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निजातपुरा में सागर फ्लेक्स पर आग बुझाने के प्रयास में दो संचालक झुलसे

कारण अज्ञात, मशीन और रॉ-मटेरियल जलकर खाक

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अक्षरविश्व न्यूज . उज्जैन:निजातपुरा तिराहे पर रविवार सुबह करीब 5 बजे सागर फ्लेक्स नामक संस्थान में भयंकर आग लगी। तीन मंजिला भवन के सबसे उपर स्थित गोदाम में रखे फ्लेक्स के बहुत सारे थान एवं दूसरे तल पर स्थित रात को ही लगाई गई नई मशीन जल कर राख हो गई। संस्थान मालिक के दोनों लड़के झुलस गए,जिसमें एक गंभीर है। यह सुखद बात रही कि भू-तल पर रखा मटेरियल, कम्प्यूटर सेक्शन तथा प्रथम तल पर रखी पुरानी मशीन आगजनी से सुरक्षित रही।

 

फायर ब्रिगेड का फोन घनघनाता रहा, किसी ने अटेंड नहीं किया तब पुलिस को दी सूचना

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प्रत्यक्षदर्शी प्रवीण रावत के अनुसार सुबह करीब 5.15 बजे धुंआ उठा और प्लास्टिक जलने की गंध आने लगी तो पत्नि ने खिड़की खोलकर बाहर देखा। सागर फलेक्स की बिल्डिंग से जमकर धुंआ निकल रहा था। पत्नि ने उन्हे जगाया। वे जब बाहर आए,तब तक छत ओर दूसरी मंजिल से आग की लपटे निकल रही थी। उन्होने तत्काल सागर को मोबाइल फोन करके सूचना दी। साथ ही फायर ब्रिगेड को सूचना दी।

फायर ब्रिगेड का फोन घनघनाता रहा तो उन्होंने कोतवाली थाने को सूचित किया। इधर उन्होने डायल-100 को फोन किया। शंका थी कि कहीं कोई कर्मचारी/चोकीदार अंदर न रह गया हो। फोन भोपाल लगा। वे लगातार कह रहे थे कि निजातपुरा में आग लग गई। दूसरी ओर से कहा जा रहा था कि शहर का नाम बताओ। तब उन्हे लगा कि यह कॉल तो भोपाल लग गया। उन्होने पूरा पता बताया। साथ ही शोर मचाकर आसपास के लोगों को सूचित किया।

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सागर-सोनू आए और सीधे ऊपर पहुंच गए

प्रवीण रावत के अनुसार मोबाइल करने के 15 मिनिट के अंदर सागर ओर सोनू (दुकान संचालक के बेटे) मौके पर आ गए। शटर खोला और अंदर गए तथा पहली मंजिल पहुंचे। वे छत पर तीसरी मंजिल गए। यहां धुंए का गुबार और आग की लपटे उठती देख छत पर बने गोदाम को आग से बचाने के लिए छत पर पहुंचे। गोदाम में फ्लेक्स के थान के थान भरे हुए थे। वहां आग के साथ दम घोंटने वाला धुंआ उठ रहा था। ये जान बचाने के लिए छत की सड़कवाली मुंडेर पर आ गए। तब तक आगजनी से तापमान इतना बढ़ गया था कि सागर 50 प्रतिशत से अधिक झुलस गया,उसकी चमड़ी जलकर निकलती दिख रही थी। वहीं सोनू के हाथ सामान हटाने में जल गए।

दादाजी को नहीं बताया.. तेजनकर में भर्ती है पापा

इधर मौके पर एक करीब 12 वर्ष का बच्चा खड़ा था। वहीं मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बालक से पूछा- दादाजी कहां है? उसने जवाब दिया…दादाजी को अभी तक नहीं बताया है। उन्हें मोबाइल मत करना। पापा को तेजनकर हॉस्पिटल में भर्ती करवाया है। मैं भी वहीं जा रहा हूं। आप जा रहे हो तो मुझे भी ले चलो। कर्मचारी बोले कि पहले तो अवंति हॉस्पिटल का बताया था, अब तेजनकर। जाना कहां है? समीप खड़े कोतवाली थाना प्रभारी शैलेंद्र शर्मा ने कहा कि पहले तेजनकर चले जाओ, वहां नहीं मिले तो अवंति चले जाना। उनके पहचान के लोग लेकर निकले थे उन्हें। हम तो यहां व्यवस्था में लगे हैं सुबह से।

