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रिकॉर्ड महंगाई में भी सराफा पर भरोसा कायम

सोना पिछली अक्षय तृतीया से 53 हजार महंगा बिका, इस बार भी मांग बरकरार

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सराफा बाजार में जबरदस्त उछाल के बाद भी लोगों का विश्वास कायम है। सोने-चांदी की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले आए ऐतिहासिक उछाल के बावजूद ग्राहकों का उत्साह कम नहीं हुआ। इस बार अक्षय तृतीया पर रविवार और सोमवार को बाजार में मुख्य रूप से विवाह के लिए भारी आभूषणों और उपहार के लिए छोटे सिक्कों व ज्वेलरी की खासी मांग रही।

सराफा बाजार के कारोबारी कैलाश चंद ने बताया कि गत वर्ष 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर 24 कैरेट सोना 97 हजार 500 प्रति 10 ग्राम के भाव पर था, जो इस साल 53 हजार की भारी बढ़त के साथ 1 लाख 53 हजार 800 पर है। इसी तरह चांदी की कीमतों ने भी लंबी छलांग लगाई है। पिछले साल 1 लाख प्रति किलो बिकने वाली चांदी इस वर्ष 2,47,000 प्रति किलो तक जा पहुंची है।

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मध्यम वर्ग का खरीदारी का अंदाज बदला
अत्यधिक महंगाई के कारण मध्यम वर्ग की खरीदारी के तरीके में बदलाव आया है। डीपी ज्वैलर्स के आशीष सकलेचा के अनुसार, ग्राहक अब भारी-भरकम गहनों के बजाय छोटे और जरूरी आभूषणों को प्राथमिकता दे रहे हैं। खासकर शादियों के लिए वैरायटी बाजार में हैं और इसकी डिमांड भी अधिक है। अक्षय तृतीया की परंपरा को निभाने के लिए लोग अब सिक्कों या कम वजन वाली ज्वेलरी में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। पटनी बाजार सोना-चांदी की दुकानों में भी पारंपरिक खरीदी अधिक रही।

निवेशकों के लिए भी सुरक्षित ठिकाना
कोरोना काल के बाद से सोने-चांदी के प्रति लोगों का नजरिया काफी बदला है। सालभर में करीब 35 प्रतिशत का शानदार रिटर्न देने के कारण अब निवेशक रियल एस्टेट के बजाय इन धातुओं को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। बाजार में 24 कैरेट सोना 1,53,800 और 22 कैरेट सोना 1,40,950 प्रति 10 ग्राम के भाव पर उपलब्ध रहा। जानकारों का मानना है कि सुरक्षित निवेश की चाहत में बड़े निवेशकों की एंट्री अब सराफा बाजार में बढ़ गई है।

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रियल एस्टेट सेक्टर में सतर्कता का माहौल
बढ़ती कीमतों का असर केवल सराफा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में भी इसका प्रभाव देखा जा रहा है। जमीन के दामों में हुई भारी बढ़ोतरी और होम लोन से जुड़ी प्रक्रियाओं के जटिलता के कारण मध्यम वर्ग नए निवेश के प्रति फिलहाल सतर्क नजर आ रहा है। ऐसे में अक्षय तृतीया जैसे शुभ मुहूर्त पर भी लोग बड़े निवेश के बजाय सोने-चांदी जैसी चल संपत्ति की ओर अधिक आकर्षित रहे हैं।

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