Tuesday, May 17, 2022
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नवरात्रि शुरू होने में बस चंद ही दिन बाकी, जाने पूजा और श्रृंगार की सामग्री

चैत्र माह की शुरुआत होते ही भक्तों को नवरात्रि का इंतजार शुरू हो जाती है. चैत्र नवरात्रि की शुरुआत शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होते हैं. 2 अप्रैल से चैत्र माह के नवरात्रि की शुरुआत होगी और 10 अप्रैल तक चलेंगे. नवरात्रि के दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के दिनों में मां की पूजा से विशेष कृपा प्राप्त होती है.

नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है. मां का हर एक रूप खास है. नवरात्रि के दिनों में लोग घर में अखंड ज्योति जलाते हैं, ऐसे में बार बार बाजार से सामान लाना संभव नहीं होता. तो आज हम आपको बता रहे हैं पूजन सामग्री, श्रृंगार सामग्री के बारे में.

दुर्गा पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर, फूल, फूल माला, आम के पत्ते, चौकी में बिछाने के लिए लाल रंग का कपड़ा, बंदनवार, सिंदूर, सोलह श्रृंगार (बिंदी, चूड़ी, तेल, कंघी, शीशा आदि), पान, सुपारी, लौंग, बताशा, हल्दी की गांठ, थोड़ी पीसी हुई हल्दी, आसन, चौकी, मौली, रोली, कमलगट्टा, शहद, शक्कर, पंचमेवा, गंगाजल,  नैवेध, जावित्री,नारियल जटा वाला, सूखा नारियल, नवग्रह पूजन के लिए सभी रंग या फिर चावलों को रंग लें, दूध, वस्त्र, दही, पूजा की थाली, दीपक, घी, अगरबत्ती आदि सामान पहले से ही एकत्रित करके रख लें.

कलश स्थापना के लिए सामग्री

ग्रंथों के अनुसार मांगलिक कार्यों की शुरुआत से पहले कलश स्थापना की जाती है. कलश में भगवान गणेश के अलावा नक्षत्र, ग्रह विराजमान होते हैं. कहते हैं कि कलश में गंगाजल के अलावा तैतीस कोटि देवी-देवता विराजमान होते हैं, इसलिए किसी भी पूजा से पहले वहां पर कलश की स्थापना की जाती है.

कलश स्थापना के लिए  मिट्टी, मिट्टी का घड़ा, मिट्टी का ढक्कन, कलावा, जटा वाला नारियल, जल, गंगाजल, लाल रंग का कपड़ा, एक मिट्टी का दीपक, मौली, थोड़ा सा अक्षत, हल्दी-चूने से बना तिलक आदि पहले से लाकर रख लें.

मां दुर्गा के श्रृंगार की लिस्ट

नवरात्रि में मां दुर्गा के सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व बताया गया है. श्रृंगार के सामान में लाल चुनरी, लाल चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, काजल,  मेहंदी, महावर, शीशा, बिछिया, इत्र, चोटी, गले के लिए माला या मंगलसूत्र, पायल, नेल पेंट, लिपस्टिक, चोटी के लिए बैंड, नथ, गजरा, मांग टीका, कान की बाली, कंघी, शीशा आदि ले आएं.

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