Tuesday, November 28, 2023
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नर्मदा के 321 करोड़ रुपए का कर्जा माफ…अब शिप्रा बुझा रही प्यास

जिस पानी से आचमन करना भी मुश्किल वही पी रहे उज्जैन के रहवासी

नर्मदा के 321 करोड़ रुपए का कर्जा माफ…अब शिप्रा बुझा रही प्यास

अक्षरविश्व न्यूज . उज्जैन:जिस शिप्रा नदी में आचमन नहीं कर सकते, उसका पानी अब शहर के लोगों की प्यास बुझा रहा है। 435 करोड़ की योजना से नर्मदा का पानी उज्जैन आ सकता है, लेकिन यह महंगा पड़ता है। उज्जैन नगर निगम पर नर्मदा नदी के पानी का 321 करोड़ रुपए का कर्जा चढ़ गया था, लेकिन सरकार ने बड़ी मुश्किल से इसे माफ किया।

गंभीर डेम में बहुत कम पानी बचा है। इस कारण शिप्रा नदी का पानी भी फिल्टर कर शहर में सप्लाई किया जा रहा है। आधे शहर को एक दिन छोड़कर पेयजल दिया जा रहा है। नर्मदा के पानी की अभी डिमांड नहीं की जा रही है क्योंकि शिप्रा में अभी पानी है और पहले जो नर्मदा का पानी आया था, उसका 321 करोड़ रुपए का बिल बकाया हो गया था। इसे धर्मस्व विभाग ने माफ कर दिया है। नगर निगम को यह पैसा अब चुकाना नहीं पड़ेगा।

गऊघाट फिल्टर प्लांट के तीन में से दो प्लांट गंभीर डेम का पानी साफ कर पीने योग्य बनाते हैं जबकि तीसरा 3 एमजीडी क्षमता का प्लांट शिप्रा का पानी साफ कर सप्लाई किया जाता है। पिछले कुछ समय से शिप्रा का पानी फिल्टर कर पेयजल के रूप में प्रदाय किया जा रहा है। गंभीर डैम में अब केवल 304 एमसीएफटी पानी ही पीने योग्य सप्लाई का बचा है। इस कारण शिप्रा का पानी फिल्टर कर उपयोग में लिया जा रहा।

प्रदूषण निवारण मंडल की पूर्व वैज्ञानिक के घर पहुंचा प्रदूषित पानी

शिप्रा का पानी उपयोग करने से शहर में पानी का रंग मटमैला होने की शिकायतें तो पीएचई को आए दिन मिल रही हैं, लेकिन शनिवार को महाकाल वाणिज्यिक केंद्र निवासी मप्र प्रदूषण निवारण मंडल की पूर्व वैज्ञानिक डॉ. प्रतिमा जोशी के घर प्रदूषित पानी पहुंचा। डॉ. जोशी प्रदूषण विभाग से सेवानिवृत होने के बाद पर्यावरण के लिए काम कर रही हैं, लेकिन उनके ही घर पर झागदार और बदबूदार पानी आया। हालांकि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि और कहीं से शिकायत नहीं आई है। हो सकता है कि उनके क्षेत्र की लाइन लीकेज हो।

इस तरह माफ हुआ भारी भरकम बिल…

नर्मदा के पानी का उपयोग करने के कारण नगर निगम को 321 करोड़ रुपए का बिल दे देने के कारण नगर निगम की परेशानी बढ़ गई थी। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) ने इसकी वसूली के लिए निगम प्रशासन को 100 नोटिस भेजे थे। निगम का कहना था कि ने लोगों को पानी पिलाने, तीज-त्योहार पर स्नान कराने के लिए नर्मदा नर्मदा का पानी लिया। इसलिए कलेक्टोरेट या धर्मस्व विभाग चुकाएगा।

इसको लेकर धर्मस्व विभाग को पत्र भेजा गया। तीन माह पहले भोपाल में एक बैठक हुई जिसमें तय हुआ कि यह राशि निगम को नहीं चुकानी है। प्रमुख सचिव धर्मस्व, एनवीडीए के पीएस और वित्त विभाग के पीएस के साथ नगरीय प्रशासन विभाग के पीएस की संयुक्त बैठक में यह सहमति बनी कि पानी धर्मस्व के कार्य के लिए लिया गया। इस कारण यह बिल निगम को नहीं देना है।

लाखों खर्च फिर भी ऐसा क्यों

डॉ. जोशी का कहना है कि शनिवार सुबह दुर्गंधयुक्त, झागदार पानी 20 मिनट से ज्यादा समय तक आया। आश्चर्य है कि लाखों रुपए की एलम, क्लोरीन का उपयोग करने के बाद भी ऐसा प्रदूषित पेयजल? डॉ. जोशी का कहना है कि उनके घर और आसपास अक्सर इस तरह की शिकायतें आती हैं।

अभी दूसरा विकल्प नहीं

शिप्रा नदी का पानी पेयजल के लिए फिल्टर कर प्रदाय करना शुरू कर दिया है, क्योंकि दूसरा कोई विकल्प नहीं है। इसके कारण पानी के रंग को लेकर शिकायतें आई थीं लेकिन फिल्टर प्लांट में लाइम की मात्रा बढ़ाकर दूर कर दी हैं।
एनके भास्कर, कार्यपालन यंत्री, पीएचई

बिल नहीं भरना है

नर्मदा का पानी लेने के लिए एनवीडीए ने 321 करोड़ रुपए का जो बिल भेजा था वह अब निगम को नहीं देना है। –रौशनकुमार सिंह,आयुक्त नगर निगम उज्जैन

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