Thursday, May 19, 2022
Homeपेरेन्टिंग एंड चाइल्डकहीं आप भी तो नहीं करते Over Parenting?

कहीं आप भी तो नहीं करते Over Parenting?

कुछ Parents ऐसे होते हैं जो अपने बच्‍चों को ओवर प्रोटेक्‍शन  में रखते हैं. ऐसे माता-पिता हर वक्‍त इस कोशिश में रहते हैं कि उनके बच्‍चों को कभी भी शारीरिक या मानसिक रूप में आहत ना होना पड़े.  दरअसल, ओवर-पेरेंटिंग  परवरिश की एक शैली होती है जिसमें माता-पिता बच्चों के जीवन में जरूरत से ज्‍यादा ही इंटरफेयर करते हैं. वे हर वक्‍त बच्चे के चारों ओर मंडराते रहे हैं.

ऐसे माता-पिता को हर वक्‍त इस बात की चिंता रहती है कि उनके बच्‍चे को कुछ हो ना जाए. वे बच्‍चों को लेकर हर वक्‍त अलर्ट रहते हैं और हर तरह से उन्‍हें प्रोटेक्‍ट रखने की कोशिश करते हैं. लेकिन आपको बता दें कि पेरेंट्स की इस आदत का बच्‍चों के मानसिक (Mental Health) और शारीरिक स्‍वास्‍थ्‍य पर बुरा Side Effects असर पड़ता है. यहां हम आपको ये ही बता रहे है कि अगर आप भी ओवर पेरेंटिंग कर रहे है तो इसका आपके बच्‍चों को कि तरह से गंभीर नुकसान हो सकता है.

ओवर पेरेंटिंग का बच्‍चों पर ये होता है नुकसान 

1.सीखने का मौका नहीं मिलता

बच्चे को अगर गलती नहीं करने दी जाए तो उन्‍हें गलतियों से सबक लेने का अवसर भी नहीं मिल पाता. ऐसे बच्चे जिन्हें गिरने न दिया जाए वो यह सीख नहीं पाते हैं कि गिरने के बाद कैसे उठना है और आगे बढ़ना है. वह यह भी नहीं सीख पाते कि आखिर वो गिरा कैसे. ऐसे में भविष्य में वो बाधाओं से निपटना नहीं सीख पाते और हर निर्णय लेने के लिए अपने माता-पिता की जरूरत महसूस करते हैं.

2.आत्‍मसम्‍मान की भावना कम

जो माता-पिता बच्चों की जरूरत से ज्‍यादा केयर करते है और हर वक्‍त उन पर नजर रखते हैं उनके बच्‍चों में आत्म-सम्मान की भावना कम हो सकती है. यही नहीं, उनमें ये भावना भी घर कर जाती है कि माता-पिता के बिना उनका कोई काम नहीं होगा. उनका आत्म-सम्मान माता-पिता या अन्य लोगों की इच्छा पर निर्भर करता है.

3.आत्‍मविश्‍वास कम

ओवर पेरेंटिंग (Over parenting) की वजह से बच्‍चे खुद से निर्णय लेना नहीं सीख पाते और उनका आत्‍मविश्‍वास कम हो जाता है. ऐसे बच्‍चे अकेले किसी भी निर्णय को लेने में सक्षम नहीं हो पाते. बाद में चल कर उन्‍हें छोटी-छोटी समस्‍याओं का भी खुद से समाधान निकालना असंभव लगता है. इस तरह उनका आत्‍मविश्‍वास गिरता ही चला जाता है. ऐसे बच्‍चे धीरे-धीरे बैक बेंचर हो जाते हैं

4.अवसाद से ग्रस्‍त

यह पाया गया है कि अधिक रक्षात्मक माता-पिता वाले बच्चों में जीवन भर अवसाद की भावना रह जाती है. वे हर चीज में खुद को अयोग्य समझते हैं और तनाव, चिंता से ग्रस्‍त रहते हैं. आमतौर पर ऐसे बच्‍चे बड़े होकर जीवन से असंतुष्ट होते हैं और अपने आसपास के लोगों से जरूरत से अधिक अपेक्षाएं रखते हैं.

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