Friday, September 22, 2023
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महाकाल लोक मामले में कांग्रेस का आरोप

चायनीज मटेरियल से बनी है सभी मूर्तियां

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन श्री महाकाल महालोक के मामले में पक्ष-विपक्ष में वार पलटवार का दौर चल रहा है। इस बीच कांग्रेस ने तीखा आरोप लगाते हुए कहा है कि सभी मूर्तियां चायनीज मटेरियल से बनी हैं। इसमें भी गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है।

श्री महाकाल महालोक में सप्त ऋषियों की प्रतिमाएं टूटने के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने सात सदस्यीय समिति गठित कर जांच कराई थी। कांग्रेस की इस जांच टीम में विशेषज्ञ के तौर पर मूर्तिकारों और तकनीकी एक्सपर्ट्स को भी शामिल किया था। जांच के बाद पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और शोभा ओझा ने प्रेस कॉन्फ्रेस में भृष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि मूर्तियों को बनाने में घटिया चायनीज शीट का इस्तेमाल हुआ।

4 सितम्बर 2018 को तत्कालीन शिवराज सरकार ने निविदा क्रमांक 52/ यूएससीएल/ 1819 की योजना बनायी थी। इसकी अनुमानित लागत 97 करोड़ 71 लाख रु. थी। कांग्रेस की सरकार के आने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस राशि को अपर्याप्त मानते हुये राशि को बढ़ाकर 300 करोड़ रु. स्वीकृत किए थे। कांग्रेस सरकार द्वारा 7 मार्च 2019 को इसका वर्कऑर्डर जारी किया गया था।

कांग्रेस ने उठाए यह सवाल

  • फाइबर रेनफोर्स प्लास्टिक (एफआरपी) की मूर्तियों के लिए स्टील का इंटरनल स्ट्रक्चर नहीं बनाया।
  • मूर्तियों के निर्माण में 1200 से 1600 ग्राम जीएसएम की मोटाई की नेट का होना चाहिए, लेकिन मर्तियों में 150 से 200 ग्राम जीएसएम की चायनीज नेट उपयोग की गई।
  • मूर्तियों को बिना बेस (फाउंडेशन) के 10 फीट ऊंचे पेडस्टल पर सीमेंट से जोड़ा गया।
  • निविदा की शर्त क्रमांक 2 में स्पष्ट निर्देश हैं कि मूर्तियों की गुणवत्ता की जांच के लिए साइट पर ही मटेरियल टेस्टिंग लैबोरेटरी बनाई जानी थी। यह लैब नहीं बनाई गई।
  • दावा किया गया था कि यह मूर्तियां न कभी गिरेगी और ना ही कभी बदरंग होगी। इसके बाद भी 24 नवम्बर 2022 को स्मार्ट सिटी प्रशासन ने पीयू कलर्स वेदरकोट प्रायमर आदि का 96 लाख रु. का टेंडर क्यो निकाला था। जबकि यह मूर्तियां तीन साल के गारंटी पीरियड में थी।
  • मूर्तियों पर साधारण रंग लगाया गया,तभी वे बदरंग हो रही है। अब सवाल यह उठता है कि 24 नवम्बर 2022 के टेंडर के माध्यम से खरीदी गई सामग्री कहां गई।
  • उज्जैन शहर में ही एक ही तरह की, एक ही ठेकेदार द्वारा स्थापित मूर्तियों के निर्माण लागत में बड़ा अंतर सामने आया है। उज्जैन मे सिंधी समाज द्वारा 25 फीट ऊंची मूर्ति का निर्माण 4 लाख 11 हजार रु. में करवाया गया। महाकाल लोक में 15 फीट ऊंची प्रतिमा का भुगतान 10 लाख 2 हजार रु.में किया गया।
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