जानकारी मिलते ही पहुंचे हम: थाना प्रभारी

थाना प्रभारी शैलेंद्र शर्मा ने चर्चा में कहा कि जैसे ही आगजनी की जानकारी थाने पर आई, हम तुरंत यहां पहुंचे। एसआई सलीम भी मौके पर आ गए। इन्होने तुरंत कोतवाली और फाजलपुरा वाले रास्ते बंद करवाए। इसी प्रकार कोयला फाटक से केवल फायर ब्रिगेड की दमकलों को आने दिया। आसपास के लोगों को घरों में ही रहने को कहा। सागर फ्लेक्स के दोनों ओर के मकान सुरक्षित रह गए क्योंकि आग अंदर ही अंदर उपर लग रही थी। आसपास के दोनों मकानों की उंचाई इनसे एक मंजिल कम थी। उन लोगों को ढांढस बंधाया कि हम यहां है, आप चिंता न करें। आकस्मिक स्थिति में आप लोगों को यहां से हटा लेंगे।

पत्थर से कांच नहीं फूटे तो हाथ से खोले गर्म स्लाइडर

फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने दोनों मंजिलों पर लगे कांच के स्लाइडरों को पत्थर फैककर फोडऩा चाहा,ताकि धुंआ बाहर निकलने का रास्ता बने और उन्हे अंदर पहुंचने का रास्ता मिल जाए। पानी की बौछार भी अंदर कर सकें। कांच नहीं फूटने पर वे सीढिय़ों से दोनों मंजिलों के स्लाइडर बाहर से खोलने पर मजबूर हो गए। पहली मंजिल के स्लाइडर तो खुल गए लेकिन दूसरी मंजिल के स्लाइडर अत्यधिक गर्म थे।

तोडफ़ोड़ करने के बाद उन्हे खोला तो धुंए का भयंकर गुबार बाहर निकलना शुरू हो गया। हमने यहां जमकर पानी फैका ओर उसके बाद छत पर बने गोदाम पर पानी फैकना शुरू किया। उपर जाने का रास्ता सीधा मिल नहीं रहा था और यह नहीं सुझ रहा था कि आग कहां से शुरू होकर कहां तक फैली है। जब लगातार पानी डाला गया तो दूसरी मंजिल की आग थमी। तब तक यहां लगी मशीन और फ्लैक्स आदि जलकर खाक हो चुके थे। उसके बाद हमे छत पर जाने का रास्ता मिला। यहां फ्लेक्स के थान के थान रखे थे जोकि पिघलने के बाद फैल गए थे तथा उनमें आग अंदर ही अंदर सुलग रही थी। धुंआ ओर दमघोंटू गैस निकल रही थी। उस पर लगातार बौछार करने पर भी वे कहीं न कहीं से सुलग जाते थे। यहां लकडिय़ां भी रखी थी,जो शायद फ्लेक्स के थान और नई मशीन की थी,जिसे शनिवार को ही खोला गया था।

सबसे पहले सागर पर पानी की बौछार कर आग का ताप कम किया

फायर ब्रिगेड के चिंतामण जायसवाल और बालाराम के अनुसार सूचना मिलने पर पहुंचे थे। देखा कि धुंए का गुबार छत से बाहर आ रहा है। प्रथम ओर दूसरी मंजिल पर लगे स्लाइडर पूरी तरह से बंद है। सागर ओर सोनू छत पर थे तथा आग से इतने गर्म हो गए थे कि सागर की चमड़ी जल रही थी,अंदर से गुलाबी रंग दिख रहा था मांस का। वह घबराकर छत से कूदने की तैयारी में था। इस स्थिति में सबसे पहले सागर ओर सोनू को बचाने के लिए पानी की बौछार की गई। ताकि ये पूरी तरह से जल न जाए। आग का ताप कम होने पर ये बच जाएंगे। हमने इन पर जमकर पानी फैका। इसके बाद सीढिय़ां लगाई और इन्हे उतारा। इनके पास बचने का ओर कोई रास्ता नहीं था।

आठ लाख की आबादी वाले शहर की फायर ब्रिगेड के पास भवनों पर चढऩे के लिए सीढ़ी तक नहीं

