Tuesday, May 17, 2022
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कब है नरसिंह जयंती?

हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, नृसिंह जयंती या नृसिंह चतुर्दशी हर साल वैशाख माह के शुक्ल की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. इस बार यह तिथि 14 मई को पड़ेगी. मान्यता है कि इसी तिथि को भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह का अवतार लिया था. नृसिंह अवतार में भगवान विष्णु ने अर्ध सिंह एवं अर्ध मनुष्य का रूप धारण किया था. इसी लिए भगवान के इस रूप को नृसिंह रूप कहा गया.

कहा जाता है कि वैशाख मास के चतुर्दशी तिथि को भगवान श्री हरि विष्णु ने नृसिंह का अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का वध किया और इसके आतंक से अपने अनन्य भक्त प्रह्लाद की रक्षा की. भगवान नृसिंह ने भक्त प्रह्लाद को वरदान दिया कि इस दिन जो भी व्रत करेगा, असाध्य रोगों से मुक्त होगा. वह समस्त सुखों का भोग करेगा और सभी प्रकार के पापों से मुक्त होकर परमधाम को प्राप्त होगा.

नृसिंह चतुर्दशी 2022 या नरसिंह जयंती कब है?

  • वैशाख शुक्ल चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 14 मई 2022, शनिवार दोपहर 03:23 बजे
  • वैशाख शुक्ल चतुर्दशी तिथि समाप्त: 15 मई 2022, रविवार दोपहर 12:46 बजे

नरसिंह जयंती का महत्व 
नरसिंह जयंती को नरसिंह प्राकट्य दिवस के रूप से भी जाना जाता है। यह जयंती बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानकर मनाई जाती है। इस दिन को नरसिंह जी के भक्त पूजा और व्रत करते हैं। मान्यता है यदि नरसिंह जयंती के दिन आराधना और पूजन करने से समृद्धि, साहस और सफलता की प्राप्ति होती है।

पूजन विधि 

  • ब्रह्ममुहूर्त में पवित्र स्नान करके नए वस्त्रों को धारण करें।
  • पूजन से पूर्व पूजास्थल को साफ करें और विधिवत मूर्तियों या तस्वीरों की स्थापना करें।
  • जयंती के इस दिन नरसिंह जी के साथ साथ लक्ष्मी पूजन भी किया जाता है।
  • पूजा के समय और दिन के समय भी भगवान नरसिंह जी की आराधना करें।
  • पूजा के बाद देवताओं को नारियल, मिठाई, केसर और फलों का भोग लगाएं।
  • नरसिंह जयंती पर भगवान नरसिंह का व्रत सूर्योदय के समय आरंभ होकर सूर्योदय पर ही समाप्त हो जाता है। इस व्रत में अनाज का सेवन निषेध है।
  • शाम की पूजा के उपरांत तिल, भोजन और वस्त्र का दान करें। इससे पुण्य प्राप्त होता है।
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