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नेताजी ‘मौन’, बोल रही ‘पर्ची’

आचार संहिता, खर्च पर सख्त पहरे और व्यय की सीमा का असर विधानसभा चुनाव पर भी नजर आ रहा है। बड़ी पार्टियों के प्रत्याशियों के सामने चुनावी खर्च के साथ नकद राशि का बंदोबस्त करना चुनौती बन गया है। खर्च मामले में नेताजी के ‘मौन’ के बीच उनके विश्वस्तों की ‘पर्ची’ बोल रही। नेताओं ने चुनावी खर्च के ‘रास्ते’ निकालकर कहीं पर्ची का सहारा लिया है, तो ज्यादातर ने अपने विश्वसनीयों को खर्च का काम सौंप रखा है।

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चुनाव में रोज होने वाले खर्च, कार्यकर्ताओं के खानपान, प्रचार के दौरान उपयोग होने वाले वाहन, साउंड सिस्टम सहित रोजाना सामाजिक बैठक आदि खर्च नकद ही करना होते हैं, लेकिन इस बार उसमें खासी परेशानी आ रही है। अब इसका रास्ता प्रत्याशी अपने-अपने तरीकों से निकाल रहे हैं। हालांकि जो खर्च प्रत्याशी के खाते में जुडऩा है, उसे ऑनलाइन या फिर चेक के माध्यम से सीधे दिया जा रहा है।

खर्च के लिए कोई ‘पर्ची’ चला रहा तो कोई बाद की तारीखों के चेक दे रहा। चेक परिवार या अन्य लोगों के माध्यम से दिए जा रहे। कोई अपने से जुड़े समर्थक या लोगों को भुगतान करने के लिए कह रहा। अधिकांश ने खर्च के लिए सारी जिम्मेदारी अपने खास व्यक्ति को दी है। जो भी भुगतान करना होता है, वह इन्हीं के माध्यम से दिया जा रहा है। इन सभी का रिकॉर्ड एक डायरी में रखा जा रहा है।

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चुनाव निपट जाने के बाद में यह पेमेंट लिया जाएगा। एक-दो उम्मीदवारों ने खर्च के प्रबंधन और उसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी अपने एक रिश्तेदार को दे दी है। चर्चा तो यह भी है कि नेताओं द्वारा संगठन से अलग अपनी टीम बनाकर भी पर्दे के पीछे से चुनाव का संचालन कराया जा रहा है। भुगतान के लिए एडजस्टमेंट की बात कही जा रही है। भुगतान के लिए नकदी का संकट सामने आने पर आश्वासन दिया जा रहा है कि चेक लो या किस्तों में बाद में पेमेंट ले जाना।

सुरक्षा पर सफाई की चिंता भारी

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वीवीआईपी की सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम जगजाहिर है, लेकिन इसमें किसी का हस्तक्षेप संभव नहीं है। इस बात से अनजान भाजपा के नेता बगैर सोचे-समझे सुरक्षा अमले को मंच पर देखकर नाराज हो गए। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की सभा के पहले सुरक्षा अमला मंच की मजबूती को परख रहा था। अमले में सुरक्षा अधिकारी-कर्मचारी और पुलिस बल था।

इस बीच भाजपा के स्थानीय संगठन के ‘संजय’ की दिव्य-दृष्टि मंच पर पड़ी तो तैश में आकर न केवल सुरक्षा अमले को मंच से नीचे आने की हिदायत दी, बल्कि यह भी कहा कि क्या कर रहे हो, मंच गंदा क्यों कर रहे हो, वापस पूरा साफ करना पड़ेगा। यह देख-सुनने के बाद भाजपा के अन्य नेताओं ने समझाया ‘संजय’ आप नहीं समझते हो, यह सुरक्षा चेकिंग है, लेकिन ‘संजय’ थे कि समझने को तैयार नहीं थे। तब एक पुलिस अफसर में अपनी शैली में कहा कि नियम की जानकारी नहीं हो तो अधिक बोलना नहीं चाहिए।

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