स्वीडन में परिवार के साथ दो माह से घर में रह रहे उज्जैन के सॉफ्टवेयर इंजीनियर शर्मा ने बताये हालात

उज्जैन:चीन से शुरू हुए कोरोना वायरस के संक्रमण का सबसे तेजी से असर यूरोपीय देशों में हुआ। विश्व में चिकित्सा के लिहाज से सबसे संपन्न देश भी इस वैश्विक आपदा से स्वयं को नहीं बचा पाये। स्वीडन में भी कोरोना का संक्रमण तेजी से फैला स्थिति यह हो गई कि एक दिन में 150 से 200 मामले प्रतिदिन सामने आये जिसके बाद स्वीडन प्रशासन द्वारा लॉकडाउन लागू करने के साथ लोगों को घरों में रहने के आदेश जारी किये। उसी का परिणाम है कि पूरे स्वीडन में जो लोग घरों में रहकर शासन के आदेश का पालन कर रहे हैं वह सुरक्षित हैं और यही कोरोना के संक्रमण से बचने का उपचार भी है।
योगेश शर्मा निवासी इंदिरा नगर उज्जैन सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और वर्तमान में स्वीडन में पत्नी आकांक्षा और पुत्र दर्श के साथ वहीं निवास कर रहे हैं। योगेश शर्मा ने स्वीडन में कोरोना संक्रमण और उससे बचाव के बारे में अपने अनुभव अक्षरविश्व से साझा करते हुए बताया कि कंपनी द्वारा दो माह पहले ही घर से काम करने को कह दिया था। वहीं दूसरी ओर स्वीडन प्रशासन ने कोरोना के मरीज तेजी से बढऩे के साथ पूरे स्वीडन में लॉकडाउन घोषित कर लोगों को घरों में रहने के आदेश दिये।

जिसका पालन करते हुए हम लोग दो माह से घरों से बाहर नहीं निकले हैं। घर में आवश्यक सामग्री का स्टाक कर लिया था। शुरूआत में जहां कोरोना पॉजिटिव के 150 से 200 मामले प्रतिदिन सामने आ रहे थे, लेकिन प्रॉपर लॉकडाउन का लोगों द्वारा पालन किये जाने से परिस्थिति में बहुत फर्क पड़ा और अब यह आंकड़ा घटकर 30 से 50 के बीच पहुंच चुका है। शर्मा ने बताया कि भारत में कोरोना का संक्रमण दूसरे चरण में पहुंचने के साथ सरकार द्वारा उठाये जा रहे कदम सही दिशा में हैं, लेकिन देशवासियों को लॉकडाउन का पालन तो किसी भी हालत में करना ही होगा यही कोरोना संक्रमण से बचने का उपचार है।

पड़ोसी के यहां कॉफी से भी परहेज
स्वीडन में शासन के लॉकडाउन का पालन करते हुए लोग पड़ोसी के यहां कॉफी ऑफर होने पर भी जाने से परहेज करते हैं। अपने घरों की बाउंड्री अथवा गैलेरी में खड़े होकर एक-दूसरे का हालचाल जरूर जान लेते हैं। भारत में रहने वाले माता-पिता चिंतित है लेकिन यहां से निकलना कोरोना को आमंत्रण देने के समान है। इसलिए जहां है, वहीं स्वयं को संक्रमण से बचाए हुए है।