Monday, May 16, 2022
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नहीं रहे मालवी के अनूठे गद्यकार, कवि और अनुवादक नवनीत

आगर मालवा।सुप्रसिद्ध लोकसर्जक श्री नरेंद्र श्रीवास्तव का विगत दिवस लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। लोक भाषा मालवी को अपने सृजन सरोकारों से लगातार समृद्ध करने वाले कवि, गीतकार, व्यंग्यकार, अनुवादक और लेखक नरेन्द्र श्रीवास्तव ‘नवनीत’ का जन्म ग्राम झोंकर (जिला शाजापुर म.प्र.) में नौ मार्च उन्नीस सौ पैंतालिस को एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था।

एम.ए., बीटीआई और साहित्य रत्न तक शिक्षित श्री नवनीत जी की हिन्दी और मालवी में दो दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। आपने तुलसीकृत रामचरित मानस के सुन्दरकांड, अरण्य कांड और किष्किन्धा काण्ड का मालवी में पठनीय और मननीय अनुवाद किया। सीता को ब्याव, भुंसारो, मालवी पारसियाँ, मालवी गज़ल, मालवी दोहे, मालवी व्यंग्य संग्रह के अलावा उन्होंने श्री देवनारायण चरित तथा ‘भरत को समाजवाद’ जैसे दो खण्ड काव्यों का भी सृजन किया।

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‘कई कूं ने कई नी कूं’ शीर्षक से उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखी। मालवी पत्रिका ‘फूल-पाती’ का संपादन वे कर रहे थे। देश-प्रदेश में कई समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रमुखता से स्थान पाती रहीं।

देश – प्रदेश की कई संस्थाओं से सम्मानित और पुरस्कृत नवनीत जी को महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा रजत पत्र, राज्यपाल महोदय द्वारा पुरस्कार, वागीश्वरी सम्मान, राष्ट्र भारती तथा कबीर सम्मान, नाथद्वारा ( राजस्थान) में श्रीमती लक्ष्मीदेवी ठक्कर सम्मान आदि सम्मान समय-समय पर प्राप्त हुए।

मध्यप्रदेश शासन के शिक्षा विभाग से सेवानिवृत श्री नवनीत जी जमनाबाई लोक साहित्य संस्था उज्जैन के अध्यक्ष तथा मानव लोक साहित्य संस्थान के सहसचिव के रूप में अपनी साहित्यिक सक्रियता बनाए हुए थे।

कई संस्थाओं द्वारा आपको अपना सलाहकार एवं मार्गदर्शक भी स्वीकार किया गया था। मालवा लोककला एवं सांस्कृतिक संस्थान उज्जैन एवं लोकगायक भेराजी सम्मान समारोह समिति द्वारा सुप्रसिद्ध लोक सर्जक श्री नरेन्द्र श्रीवास्तव की सुदीर्घ लोक साधना को नमन करते हुए उन्हें 32वां भेराजी सम्मान 2019 प्रदान किया गया था। समारोह के कुछ चित्र यहां दिए गए हैं।

नवनीत जी की आत्मकथा :

उनकी अंतिम कृति ‘झोंकर का इतिहास’ के लोकार्पण की स्मृतियाँ :

उनके जन्मस्थान झोंकर में 13 नवम्बर 2021 को एक अभिनव ऐतिहासिक कार्यक्रम सम्पन्न हुआ था। श्री नरेन्द्र श्रीवास्तव ‘नवनीत’ द्वारा रचित पुस्तक झोंकर का सांस्कृतिक वैभव का लोकार्पण किया गया था। श्री नवनीत ने 78 वर्ष की उम्र के इस पड़ाव में 150 पृष्ठ की इस शोधपूर्ण पुस्तक को बड़े संघर्ष से पूर्ण किया।

उन्हें आँखों से दिखाई देना बंद हो गया था। हाथ- पैरों ने जवाब दे दिया था। शरीर केवल एक गठरी मात्र बन कर रह गया था। बड़ी जिजीविषा और सुदृढ मनोबल होने से उसे पूर्ण ही नहीं किया, अपितु उसका लोकार्पण भी कराया।

वे मालवी भाषा के लोकप्रिय कवि थे। लगभग 35 पुस्तकों की रचना कर चुके थे, जिसमें मालवी में रामायण, कईं तमने सुन्यो, मालवी दोहे, देवनारायण चरित्र, भुंसारो , कबीर चालीसा, कविता नी मरे कदी जैसी अनेक रचनाएं हैं।

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कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ.शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने पुस्तक में प्रकाशित ग्रामीण जीवन और ग्राम में स्थित विभिन्न पुरातन स्थानों की झलकियों का सुंदर विवेचन किया। विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्ववेत्ता डॉ. रमण सोलंकी ने इसे पुरातत्व के छात्रों के लिए संदर्भ ग्रंथ घोषित किया।

कार्यक्रम के अध्यक्ष लोकतंत्र सेनानी और वरिष्ठ समाजसेवी गोवर्धनलाल गुप्ता ने श्री नवनीत के साहित्य प्रेम तथा झोंकर से उनके लगाव की चर्चा की ।

इस कार्यक्रम के संयोजन में उनके मित्र रमेश गुप्ता प्रारम्भ से ही जुड़े थे, उन्होंने नरेन भाई के बचपन के कुछ संस्मरणों को सुनाया। शाजापुर से आए अम्बाराम जी कराड़ा ने अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए नवनीत के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी। इस कार्यक्रम के आयोजन में ग्राम झोंकर के वरिष्ठ समाजसेवी, युवा, साहित्य प्रेमी और बड़ी संख्या में नागरिक सम्मिलित रहे।

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