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कैसा होना चाहिए रिज्यूमे

रिज्यूमे अब सिर्फ जानकारी का दस्तावेज नहीं रहा, बल्कि यह आपकी सोच, कार्यशैली और टीम में आपके वास्तविक योगदान को प्रभावी ढंग से पेश करता है। यही बदलाव दर्शाता है कि पुराने रिज्यूमे को अधिक असरदार व करिअर केंद्रित बनाना क्यों जरूरी है।

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पुराने और नए रिज्यूमे में अंतर

पहले रिज्यूमे की शुरुआत में लंबा प्रोफाइल परिचय लिखा जाता था। अब छोटा और सीधा प्रोफाइल सारांश पर्याप्त है। पहले केवल शिक्षा और काम का विवरण पर्याप्त था, अब कौशल, प्रोजेक्ट्स और डिजिटल अनुभव मायने रखते हैं। अब बहुत गहन निजी जानकारी, जैसे-जन्मतिथि, लिंग, वैवाहिक स्थिति आदि जरूरी नहीं रहे। टाइम्स न्यू रोमन या एरिअल जैसे फॉन्ट के बजाय पढऩे में आसान फॉन्ट व स्पष्ट लेआउट चलन में हैं।

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बदलते कामकाजी माहौल में अपनी योग्यता को प्रभावी ढंग से पेश करना जरूरी है। वजह है कंपनियों का प्रोजेक्ट्स में योगदान और समस्या समाधान जैसे कौशलों पर ध्यान देना। इस कारण रिज्यूमे में अब कुछ परिवर्तन किए जाने लगे हैं-

डिजिटल प्रोफाइल- कंपनियां गिटहब, बेहांस या लिंक्डइन जैसी प्रोफाइल भी देखती हैं, जहां आपके असल प्रोजेक्ट्स और कौशल साफ नजर आते हैं। इसलिए इनके लिंक रिज्यूमे में डालना जरूरी है।

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कौशल पर जोर- रिज्यूमे में अपना प्रोजेक्ट योगदान, तकनीकी ज्ञान और इंटर्नशिप या फ्रीलांस अनुभव दिखाएं। इससे प्रोफाइल नियोक्ता की नजरों में असरदार व भरोसेमंद लगेगी।

डिजिटल टूल्स की जानकारी- एआई, एसईओ, डिजाइन टूल्स जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग दिखाएं। यह प्रोफाइल को आधुनिक और पेशेवर दिखाता है।

कीवर्ड्स और एटीएस- रिज्यूमे एप्लीकेंट ट्रैकिंग सिस्टम से भी स्कैन होते हैं। इसलिए सही कीवर्ड्स समरी, स्किल्स और एक्सपीरियंस में शामिल करें, ताकि यह आसानी से शॉर्टलिस्ट हो सके।

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