चींटी और टिड्डा की यह कहानी देती है मेहनत करने की प्रेरणा

बचपन में हम सबने चींटी और टिड्डा की कहानी पढ़ी होगी। इस कहानी में भी मेहनत और लगन के साथ अपने काम लगे रहने का एक संदेश छिपा है। आगे पढ़ें चींटी और टिड्डे की पूरी कहानी-

एक बार चींटियों का दल हमेशा की तरह अपने काम में जुटा था। तभी वहां नाचता उछलता हुआ एक टिड्डा पहुंचा। टिड्डे को मस्ती करते देख चींटियों ने उसे सर्दी में आने वाले मुकिश्‍लों को याद कराया। उन्होंने कहा कि वह भी काम करे नहीं ठंड में कुछ खाने को नहीं मिलेगा और पूरी ठंड ठिठुरते रहना पड़ेगा।

लेकिन टिड्डे ने उनकी एक न सुनी और उल्टे उनका ही मजाक बनाने लगा। टिड्डा, चींटियों से कहने लगा- ‘आप लोग भी मेरी तरह नाचने गाने का आनंद लो क्या पूरे दिन भागदौड़ में लगी रहती हो।’

चींटियों ने कहा, ‘नहीं हम मस्ती नहीं कर सकतीं क्योंकि सर्दियां आने वाली हैं और उसके लिए भोजन इकट्ठा करना है। और हमारे ख्याल से तुम्हें भी ऐसा ही करना चाहिए।

‘इस पर टिड्डे ने कहा, ‘अभी सर्दियां बहुत दूर हैं। देखो आज कितना अच्छा मौसम है, तुम भी मेरे साथ आओ मौज मस्ती का आनंद लो।’ और फिर टिड्डा गाने में जुट गया।

इधर कुछ दिन बाद ठंड का मौसम आ गया। अब टिड्डे का चेहरा मुरझाया हुआ था। क्योंकि उसने ठंड के लिए कोई तैयारी नहीं की थी। खेतो में बर्फ की चादर पड़ गई। टिड्डे के पास अब कुछ भी खाने को नहीं बचा था। भूख से मर रहे टिड्डे को अंत में उन चीटियों से खाना मांगना पड़ा जिन्हें वह कभी मौज-मस्ती की सलाह दे रहा था।

कहानी की सीख : जो अपने काम में मेहनत और लगन के साथ जुटा रहता है उसका आगे आने वाला समय आनंददायक होता है।