शहर के व्यस्ततम क्षेत्र निजातपुरा में हुए भीषण अग्निकांड ने आग से निपटने की व्यवस्था और जरूरतों की पोल खोलकर रख दी है। रविवार को सुबह हुए हादसे के बाद व्यवस्था और फायर ब्रिगेड के संसाधनों के बीच एक बड़ा गेप सामने आया है। इससे स्पष्ट हो गया कि उज्जैन में फायर बिग्रेड के पास आग बुझाने के इंतजाम ना काफी है। बहुमंजिला इमारतों में आपातकालीन स्थिति से निपटने के संसाधनों की कमी है।

यही नहीं फायर बिग्रेड का अमला भी आग से निपटने में असक्षम है। सागर फ्लेक्स में हुए हादसे के बाद बड़ी लापरवाही यह सामने आई कि ऊपर की मंजिल तक पहुंचने के लिए फायर बिग्रेड के पास सीढिय़ां तक नहीं थी पाइप की तो उम्मीद ही नहीं की जा सकती है। जानकारों के अनुसार उज्जैन नगर निगम द्वारा संचालित फायर बिग्रेड का अमला सिर्फ ३० से ३५ फीट ऊंचाई पर लगी आग बुझाने में सक्षम है। इससे अधिक ऊंचाई की बिल्डिंग में आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड के पास संसाधन तक नहीं है। हालात यह है कि इतने बड़े शहर में आग और प्राकृतिक आपदा से निपटने के संसाधनों की कमी तो है ही अमला भी प्रशिक्षित नहीं है। कुछ समय पूर्व फायर ऑफिसर की सेवानिवृति के बाद से अभी तक फायर बिग्रेड में दक्ष और प्रशिक्षित ऑफिसर की नियुक्ति नहीं की गई है।

फायर बिग्रेड जैसी महत्वपूर्ण आवश्यकता का संचालन प्रभारियों के भरोसे किया जा रहा है। कभी फायर ब्रिगेड की जिम्मेदारी नगर निगम के किसी उपयंत्री को थमा दी जाती है तो कई बार निगम के किसी कर्मचारी को ही यह दायित्व सौंप दिया जाता है। इस बात से अनुमान लगाया जा सकता है कि फायर बिग्रेड के हालात को लेकर न अधिकारी गंभीर है और ना ही जनप्रतिनिधि।

बताया जाता है कि उज्जैन फायर ब्रिगेड के लिए फायर ऑफिसर, फायरमैन, ड्रायवर और फायर सहयोगी के लिए लगभग १५० पद स्वीकृत है लेकिन स्थायी कर्मचारी १० से अधिक नहीं है, वहीं करीब ४० दैनिक वेतनभोगी और ठेका प्रणाली पर नियुक्त कर्मचारी फायर ब्रिगेड में सेवा दे रहे हैं। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इनमें से कोई भी फायर बिग्रेड व्यवस्था का संचालन करने के लिए पूर्ण रूप से प्रशिक्षित नहीं है। बताते हैं कि फायर बिग्रेड के नाम पर केवल फायर गाडिय़ां है और इसमें मोटरपंप के साथ पाइप लगे हैं। इन वाहनों में रस्सी, नाइलोन का जाल, फायर प्रूफ डे्रस और आग से सामना करने के संसाधन तक नहीं है। इतना ही नहीं प्राकृतिक आपदा भूंकप, आंधी-तूफान जैसी स्थिति बनने पर हालातों से निपटने की कोई व्यवस्था तक नहीं है। क्षेत्रफल के हिसाब से आग बुझाने वाली गाडिय़ों की भी कमी है। इनमें से कुछ तो अक्सर खराब ही होती रहती है।

टीटीएल मशीन के कई प्रस्ताव बने

महानगरों में हाईराइज बिल्डिंगों की आग बुझाने के लिए आधुनिक संसाधनों से लैस टीटीएल मशीन भी उपयोग में लाई जाती है। अब उज्जैन में भी हाईराइज बिल्डिंगे बनने लगी है। इसे देखते हुए लगभग ८ करोड़ कीमत की टीटीएल मशीन के लिए नगर निगम द्वार ाकई प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली। इसमें न कभी अधिकारियों ने रुचि ली और ना ही जनप्रतिनिधियों ने मशीन प्राप्त करने के प्रयास किए।

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