Tuesday, July 5, 2022
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हमारे मालवा में होली असा मने

मध्य प्रदेश का आगर-मालवा जिला का लगभग सगळा श्रीनाथ मंदिर होण में भगवान श्रीकृष्ण के होली का पांच दन पेला से रंग गुलाल, अबीर ने केसूडी का फूल होण को पीलो रंग बणय ने होली खिलई जाय हे। “नंद का घरे आनंद भयो, जे कन्हैया लाल की” गीत गाता हुवा दर्शन करने आया भक्त होण झूमी उठे हे ।

साते ज उनका उपर भी रंग गुलाल उड़ायो जाय हे । सबका मुंडा खिल्या हुवा रेवे हे अने एक उल्लास को वातावरण निर्मित हुय जाय हे। विशेस बात या हे के कोई भी मनख उनी रंग से बचने की कोसिस नी करे हे नी ज उनके अपणा कपड़ा रंगाने की चिंता रे हे, बल्कि रंग होण से सराबोर होने वास्ते लालायित नजर आवे हे ।

आगर में होली को तेवार घणी ज धूमधाम से मनायो जाय हे । यां पे जगे-जगे होली को डांडो रोप्यो जाय हे । लगभग हरेक मोहल्ला, हरेक गली अने हरेक चोराया पे होली को डांडो गाड़्यो जाय हे अने होली बणई जाय हे। उके फूल माला होण अने रंगोली आदि से सजायो जाय हे आसपास मंडप बी तान्यो जाय हे अने उजास करियो जाय हे । धुलंडी का एक दन पेला होली को पूजन करने वास्ते घर से बयरा होण सजी-संवरी ने थालिहोण तय्यार करी ने पूजन करने चली पड़े हे।

चारी आड़ी उल्लास को वातावरण होय हे । संझा की बखत मोहल्ला की लगभग सगळी बयरा होण घर से एक दूसरा के बुलाती हुई होली की पूजा करने पोचें हे । होली की पूजा करी ने उकी परकम्मा आदि करे हे। लगभग राते नो-दस बजे तक यो काम चलतो रेवे हे । अगला दन परोड़े चार बजे कण्डा ने लकड़ी होण से जमी होलिका को दहन मोहल्ला का दाना मनख का हाथ से करायो जाय हे अने घर का सगळा आदमी होण ने बच्चा होण होली तापने वास्ते जाय हे । साते ज एक नारेल लय जय ने होली में होम करे हे ।

इका पीछे मानता या हे के मोसम बदलता ज नरी बिमारी होण को संचार होणे लगी जाय हे ने मनख के नीरोगी रेणे वास्ते होलिका दहन को ताप सहायक होय हे । सातेसात ज नारेल को होलिका में होम करने से घर की सगळी बुरई अने बुरी शक्ति होण को नास हुय जाय हे। इका बाद सुरु होय हे रंग खेलने को तेवार- होली ।

बच्चा पिचकारी में रंग भरी ने एक- दूसरा पे छिड़कने लगे हे । आदमी ने बयरा होण अलग -अलग टोली में एक- दूसरा के रंगने वास्ते घर से निकली पड़े हे ।

दनभर एक दूसरा के घरे जय ने रंग लगायो जाय हे अने संझा के लगभग सब ज मोहल्ला होण में ठंडई घोटी जाय हे । इनी ठंडई की विशेसता या होय हे के इमें भांग जराक भी नी मिलई जाय हे अने या गाय का दूध से ज बणई जाय हे ताकि बच्चा- बूढ़ा सब लोगोण उके लय सके और उनका सुवास्थ्य के नुकसान भी नी होय। साते ज बेसन ‌चक्की , सेव आदि को सेवन करयो जाय हे । गेर निकालने की भी परम्परा हे । इनी तरीका से होली को रंगीलो तेवार हरस अने उल्लास के साथ मनायो जाय हे।

हेमलता शर्मा “भोली बेन” ,आगर-मालवा

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