Friday, May 27, 2022
Homeआगर मालवामहाशिवरात्रि विशेष आलेख

महाशिवरात्रि विशेष आलेख

महाशिवरात्रि पर्व का संपूर्ण देश के साथ मालवा में विशेष महत्व है क्योंकि मालवांचल के उज्जैनी में 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर भगवान विराजमान है साथ ही आगर मालवा में बाबा बैजनाथ विराजमान हैं जिनकी स्थापना एक अंग्रेज कर्नल मार्टिन के द्वारा उनके चमत्कार से प्रेरित होकर की गई थी दोनों ही स्थानों का ऐतिहासिक महत्व होने के साथ-साथ धार्मिक महत्व भी है और महाशिवरात्रि पर्व यहां पर धूमधाम से मनाया जाता है देशभर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए भी आते हैं ।
महाशिवरात्रि पर्व को मनाने के पीछे पौराणिक मान्यता यह है कि आज के दिन ही शिव जी और माता गौरी का विवाह हुआ था एक पौराणिक कथा के अनुसार महाशिवरात्रि की रात को ही भगवान शिवजी करोड़ों सूर्य के समान प्रभाव वाले ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे और इसी घटना के बाद से प्रति वर्ष फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है आज का दिन भगवान शिव जी के दिव्य “का मंगलमय सूचक माना जाता है ।

महाशिवरात्रि पर्व पर प्रातः काल स्नान ध्यान से निवृत्त होकर निराहार व्रत रखने का महत्व है साथ ही सुंदर वस्त्रों एवं पुष्पों से सुसज्जित मंडप तैयार कर कलश स्थापना की जाती है तत्पश्चात शिवजी माता पार्वती और नंदी महाराज की प्रतिमा का विधि विधान से स्थापित कर पूजन किया जाता है आज के दिन भक्तगण भोलेनाथ से अपनी मनोकामना पूरी करने का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु उनके दर्शन के लिए मंदिर जाते हैं और यथाशक्ति धन-धान्य और मन से भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

इस बार की महाशिवरात्रि इस मायने में भी विशेष है कि विगत दो वर्षों से कोरोना काल के कारण सभी धार्मिक सामाजिक आयोजन सीमित जन समुदाय में ही संपन्न हो रहे थे जबकि महाशिवरात्रि के पूर्व ही कोरोना लगभग समाप्ति पर होने से सरकार द्वारा सभी प्रतिबंध हटा दिए जाने से जन समुदाय में उल्लास का वातावरण है और महाशिवरात्रि पर्व की तैयारियां जोर शोर से की जा रही हैं ।

महाशिवरात्रि पर्व के दिन भूत भावन भगवान महाकालेश्वर को बेलपत्र और आंकड़े का फूल चढ़ाने का विशेष महत्व है और आज के दिन हरी बूटी भी उन्हें श्रद्धा से अर्पित की जाती है और भक्तगण बिना किसी पूर्वाग्रह के हरी बूटी का प्रसाद भी ग्रहण करते हैं ।

आज के दिन भक्तगण दुग्ध के साथ ही पंचामृत से भगवान शिव जी का अभिषेक करते हैं । कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की कामना से भगवान शिव और मां गौरी को मनाने मंदिर जाती हैं । ऐसी मान्यता है कि आज के दिन कुंवारी कन्याएं निराहार व्रत रहकर शिवजी और गौरी का पूजन करती हैं तो उन्हें मनवांछित वर की प्राप्ति होती है ।

महाशिवरात्रि पर्व पर लगभग संपूर्ण देश के शिव मंदिरों में एक अलग ही उल्लास का वातावरण पाया जाता है सभी मंदिरों में फूल पत्तों की बंदनवार सजाई जाती है और पुष्प सज्जा की जाती है ।

कई शिव मंदिरों में तो कुंटलो से साबूदाने की खिचड़ी का भोग भगवान शिव जी को लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है ।

ऐसा लगता है मानो भारतीय संस्कृति का धार्मिक स्वरूप चोर स्थापित हो गया है और यही स्वरूप विदेशियों को भी सदैव से आकर्षित करता रहा है ।

महाशिवरात्रि पर्व पर शिप्रा नदी और नर्मदा नदी में स्नान का भी विशेष महत्व है ।

आज के दिन इन दोनों पवित्र नदियों में स्नान करके श्रद्धालु अपना जीवन सफल करते हैं और जन्म जन्म के पापों से मुक्त होकर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं । कहा जाता है कि शिप्रा में स्नान कर बाबा महाकाल के दर्शन करने से और नर्मदा नदी में स्नान कर बाबा ओमकार जी के दर्शन करने मात्र से समस्त पापों का नाश हो जाता है । अतः महाशिवरात्रि के दिन तीर्थ स्थलों पर अवश्य जाकर ज्योतिर्लिंगों के दर्शन लाभ का पुण्य लाभ प्राप्त करना चाहिए ।

स्वरचित,हेमलता शर्मा भोली बेन इंदौर मध्यप्रदेश

जरूर पढ़ें

मोस्ट पॉपुलर