Wednesday, August 10, 2022
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सावन के सोमवार पर बन रहा है ये खास योग, इस विधि से करें व्रत, मिलेगा पूजा का संपूर्ण फल

सावन का महीना पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दौरान जो भक्त पूरे श्रद्धा भाव से पूजा एवं जल और दूध का अभिषेक करता है उसे समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। ऐसा माना जाता है कि यदि कुंवारी कन्याएं सावन के महीने में विधि पूर्वक शिव पूजन करती हैं तो उन्हें जल्द ही अच्छे वर की प्राप्ति होती है। यही नहीं जो भक्त इस पूरे महीने भक्ति भाव से पूजन करता है उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

सावन सोमवार व्रत विधि

सावन सोमवार का व्रत करने वाले व्यक्ति को प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने नित्य कर्मों से निवृत्त हो ले। ब्रह्म मुहूर्त का समय इसलिए बताया गया है क्योंकि यह समय देवीक कार्यों और पूजा पाठ करने के लिए उत्तम माना जाता है।

स्नानादि से निवृत्त होने के पश्चात शिवजी के जलाभिषेक के लिए तांबे का पात्र अथवा कोई भी पात्र जो उपलब्ध हो अच्छी तरह से साफ कर ले और उसे गंगाजल या साधारण जल ले। शिवजी को अर्पित करने के लिए बेलपत्र, पुष्प, और यदि उपलब्ध हो तो धतूरे के फूल व आक के फूल ले।

सावन सोमवार व्रत विधि के अनुसार सर्वप्रथम शिवजी को जल से स्नान कराएं तत्पश्चात दूध, दही, शहद, घी, हल्दी, शक्कर से अभिषेक करके पुनः जल से स्नान कराएं फिर शिव जी को जनेऊ धारण कराकर चंदन, रोली आदि से तिलक लगाए और फिर अक्षत चढ़ाऐ। श्रावण के महीने में शिव जी को बेलपत्र, धतूरे के पुष्प, भांग आदि अर्पित करने का विशेष महत्व है। तत्पश्चात अगरबत्ती, धूप, दीपक और दक्षिणा द्वारा भगवान शिव की पूर्ण श्रद्धा से पूजा करनी चाहिए।

अंत में कपूर और जल कलश की थाली में रखकर आरती करनी चाहिए साथ ही विभिन्न मंत्रो या स्रोतों से जप करने से भगवान शिव को प्रसन्न करने का प्रयत्न करना चाहिए और सावन सोमवार व्रत कथा सुनकर व्रत पूर्ण करना चाहिए।

सावन सोमवार व्रत नियम

शिवजी की पूजा में केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि केतकी के फूल चढ़ाने से भगवान शिवजी नाराज होते हैं। इसके अलावा, तुलसी को कभी भी भगवान शिवजी को अर्पित नहीं किया जाता है। साथ ही शिवलिंग पर कभी भी नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। भगवान शिवजी को हमेशा कांस्य और पीतल के बर्तन से जल चढ़ाना चाहिए।

सावन सोमवार का महत्व

सावन में पड़ने वाले सोमवार के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा होती है। इस साल सावन में अद्भुत संयोग बन रहा है। श्रावण माह की शुरूआत सोमवार से हो रही है और इसका अंत भी सोमवार के दिन होगा। सावन में इस बार पांच सोमवार पड़ रहे हैं। पहला सोमवार 6 जुलाई को, दूसरा 13 जुलाई को, तीसरा 20 जुलाई को, चौथा 27 जुलाई को और पांचवां व अंतिम सोमवार 3 जुलाई को पड़ रहा है। इसी दिन सावन माह भी समाप्त होगा।

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