Monday, May 16, 2022
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मालवी- निमाड़ी साहित्य अकादमी की मांग ने पकड़ा जोर

अक्षर विश्व को इंदौर – उज्जैन संभाग से आए 400 से अधिक मांग पत्र ,साहित्यकार जल्दी ही लिखेंगे शासन को पत्र 

आगर मालवा । गत दिवस सोशल मीडिया में प्रख्यात मालवी लेखिका सुश्री हेमलता शर्मा “भोली बेन” द्वारा मालवा निमाड़ी क्षेत्र के लोगों के लिए साहित्य अकादमी खोलने की मांग की गई थी, जिस पर इंदौर -उज्जैन संभाग के सभी जिलों से साहित्यकारों ने उनकी मांग का समर्थन करते हुए शासन से मालवी – निमाड़ी साहित्य अकादमी खोलने की मांग की है ।

इसके तहत लोकप्रिय समाचार पत्र “अक्षर विश्व ” को भी इंदौर -उज्जैन संभाग के सभी जिलों से 400 से अधिक साहित्यकारों ने अपना मांग पत्र भेजा है ।

मालवी निमाड़ी क्षेत्र के साहित्यकारों का कहना है कि मालवा निमाड़ में दो बड़े संभाग आते हैं जिनमें 15 जिले शामिल है और करीब ढाई करोड़ लोग निवास करते हैं जो अपनी मूल भाषा मालवीय और निमाड़ी में बोलचाल के साथ अपनी संस्कृति को समेटे हुए।

संपूर्ण मध्यप्रदेश का इतना बड़ा भूभाग जिसमें लगभग इतनी अधिक आबादी निवास करती है वह अभी भी पिछड़ा हुआ है और यहां की प्रमुख बोलियां मालवी और निमाड़ी पिछड़ी हुई है उनका ना तो कहीं साहित्य उपलब्ध होता है और ना ही कहीं शोध आदि के विद्यार्थियों को सहायता मिल पाती है।

लिखित रूप में बहुत कम साहित्य आया है इसलिए मालवी निमाड़ी बोलियों को प्राथमिकता देने के लिए आवश्यक है कि मध्यप्रदेश में मालवी निमाड़ी अकादमी स्थापित होनी चाहिए यहां पर उर्दू अकादमी सिंधी अकादमी आदि विभिन्न भाषाओं की अकादमी स्थापित हैं किंतु लंबे समय से मध्य प्रदेश का इतना बड़ा क्षेत्र संपूर्ण मालवा और निमाड़ की बोलियों को प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त नहीं हो सका है।

लेखक और साहित्यकारों का कहना है साहित्य अकादमी के अत्यंत परिश्रमी निदेशक डॉ विकास दवे दिन रात बड़ी सजगता से बोलियों और भाषा की गतिविधियों के लिए काम कर रहे हैं। मालवी और उसकी सहोदर निमाड़ी के लिए उनके मन में चिंता और अनुराग दोनों है। आपके मानस में मालवी – निमाड़ी के लिए जो भी कार्य योजना हो उसे एक समग्र प्रतिवेदन के रूप में यदि विकास भाई को सौंपा जाए तो मैं विश्वासपूर्वक कह सकता हूं वह कार्य ज़रूर सिद्ध होगा।


“”संजय नरहरि पटेल, वरिष्ठ साहित्यकार, मंच संचालक, इंदौर”” आज हमारे देश से आंचलिक भाषाए समाप्त होने के कगार पर है ।इनके संरक्षण की महती आवश्यकता है।अतः सरकार इस ओर ध्यान दे ।मालवी देश की एक सम्रद्ध भाषा है और इसके संरक्षण के लिए सभी को आगे आकर प्रयास करना चाहिए ।


“संजय शर्मा आगर, प्रबंधक महाराणा आईटीआई” अपनी बोली को अपनोंपन, अपनी सुगंध और महत्व ज अलग रेवे हे। या वात और मुखर हुई जायेगा जद हमारी मीठी ने सबसे सरल बोली के भी साहित्य में स्थान मिलेगा ।


मालवी नीमाड़ी जसी बोलि होन मुख्य भाषा हिन्दी की बड़ी बेना है । अकादमी जेसी कोई संस्था बने तो निश्चित ही मालवी नीमाड़ी का लेखक के भी आगे बढवा का अवसर मिलेगा।प्रबोध पंड्या उज्जैन मालवीय साहित्यकार मालवी और निमाड़ी एकेडमी होना अति आवश्यक है ,क्योंकि ये आंचलिक भाषाएं ही हमारी पहचान हैं ।

आज हम कृत्रिमता की ओर भाग रहे हैं ,जिसमें हमारे अपनेपन का आभास दिलाने वाली ये अपनी मालवी व निमाड़ी भाषाएं ही हैं । यदि हमने अपनी क्षेत्रीय बोलियों को महत्व नहीं दिया तो एक दिन हम अपनी विरासत को खो बैठेंगे । भाषाएं ही तो हमें अभिव्यक्ति का माध्यम देती हैं और वह अपनी निज भाषा में हो तो सोने में सुहागा होगा । मैं मालवी-निमाड़ी एकेडमी बनाने के पक्ष में इसलिए हूं कि कहीं हम खुद से ही दूर ना हो जाएं ।

नीति अग्निहोत्री लेखिका

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