने सेमिनार किया। इसमें सिंहस्थ की चुनौतियों, तैयारियों, भीड़ एवं यातायात प्रबंधन, बल और सामग्री प्रबंधन को लेकर मंथन किया गया। शुभारंभ डीजी ईओडब्ल्यू उपेंद्र जैन ने किया। उन्होंने 2004 के सिंहस्थ के दौरान आईं चुनौतियों और उससे निपटने की की जानकारी दी। मॉर्डन टेक्नोलॉजी के यूज पर जोर दिया। इस दौरान नवीन बैच के आईपीएस अधिकारियों तथा एएसपी/एसडीओपी स्तर के अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित करने पर भी मंथन किया ताकि सिंहस्थ-2028 के दौरान सुरक्षा, यातायात एवं भीड़ प्रबंधन की चुनौतियों से निपटा जा सके।
एस-4 मॉडल में यह: एडीजीपी प्रशिक्षण राजाबाबू सिंह ने सिंहस्थ में बल प्रशिक्षण पर प्रकाश डाला। डीआईजी, विशेष शाखा तरुण नायक ने 4-एस मॉडल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एस-शेयरिंग के अंतर्गत सूचनाओं एवं अनुभवों का साझा करना, सेंसिटाइजेशन के माध्यम से संवेदनशील होकर प्रशिक्षण देना, सिनर्जी के जरिए समन्वित प्रयासों एवं आपसी सहयोग को सुदृढ़ करना तथा स्ट्रेटजी के तहत ठोस व्यूह रचना तैयार करना है। इसी अनुरूप पुलिस बल को चुनौतियों के लिए तैयार किया जाएगा।
सिंहस्थ 2016 के अनुभव व 2028 की चुनौतियां: एसपी प्रदीप शर्मा ने सिंहस्थ 2028 के पूर्वानुमान एवं तैयारियों की जरूरतें बताईं। उज्जैन झोन के आईजी राकेश गुप्ता ने सिंहस्थ 2016 के अनुभवों को साझा किया। सेमिनार में पैनल डिस्कशन भी हुआ जिसमें 2004 एवं 2016 के सिंहस्थ की भीड़ और ट्रैफिक कंट्रोल, पुलिस बल के रुकने की व्यवस्था, 2028 में सिंहस्थ की चुनौतियों, अत्याधुनिक तकनीक पर चर्चा की गई। सेवानिवृत्त आईजी मनोहर सिंह वर्मा, सिवनी एसपी सुनील मेहता और इंदौर के एडिशनल सीपी राजेश सिंह ने सुझाव रखे। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की डीन प्रो. मधुश्री शेखर ने सॉफ्ट स्किल्स की आवश्यकता एवं पुलिस बल के संवेदीकरण पर प्रस्तुतिकरण दिया। एडीजीपी साईं मनोहर ने कहा यह सेमीनार सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को पुख्ता करेगा।










