कोरोना के कोहराम में गुम हुई सुहाग नगरी की चूड़ियों की खनक

विस्तार- कोरोना वायरस के कोहराम में फिरोजाबाद की चूड़ियों की खनक गुम हो गई है। यहां कांच चूड़ी कारोबार पूरी तरह से चरमरा गया है। बाहर से व्यापारी न यहां आ रहे हैं और न ही यहां के व्यापारी बाहर जा रहे हैं।

यह समय चूड़ी के लिए लगन का सबसे बड़ा सीजन माना जाता है। चूड़ी उत्पादन से लेकर चूड़ी की बिक्री तक का चक्र कोरोना के कारण टूट गया है। बाहर के बाजारों से आर्डर नहीं मिल रहे हैं।

चूड़ी कारोबारियों के अनुसार लगन के सीजन पर करीब पांच सौ करोड़ का कारोबार हो जाता है। कोरोना वायरस के कारण इस बार चूड़ी कारोबार पर बुरा असर पड़ा है।

कारोबारियों में मायूसी

सुहाग नगरी में बनने वाली कांच की चूड़ियां पूरे देश में पहनी जाती हैं। होली के बाद चैत्र नवरात्र से मई माह तक पूरे देश में चूड़ियों की बंपर सेल होती है। चूंकि होली के बाद सहालग के साथ बडे़-बडे़ मेले आदि लगते हैं।

इसलिए चूड़ी बाजार में इस सीजन को लगन का सीजन कहा जाता है। इस सीजन में चूड़ियों की सबसे अधिक मांग उत्तर प्रदेश के सभी शहरों के अलावा बिहार, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से होती है।

चूड़ी कारोबारियों के अनुसार लगन के सीजन में करीब 500 करोड़ का कारोबार होता है, लेकिन इस समय कोरोना के कारण कारोबार प्रभावित हुआ है। इससे कारोबारियों में मायूसी छाई हुई है।

कोरोना के कारण व्यापार थमा

चूड़ी व्यापारी नीरज जैन ने कहा कि होली के बाद से ही पूरे देश से आर्डर मिलना शुरू हो जाते हैं। इस बार कोरोना के कारण व्यापार थम गया है। बाजार में सन्नाटा है। जबकि इस सीजन में फुरसत नहीं मिलती थी।

चूड़ी व्यापारी उमेश उपाध्याय ने बताया कि चूड़ी व्यापार के लिए होली के बाद सबसे बड़ा सीजन शुरू होता है। बाहर के व्यापारी आर्डर नहीं दे रहे हैं। बाहर के व्यापारियों का कहना है कि कोरोना के कारण मेला आदि सब बंद हैं। चूड़ी बिकेगी कहां।

चूड़ी व्यापारी सत्यवीर गुप्ता ने बताया कि कोरोना के कारण चूड़ी कारोबार थम सा गया है। तीन स्तर पर चूड़ी कारोबार प्रभावित है। उत्पादन, डेकोरेशन, चूड़ी गोदाम के साथ-साथ श्रमिक भी प्रभावित हैं। यहां से नेपाल और बंगलादेश भी चूड़ी जाती है। चूड़ी डेकोरेशन के लिए चीन से आने वाले आयटम भी नहीं आ रहे हैं।

उत्पादन पर भी सीधा असर

चूड़ी कारखाना संचालक संजय कुमार घंटू ने बताया कि जब बाजार से चूड़ी की डिमांड नहीं निकल रही तब उत्पादन पर भी सीधा असर है। आर्डर न होने के कारण उत्पादन भी कम किया जा रहा है। पॉट फर्नेश के यहां सौ से अधिक चूड़ी कारखाने हैं। टैंक फर्नेश के करीब 12 कारखाने हैं। सभी में उत्पादन की रफ्तार कम है।