मप्र में सरकारी जमीन पर बन सकेंगी टाउनशिप

ज्यादा ग्रीन एरिया पर मिलेगा एफएआर का लाभ, डेवलपर्स के लिए 5 करोड़ का टर्नओवर जरूरी
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अक्षरविश्व न्यूज भोपाल। मध्यप्रदेश में अब सरकारी जमीन पर भी बिल्डर टाउनशिप ला सकेंगे। यह कुल टाउनशिप के एरिया के 20 फीसदी या 8 हेक्टेयर से अधिक नहीं होगी। राज्य शासन ने मध्यप्रदेश एकीकृत टाउनशिप नियम 2026 को जारी कर दिया है। प्रदेश में बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने और बेहतर नियोजन के लिए नियम को तैयार किया गया है। बड़े शहरों में टाउनशिप की मंजूरी नगरीय विकास व आवास विभाग के सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी देगी। नए नियमों के तहत अब बड़ी टाउनशिप के लिए कम से कम 24 मीटर सडक़ जरूरी होगी। इसी तरह किसी भी रेसीडेंशियल प्लॉट के लिए 30 फीट से कम चौड़ी सड़क नहीं होगी।
5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में टाउनशिप की मंजूरी साधिकार समिति करेगी। इसमें नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव अध्यक्ष होंगे। सदस्य के रूप में टीएनसीपी, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के कमिश्नर, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता और संयुक्त संचालक या वरिष्ठ नगर नियोजक इसके सदस्य होंगे। इसमें टाउनशिप के लिए नगर और ग्राम निवेश संचालनालय नोडल एजेंसी होगी। 5 लाख से कम जनसंख्या वाले जिलों में टाउनशिप का अप्रूवल कलेक्टर की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति करेगी। इसमें टीएनसीपी आयुक्त, नगर निगम आयुक्त या मुख्य नगर पालिका अधिकारी, जिला पंचायत सीईओ सदस्य होंगे। वहीं, नगर और ग्राम निवेश के जिला अधिकारी सदस्य सचिव होंगे। इसमें टाउनशिप के लिए टीएनसीपी का जिला कार्यालय नोडल एजेंसी होगा।
डेवलपर्स के लिए 5 करोड़ का टर्नओवर जरूरी
राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश एकीकृत टाउनशिप नियम 2026 में डेवलपर्स को लेकर कई नए प्रावधान किए हैं। डेवलपर्स के रजिस्ट्रेशन के लिए 50 हजार रुपए का पंजीयन शुल्क भुगतान करना होगा, जबकि नवीनीकरण के लिए राशि 25 हजार रुपए रखी गई है। एक बार पंजीयन के बाद 5 साल बाद नवीनीकरण होगा। डेवलपर्स के लिए निर्धारित किया गया है कि 10 से 20 हेक्टेयर क्षेत्र पर टाउनशिप लाने वाले डेवलपर्स की नेटवर्थ कम से कम 5 करोड़ होनी चाहिए या फिर पिछले 5 सालों का औसत टर्नओवर 6 करोड़ होना चाहिए। इसी तरह 20 से 40 हेक्टेयर पर टाउनशिप लाने वाले डेवलपर्स की नेटवर्थ 10 करोड़ होनी चाहिए। यह नियम भूमि स्वामी पर लागू नहीं होगा।
ग्रीन एरिया से डेढ़ गुना मिलेगा एफएआर
टाउनशिप के अंदर ग्रीन एरिया विकसित करने पर उससे डेढ़ गुना अधिक एफएआर डेवपलपर्स को मिल सकेगा। नए नियमों में प्रावधान किया गया है कि यदि 0.4 हेक्टेयर से कम आकार का अतिरिक्त वानिकी क्षेत्र का प्रावधान किया गया, तो उसे डेढ़ गुना तक टाउनशिप के अंदर एफएआर मिलेगा। इसी तरह डेवलपर्स टाउनशिप में होने वाली बिजली की कुल खपत का 35 फीसदी तक सोलर लाइट से पूरा करता है, तो बिल्डर को अतिरिक्त एफएआर दिया जाएगा। वहीं, यदि बिल्डर टाउनशिप परियोजना का कम से कम 25 फीसदी ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेट असेसमेंट 3 प्राप्त करता है, तो बिल्डर को अतिरिक्त एफएआर की सुविधा दी जाएगी।
अब पार्क नहीं घने पेड़ लगाने होंगे
अब टाउनशिप में पार्क के नाम पर ओपन स्पेस से काम नहीं चलेगा। नए नियमों में प्रावधान किया गया है कि पार्क और खुले स्थान के 25 फीसदी हिस्से में घने पेड़ लगाना होंगे। टाउनशिप के अंदर भी सड़क के किनारे पेड़ लगाने होंगे। नई टाउनशिप पॉलिसी का क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे राजधानी भोपाल और बाकी शहरों को सुनियोजित तरीके से विकास हो सकेगा। उन्होंने सरकार से 3 बिंदुओं पर ध्यान देने का आग्रह किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर में मुख्य सड़के, बल्क वॉटर, पावर, सीवरेज कनेक्टिविटी के लिए स्पष्ट समय-सीमा और एजेंसी-वार जिम्मेदारी तय की जाएं, ताकि परियोजनाओं मे देरी न हो। स्वीकृति प्रणाली को वास्तविक अर्थों में सिंगल-विंडो और डिजिटल-टाइमलाइन के अनुरूप संचालित किया जाए, ताकि उद्योग और शासन दोनों की दक्षता बढ़े। सभी टाउनशिप के लिए पब्लिक-डोमेन में पारदर्शी प्रोजेक्ट डैशबोर्ड बनाया जाए, जिसमें चरणवार प्रगति, बुनियादी
सेवाओं की उपलब्धता और अनुपालन स्थिति दिखाई दे।









