रिजर्व बैंक का जोर स्थिरता पर

 नई दिल्ली– रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति कमिटी(एमपीसी) ने शुक्रवार को जो नीतिगत दर में बदलाव और अन्य घोषणाएं कीं, उनमें बैंक का जोर अर्थव्यवस्था की स्थिरता पर दिखता है। मीडिया से बातचीत में रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि इस समय न सिर्फ भारतीय अर्थव्यवस्था बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कोरोनावायरस की छाया है।ऐसे में विकास दर पर प्रभाव पड़ना लाजिमी है और इसका असर कई क्षेत्रों पर दिखेगा।

इससे वैश्विक जगत मंदी की चपेट में जा सकती है और हमारी आर्थिक स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए उनका फोकस आर्थिक स्थिरता पर है।

3 अप्रैल को होनी थी नीतिगत दरों की घोषणा। नीतिगत दरों की घोषणा से पहले शक्तिकांत दास ने कहा कि यूं तो एमपीसी की बैठक 31 मार्च और तीन अप्रैल 2020 को निर्धारित थी, लेकिन अर्थव्यवस्था की वर्तमान हालात को देखते हुए कमिटी की बैठक पहले बुलाई गई। इसलिए एमपीसी की बैठक 24, 26 और 27 मार्च को हुई।गवर्नर ने कहा कि ऐसा इसलिए कि इस समय अर्थव्यवस्था को इसकी जरूरत है। तभी तो बैठक के दौरान कमिटी के सदस्यों ने बहुसंख्य सदस्यों ने नीतिगत ब्याज दरों में कटौती का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि कमिटी के छह सदस्यों में से चार सदस्यों ने दरों में कटौती का समर्थन किया।