विक्रमोत्सव में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल शुरू

उज्जैन। महाराजा विक्रमादित्य की गौरवगाथा और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार के लिए समर्पित विक्रमोत्सव में शुक्रवार को कालिदास अकादमी के अभिरंग सभागार में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ एंशिएंट स्प्लेंडर (प्राचीन वैभव का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव) का श्रीगणेश हुआ। आयोजन 17 मार्च तक चलेगा। सुबह 11 बजे शुरू हुए आयोजन में पहले दिन भारतीय सिनेमा की नींव रखने वाली फिल्म राजा हरीशचंद्र (1913) देखने का अवसर मिला।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
इसके साथ ही जय महादेव और भारत मिलाप जैसी पौराणिक फिल्में प्रदर्शित होंगी। डॉक्यूमेंट्री सेक्शन में उज्जैन के 84 महादेव और वियतनाम के प्रसिद्ध म्यसोन शिव मंदिर परिसर पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन विशेष रहेगा। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक डॉ. श्रीराम तिवारी ने बताया संस्कृति विभाग के इस आयोजन में भारत सहित विश्व के 30 से अधिक देशों की फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। महोत्सव प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक दर्शकों के लिए खुला रहेगा।
सिनेमा के पर्दे पर दिखेगा प्राचीन वैभव
हिंदी फीचर फिल्में- 1913 की राजा हरीशचंद्र से लेकर 1995 की जय महादेव जैसी क्लासिक फिल्में।
क्षेत्रीय सिनेमा- गुजराती, तेलुगु, तमिल, बंगाली, उडिय़ा और मलयालम भाषाओं की धार्मिक व ऐतिहासिक फिल्में।
विदेशी सिनेमा- इक्वाडोर, जर्मनी, वेनेजुएला, इजराइल, क्यूबा और इंडोनेशिया जैसे देशों की चुनिंदा फिल्में।
डॉक्यूमेंट्री- उज्जैन के 84 महादेव, वियतनाम के शिव मंदिर और कंबोडिया के अंकोरवाट जैसे विषयों पर विशेष शोधपरक फिल्में।
कब-कौन सी फिल्म
14 मार्च- मुख्य आकर्षण 1965 की सुपरहिट फिल्म महाभारत और ऐतिहासिक राम राज्य (1943) रहेगी। अध्यात्म प्रेमियों के लिए द्वादश ज्योतिर्लिंग और उज्जैन की शिक्षा परंपरा पर आधारित सांदीपनि आश्रम जैसी ज्ञानवर्धक डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएंगी।
15 मार्च- तीसरे दिन दादा साहब फाल्के द्वारा निर्देशित कालिया मर्दन (1919) और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत आनंद मठ (1952) का प्रदर्शन होगा। डॉक्यूमेंट्री खंड में समय की गणना पर आधारित महाकाल और कंबोडिया के विशाल अंकोरवाट मंदिर परिसर की भव्यता के दर्शन सिनेमाई पर्दे पर होंगे।
16 मार्च- चौथे दिन हिंदी फीचर फिल्मों में गोपाल श्रीकृष्ण (1938), कवि कालिदास (1959), नारद लीला, नरसी भगत (1940) और श्रीगणेशा का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में गुजराती फिल्म श्रीकृष्ण शरणम्, बंगाली में महाबीर कृष्ण, कन्नड़ में श्रीकृष्ण रुक्मणी सत्यभामा और पंजाबी की प्रसिद्ध फिल्म भगत धन्ना जट दर्शकों के लिए विशेष रूप से प्रदर्शित होंगी।









