शिप्रा के घाटों नजर आने लगी शिव भक्ति की कलात्मक आभा

दीवारों पर उकेरे भगवान शिव, अद्र्धनारीश्वर और साधु-संतों के चित्र
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उज्जैन। श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र मोक्षदायिनी मां शिप्रा के घाट अब सौंदर्य और कला का प्रतिमान बन रहे हैं। सिंहस्थ २०२८ की तैयारियों की कड़ी में शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर २९ किलोमीटर लंबे नए घाटों का निर्माण इन दिनों रफ्तार के साथ किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना में अंगारेश्वर मंदिर क्षेत्र को मॉडल घाट के रूप में विकसित किया जा रहा है।
यहां किया जा रहा काम अब जमीनी तौर पर नजर आने लगा है। दरअसल, अंगारेश्वर मंदिर के पास लाल बलुआ पत्थरों का घाट बन चुका है और नदी के दूसरे छोर पर बन रहे घाटों की भव्यता राहगीरों को आकर्षित कर रही है। सफेद रंग की दीवारों पर उकेरी गई भगवान शिव, अद्र्धनारीश्वर और साधु-संतों की पेंटिंग्स (भित्ती चित्र) घाटों की सुंदरता बढ़ाने के साथ उसे आध्यात्मिक गरिमा प्रदान कर रहे हैं। शिप्रा नदी के शांत जल में इन चित्रों का प्रतिबिंब बेहद खूबसूरत नजर आ रहा है जो शहर की बदलती तस्वीर को बयां कर रहा है। बता दें कि वर्तमान में शिप्रा के घाटों की लंबाई लगभग ९.७८ किमी है। ८६३ करोड़ रुपए की इस परियोजना के तहत २९ किमी के नए घाटों के बनने के बाद यह दायरा बढक़र ४० किमी के आसपास हो जाएगा।
मजबूती और पारंपरिक लुक
घाटों की मजबूती और पारंपरिक लुक देने के लिए ४७.६९ करोड़ रुपए से चार इंच मोटे लाल बलुआ पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है। मॉडल घाट के रूप में अंगारेश्वर क्षेत्र में सीढिय़ों और प्लेटफॉर्म का ढांचा तैयार हो चुका है। यहां सुरक्षा के लिए रैलिंग, प्रकाश व्यवस्था और ऊंचे तटबंधों का निर्माण अंतिम चरण में है।
सुरक्षित व सुगम स्नान उद्देश्य
बताया जा रहा है कि अंगारेश्वर मंदिर क्षेत्र में काम लगभग पूरा होने को है जो अन्य घाटों के लिए बैंचमार्क सेट करेगा। मल्टी शिफ्ट में चल रहे काम का उद्देश्य सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम स्नान करवाना है। यह विकास शहर को आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में नई पहचान दिलाएगा।
एक नजर में यह भी
तीर्थ पथ- पूर्वी तट पर ६ किमी और पश्चिमी तट पर १७ किमी लंबा शिप्रा तीर्थ पथ विकसित होगा।
भित्ती चित्र- घाटों की दीवारों पर शहर की धार्मिक विरासत एवं पौराणिक कथाओं को पेंटिग्स के माध्यम से जीवंत किया जा रहा है।
लक्ष्य- जून २०२७ तक सभी ४० किमी घाटों का काम पूरा करना है।
सुविधाएं- भीड़ प्रबंधन के लिए चौड़े घाट, अत्याधुनिक चेंजिंग रूम, शौचालय, इमरजेंसी निकास की व्यवस्था।









