जेल में हर ‘बैरक लॉकडाउन’

परिजनों से बात करने लगाए टेलीफोन, सोने की व्यवस्था बदली, उपवास भी नहीं करेंगे बंदी

इंदौर। कोरोना वायरस इंदौर की जेलों में भी साफ नजर आ रहा है। जेल की हर बैरक को लॉकडाउन कर दिया है यानी एक बैरक के बंदी दूसरे बैरक के बंदियों से नहीं मिल पा रहे है। इधर बंदियों की मुलाकात बंद करते हुए हर बैरक के बाहर टेलिफोन लगा दिए है ताकि बंदी अपने परिजन से टेलिफोन से बात कर पाए।

इतना ही नहीं जेल में बंदियों के सोने के लिए भी क्रास व्यवस्था की गई है। इतना ही नहीं नवरात्रि पर इस बार कैदियों को उपवास न करने के लिए भी जेल प्रशासन ने राजी कर लिया है। कोरोना वायरस से बचने का तरीका एक-दूसरे का संपर्क खत्म करना है। इसीलिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से दो बार अपील भी कर ली है। पहली बार में एक दिन का जनता कफ्र्यू लगवाया था।

वहीं अब कल रात से २१ दिन के लिए पूरे देश में लॉकडाउन करवाया गया है और अपील की गई है कि सोशल डिस्टेंस मेंटेन किया जाए। इंदौर की सेंट्रल जेल में 2800 कैदी इस समय बंद है। समझा जा सकता है कि कितनी बड़ी भीड़ एक ही जगह पर लगातार मौजूद है। लेकिन यहां न तो धारा १४४ लगाई जा सकती है और ना ही कफ्र्यू यहां लगाया जा सकता है क्योंकि यह तो है ही सरकारी मेहमान। अब यहां पर कोरोना न पैहले इसके लिए जेल अधीक्षक राकेश भामरे ने कई व्यवस्थाएं की है।

सेनेटाइजर से धुलवाए जा रहे हाथ, बांटे मास्क
भामरे के अनुसार जेल में आने वाली हर नई आमद (वैâदी) और जेल स्टाफ के लिए यह जरूरी कर दिया गया है कि वह जेल में आते ही सबसे पहले सेनेटाइजर से हाथ धोए। इसके अलावा हर वैâदी और जेल स्टाफ को मास्क भी बांट दिए गए है। यहां तक कि बैरकों में भी सेनेटाइजर रख कर यह निर्देश दिए गए है कि हर घंटे में वैâदी अपने हाथ सेनेटाइजर से धोए।

एक बैरक के बंदी दूसरे से नहीं मिल पा रहे
हर बैरक में लगभग ४० कैदी बंद है। जेल प्रशासन द्वारा यह व्यवस्था की गई कि एक बैरक के कैदी दूसरे बैरक के वैâदियों से न मिल पाए। यानी कि बैरक लॉकडाउन कर दिए गए है। खाने व नित्य क्रियाओं के लिए एक समय पर एक ही बैरक के बंदियों को बाहर निकाला जा रहा है। उन्हें अंदर करने के बाद दूसरी बैरक के बंदियों को बाहर किया जा रहा है। यानि की किसी भी बैरक के बंदी दूसरे से नहीं मिल पा रहे है।

सर्दी-खांसी वालों के लिए अलग वार्ड
जेल में आने वाले हर बंदी का सबसे पहले स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। इसके अलावा जिन भी वैâदी को सर्दी-खांसी की दिक्कत है उन्हें अलग आयसोलेशन वार्ड में रखने की व्यवस्था जेल विभाग ने की है। इन वैâदियों की खास तौर पर इलाज व अन्य व्यवस्थाएं की जा रही है। फिलहाल कोई भी बंदी कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं मिला है।

सोने में भी क्रास व्यवस्था
पहले बंदी जब सोते थे तो सभी के मुंह एक-दूसरे के पास ही रहते थे। अब यह निर्देश दिए गए है कि एक के सिर के पास दूसरे बंदी के पैर याने कि क्रास में बंदी बैरक में सोए।

परिजनों से बात करने के लिए लगाए टेलिफोन
जेल के हर वार्ड में इस समय टेलिफोन की व्यवस्था की गई है जिस पर केवल इनकमिंग कॉल की सुविधा है। कुल १६ फोन इस समय जेल में लगाए गए है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस की आशंका के चलते ही चार दिन पहले से जेल में बंद बंदियों से मुलाकात पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। अब बंदी अपने परिजनों से इन टेलिफोन के माध्यम से बात कर पा रहे है। फिलहाल जेल प्रशासन की यह भी कोशिश है कि पेरोल पर ज्यादा से ज्यादा वैâदियों को छोड़ा जाए। पिछले चार दिन में करीब ३५ बंदियों को पैरोल पर छोड़ा गया है। इसके साथ ही नई आमद भी कम होती जा रही है।

नवरात्रि के उपवास नहीं करेंगे बंदी
आज से नवरात्रि पर्व की शुरुआत हो गई है। जेल में इस समय करीब 1 हजार बंदी उपवास करते है। कल जेल अधीक्षक भामरे ने बंदियों से भी चर्चा की है। उपवास की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता कम न हो जाए इसलिए सभी वैâदियों ने इस बार उपवास न करने का निर्णय लिया है। हालांकि जेल में धार्मिक आस्था व भक्ति का माहौल इस समय बना रहे।