Monday, December 4, 2023
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वर्षों बाद जिला अस्पताल के वार्डों में टूटे पलंग हटाकर नए लगा रहे…

वर्षों बाद जिला अस्पताल के वार्डों में टूटे पलंग हटाकर नए लगा रहे…

हड्डी वार्ड में कार्डियेक पलंग की जरूरत, लग रहे सर्जिकल

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:जिला अस्पताल में वर्षों पुराने होकर टूट चुके मरीजों के पलंग को बदलने का काम शुरू किया गया है। प्रत्येक वार्डों से टूटे पलंग को हटाकर नए पलंग लगाए जा रहे हैं लेकिन हड्डी वार्ड में कार्डियेक बेड की आवश्यकता है वहां भी सर्जिकल बेड ही लगाए जा रहे हैं।

जिला अस्पताल के प्रत्येक वार्ड में मरीजों के लिये 30 से 32 बेड हैं। इनमें से अधिकांश पलंग पुराने होकर टूट चुके हैं। वर्तमान में इन्हीं पलंग पर मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा था। एनएचएम भोपाल द्वारा जिला अस्पताल को नए बेड उपलब्ध कराए गए हैं। अब वार्डों से टूटे बेड हटाकर नए सर्जिकल बेड रखे जा रहे हैं। हालांकि हड्डी वार्ड में कार्डियेक बेड की आवश्यकता है जो दुर्घटना में घायल मरीजों के लिये जरूरी होते हैं लेकिन यहां भी सर्जिकल बेड ही लगाये जा रहे हैं।

यह है दोनों तरह के पलंग में अंतर

सर्जिकल बेड- सर्जिकल बेड में मूवमेंट नहीं होता। इस पर मरीज सीधे ही लेट सकते हैं। यदि मरीज को उठने, बैठने में परेशानी है तो उसे पलंग पर ही भोजन आदि कार्य करना होते हैं। इस बेड पर मरीज के परिजनों को पीछे सहारा देना होता है।

कार्डियेक बेड- अधिकांश अस्पतालों में सभी प्रकार के मरीजों के लिये कार्डियेक बेड ही उपलब्ध कराये जाते हैं। इस बेड को मरीज की सुविधा के अनुसार मूवमेंट कराया जा सकता है। इस पलंग को फोल्ड कर मरीज को सहारा देते हुए टर्न किया जा सकता है।

भोपाल से जिला अस्पताल को नये सर्जिकल बेड मिले हैं। वार्डों के पुराने टूटे हुए बेड हटाकर इन्हें रखा जा रहा है। हड्डी वार्ड में कार्डियेक बेड की जरूरत है लेकिन सर्जिकल बेड भी तीन पार्ट में बने हैं जिन्हें मरीज की सुविधा के अनुसार सपोर्ट लगाकर टर्न किया जा सकता है। कार्डियेक बेड आईसीयू में लगाये गये हैं।-डॉ. पी.एन. वर्मा, सिविल सर्जन

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