Tuesday, May 17, 2022
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कब है महाशिवरात्रि? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

हिंदू धर्म में भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा-अराधना का विशेष महत्व है. मान्यता है भगवान शिव बहुत ही दयालु और कृपालु भगवान हैं. वे मात्र एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं. हर माह आने वाली मासिक शविरात्रि  के साथ-साथ साल में पड़ने वाली महाशिवरात्रि का भी खास महत्व है. बता दें महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन मनाई जाती है. इस दिन विधि-विधान के साथ भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से  मनचाहा वर की प्राप्ति होती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सौभाग्य में वृद्धि होती है.

साथ ही, ऐसा माना जाता है कि इस दिन शवि जी का रूद्राभिषेक करने से जीवन के सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है. इस दिन भगवान शिव के साथ माता-पार्वती की पूजा भी की जाती है. आइए जानते हैं महाशिवरात्रि की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में.

महाशिवरात्रि 2022 तिथि 

हिंदू पंचाग के अनुसार साल 2022 में महाशिवरात्रि तिथि 1 मार्च, मंगलवार सुबह 3:16 मिनट से शुरू होकर और चतुर्दशी तिथि का समापन 2 मार्च, बुधवार सुबह 10 बजे होगा.

महाशिवरात्रि पूजन का शुभ मुहूर्त 

-महाशिवरात्रि के पहले प्रहर की पूजा- 1 मार्च, 2022 शाम 6:21 मिनट से रात्रि 9:27 मिनट तक है.

– इस दिन दूसरे प्रहर की पूजा- 1 मार्च रात्रि 9:27 मिनट से 12: 33 मिनट तक होगी.

– तीसरे प्रहर की पूजा- 1 मार्च रात्रि 12:33 मिनट से सुबह 3 :39 मिनट तक है.

– चौथे प्रहर की पूजा- 2 मार्च सुबह 3:39 मिनट से 6:45 मिनट तक है.

– पारण समय- 2 मार्च, बुधवार 6:45 मिनट के बाद.

शिवरात्रि के व्रत का महत्व समझें

कहा जाता है कि महाशिवरात्रि का व्रत रखने से व्यक्ति को सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और उसकी आत्मा शुद्ध व निर्मल बनती है. महाशिवरात्रि का दिन महादेव के भक्तों को तमाम यातनाओं से बचाता है. अगर कुंवारी लड़कियां ये व्रत रखकर महादेव से योग्य वर की कामना करें, तो उनकी कामना जरूर पूरी होती है. वहीं सुहागिन स्त्रियां शिवरात्रि का व्रत करें और महादेव और मां पार्वती का आशीर्वाद लें, तो उनका वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है और पति को दीर्घायु प्राप्त होती है.

महाशिवरात्रि पूजन विधि 

फाल्गुन मास में आने वाली महाशिवरात्रि  साल की सबसे बड़ी शिवरात्रि में से एक मानी जाती है. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद घर के पूजा स्थल पर जल से भरे कलश की स्थापना करें. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति की स्थापना करें. फिर अक्षत, पान, सुपारी, रोली, मौली, चंदन, लौंग, इलायची, दूध, दही, शहद, घी, धतूरा, बेलपत्र, कमलगट्टा आदि भगवान को अर्पित करें. पजून करें और अंत में आरती करें.

ये गलतियां भूलकर भी न करें

 शिव जी को चंपा या केतकी का फूल अर्पित न करें. कनेर, गेंदा, गुलाब, आक आदि के फूल चढ़ाएं

– रोली और हल्दी भूलकर भी न चढ़ाएं.

– महादेव की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है, इसलिए तुलसी अर्पित न करें.

– टूटे हुए अक्षत का इस्तेमाल पूजा के दौरान न करें.

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