Wednesday, August 10, 2022
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सकल कारज सिद्ध करें वीर हनुमान – “अक्षर विश्व “विशेष आलेख

इन्दोर/आगर मालवा। भगवान श्री राम के अनन्य भक्त के रूप में पूजे जाते हैं- राम भक्त हनुमान ! कहा जाता है- “राम से बड़ा राम का नाम !” इस उक्ति को पवन पुत्र हनुमान ने चरितार्थ भी किया, जब श्रीराम ने उन पर अमोघ अस्त्र चलाया तो राम नाम की रटन ने ही हनुमान जी की रक्षा की थी ।

ऐसे वीरबली अंजनी पुत्र हनुमान का जन्म श्री राम के जन्म के ठीक 6 दिन बाद अर्थात चैत्र शुक्ल पूर्णिमा के दिन हुआ था । इस दिन को पूरे देश भर में हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

हनुमान जन्मोत्सव के दिन विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना करने से उनकी कृपा सदैव बनी रहती है । कहा जाता है कि हनुमान जी का जन्म मंगलवार के दिन ही हुआ था इसलिए मंगलवार को बजरंगबली का दिन मान कर उनकी विशेष पूजा की जाती है । इस प्रकार हनुमान जी के बल भक्ति और कृपा की गाथा अनंत है । दोहे में कहा भी गया है-

“निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान”

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर पूर्व दिशा में भगवान हनुमान जी की प्रतिमा को एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित किया जाता है । तत्पश्चात धूप दीप नैवेद्य आदि के साथ सुंदरकांड, हनुमान चालीसा करना शुभ माना जाता है । शास्त्रानुसार हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करने से अंजनी लाल प्रसन्न होते हैं और प्रसाद के रूप में उन्हें गुड़ -चना, चिरोंजी पसंद है तो वही गेंदा, गुलाब, कनेर आदि के लाल-पीले फूलों से वे भाव विभोर हो जाते हैं और भक्तगण उन्हें प्रसन्न करने के लिए उन्हें सिंदूर का चोला भी चढ़ाते हैं ।

इस बार हनुमान जन्मोत्सव 16 अप्रैल 2022 को आ रहा है ।‌ कई लोग इसे हनुमान जयंती भी कहते हैं हैं मेरे विचार से इसे जन्मोत्सव कहा जाना अधिक उचित है, क्योंकि जयंती उनकी मनाई जाती है , जिनका कभी जन्म हुआ था, किंतु अब वह हमारे बीच ना होकर स्वर्गवासी हो गए हैं, जबकि कलयुग में हनुमान जी ही एकमात्र ऐसे भगवान हैं जो आज भी पृथ्वी लोक में निवास करते हैं और इसीलिए आज के दिन को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए ।

हनुमान जी को रुद्रावतार कहा जाता है और वर्ष में दो बार ऐसा अवसर आता है प्रथम जन्मतिथि को जन्मोत्सव के रूप में तथा दूसरी तिथि कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को विजय अभिनंदन महोत्सव के रूप में मनाया जाता है । इसके पीछे सूर्य को ग्रास बना लेने की कथा प्रचलित है । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस हनुमान जन्मोत्सव के शुभ योग में हनुमान जी की आराधना करने से भक्त जनों की हर एक मनोकामना पूर्ण होगी, अतः इसे धूमधाम से मनाया जाना चाहिए।स्वरचित,हेमलता शर्मा भोली बेन

इंदौर मध्यप्रदेश

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