Sunday, May 22, 2022
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बच्चों को अनुशासित बनाने के दौरान अक्सर ये गलतियां करते हैं पेरेंट्स

आजकल ज्यादातर चीजों के डिजिटल होने और गैजेट्स की भरमार होने से चीजें बहुत आसान हो गई हैं. लेकिन इसका नेगेटिव ( negativity in Childs ) असर बच्चों की पढ़ाई और हेल्थ दोनों पर पड़ रहा है. कंपटीशन के इस दौर में पेरेंट्स को अपने बच्चों को वो सब चीजें मुहैया करानी पड़ती हैं, जो उसके लिए जरूरी होती है. हालांकि, बच्चा काम के अलावा इन चीजों का दूसरे तरीकों से इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में ज्यादातर पेरेंट्स अपने बच्चों को व्यवहारिक रूप से सही रखने के लिए हर तरह की कोशिश करते हैं. वे बच्चों को अनुशासन भी सिखाते हैं, ताकि वह आगे जाकर सही तरह से जीवन को व्यतीत करें.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक बच्चों को अनुशासित करना सही है, लेकिन इस दौरान पेरेंट्स अक्सर ऐसी गलतियां करते हैं, जो बच्चे के मन में उनके लिए द्वेष का भाव उत्पन्न कर देती हैं. हम आपको इन्हीं गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं.

बच्चों के प्रति नेगेटिव होना

कई बार माता-पिता बच्चों को सही चीजें सिखाने और समझाने के चक्कर में उनके प्रति बहुत नेगेटिव हो जाते हैं. इस कारण एक समय पर बच्चा भी अपने माता-पिता के प्रति नेगेटिव हो जाता है. इतना ही नहीं वह घर के अन्य सदस्यों को भी नफरत भरी निगाहों से देखता है. पेरेंट्स के इस नेगेटिव नेचर का बुरा असर बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है. माता-पिता की ओर से अपनाया गया ये रवैया बच्चे के दिमाग में लंबे समय तक रहता है.

खुद अनुशासनहीन होना

कई बार पेरेंट्स बच्चों से अनुशासन में रहने की उम्मीद करते हैं, लेकिन उन्हीं के सामने खुद अनुशासनहीन व्यवहार करते हैं. कहते हैं कि आप जैसा व्यवहार अपनाते हैं, बच्चा भी ठीक वैसे ही व्यवहार अपनाता है. इसलिए सलाह दी जाती है कि बच्चे के सामने ऐसी कोई चीज न करें, जो उसके दिमाग पर बुरा असर डाले. आप उसके सामने एक आइडल बनकर पेश होंगे, तो वो भी अनुशासित रहेगा.

कठिन नियम

अपने बच्चे को अनुशासित बनाने के लिए कई बार माता-पिता ऐसे कठिन नियमों का सहारा लेते हैं, जो उसके लिए बिल्कुल ठीक नहीं होते. कभी भी ऐसे नियम न बनाएं, जिन्हें फॉलो करने में बच्चे को मुश्किलों का सामना करना पड़े. इसके बजाय उन्हें समय के लिए पाबंद होना सिखाएं. या फिर साथ बैठकर खाना जैसी अच्छी आदत उसे डालें.

बच्चों के पक्ष को न सुनना

विशेषज्ञों के मुताबिक कई बार अनुशासन के चक्कर में माता-पिता बच्चे को इतना दबाकर रखते हैं कि उसकी बातों को नजरअंदाज करना उनकी आदत बन जाती है. ये व्यवहार बच्चों में नेगेटिविटी लाता है. इतना ही नहीं ऐसा करने से बच्चा माता-पिता क्या किसी अन्य के सामने भी अपनी बातों को रखने में संकोच महसूस करता है.

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