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हाथ से पिसे पत्थर और प्राकृतिक मिश्रण से संवर रहा महाराजवाड़ा
Monday, October 2, 2023
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हाथ से पिसे पत्थर और प्राकृतिक मिश्रण से संवर रहा महाराजवाड़ा

दो माह में तब्दील हो जाएगा हेरिटेज धर्मशाला में, 100 साल मजबूती का दावा

हाथ से पिसे पत्थर और प्राकृतिक मिश्रण से संवर रहा महाराजवाड़ा

महाकालेश्वर मंदिर के पास स्थित सिंधिया रियासत काल के प्राचीन महाराजवाड़ा स्कूल भवन को निर्माण एजेंसी हाथ से पिसे पत्थरों और गुड़, गुगल व मैथी आदि प्राकृतिक पदार्थों के मिश्रण से हेरिटेज धर्मशाला के रूप में तब्दील करने का काम कर रही है। दावा किया जा रहा है कि यह काम जुलाई माह के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा। रिनोवेशन के बाद यह भवन अगले 100 वर्षों तक मजबूत बना रहेगा।

महाराजवाड़ा स्कूल भवन को हेरिटेज धर्मशाला के रूप में तब्दील करने का काम, महाकाल-रुद्रसागर एकीकृत विकास दृष्टिकोण (मृदा) परियोजना के फेज-2 में किया जा रहा है। भवन के रिनोवेशन का काम जयपुर की राजपूताना कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है। इस कार्य के लिए 19.16 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं।

जयपुर की ठेका कंपनी द्वारा लगभग छह महीने पहले इसके लिए महाराजवाड़ा स्कूल भवन की दीवारों से पुराना प्लास्टर उखाडऩे का काम शुरू कर दिया था। अभी यह काम चल रहा है और इसके पूरा होने में करीब दो महीने का समय और लगेगा। इसके बाद भवन किसी पांच सितारा हेरिटेज होटल जैसा नजर आएगा।

रिनोवेशन कर रही जयपुर की राजपूताना कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट इंचार्ज के अनुसार यह रिनोवेशन कार्य प्राचीन प्राकृतिक तरीकों से किया जा रहा है। भवन की दीवारों की मरम्मत और दरारें भरने के लिए गुड़, मैथी, गूगल, बिल्व पत्र के फल, उड़द का पानी और चूना मिलाकर तैयार किए जा रहे नेचुरल मटेरियल से किया जा रहा है, जिससे यह भवन अगले 100 सालों तक मजबूत बना रहेगा।

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सेंड ब्लॉस्टिक प्रक्रिया : 10 डंपर बालू रेत से चमकाए पत्थर

प्रोजेक्ट इंचार्ज के अनुसार महाराजवाड़ा भवन के रिनोवेशन कार्य में सबसे पहले यहां लगे पुराने पत्थरों पर चूना और अन्य केमिकल वाले रंग चढ़े हुए थे। इन्हें हटाने के लिए सेंड ब्लॉस्टिंग प्रक्रिया अपनाई गई। इसके तहत सेंड ब्लॉस्टिंग मशीन में बालू रेत भरकर उच्च दबाव के साथ पत्थरों पर उड़ाई जाती है। इस तकनीक से पत्थरों के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंचे बगैर वे फिर से मूल स्वरूप में निखर आते हंै। इस कार्य में 10 डंपर बालू रेत का उपयोग किया गया।

15 दिन लगते हैं मटेरियल तैयार होने में, ड्रमों में रखा जाता है

उन्होंने यह भी बताया कि दीवारों और दरारों में भराव करने के लिए गुड़, मैथी, गूगल, बिल्व पत्र के फल, उड़द का पानी और चूना निर्धारित अनुपात में मिलाकर इन्हें प्लास्टिक के ड्रमों में 15-15 दिन रखा जाता है तब कहीं जाकर नेचुरल मटेरियल तैयार हो पाता है। इसी तरह दीवारों पर फिनिशिंग के लिए लाइम दूध (चूने का पानी) और मार्बल पाउडर की समान मात्रा मिलाकर करीब 15 दिन रखी जाती है। तब कहीं जाकर मटेरियल तैयार होता है। इसके उपयोग से भवन की दीवारें 35 से 50 वर्ष तक यथावत बनी रहती है। इसके अलावा पत्थरों की जुड़ाई हेतु तैयार पिसे हुए पत्थर और मार्बल के मिश्रण में दही भी मिलाया जाता है। इससे दीवारें कई वर्षों तक मजबूत और शाईनिंग वाली रहती है।

50 से 60 राजस्थान के मजदूर

प्रोजेक्ट सुपरवाइजर ने बताया कि महाराजवाड़ा के रिनोवेशन का पूरा काम हाथों पर आधारित है। इसके लिए राजस्थान के 50 से 60 मजदूर और कारीगर लगातार दिन-रात काम कर रहे हैं। पत्थरों के साथ-साथ भवन में लगे पुराने लकड़ी के दरवाजों और खिड़कियों को भी प्राकृतिक तरीके से पुराने स्वरूप में लाया जा रहा है। इसके लिए दरवाजों पर पूर्व में किए गए पेंट और कलर आदि को पेंट रिमूव लगाकर मुक्त किया जा रहा है।

पर्यावरण के अनुकूल होगी धर्मशाला

हेरिटेज धर्मशाला बनने से पर्यटक को एक बेहतर सुविधा मिलेगी। वे महाकाल क्षेत्र की खूबसूरती धर्मशाला से निहार सकेंगे। हेरिटेज धर्मशाला पूरी तरह वातानुकूलित और पर्यावरण के अनुकूल होगी। ये काम महाकाल-रुद्रसागर एकीकृत विकास दृष्टिकोण (मृदा) परियोजना के फेज-2 अंतर्गत 26.03 करोड़ रुपये से होगा। इसमें 7.14 करोड़ रुपये केवल लैंड स्केपिंग पर खर्च होंगे।

एक लाख वर्गफीट की फिनिश्ंिाग अफ्रीकी पत्थर से

सोनी के मुताबिक प्राचीन महाराजवाड़ा स्कूल भवन के निर्माण में बड़ी मात्रा में स्टोन (पत्थरों) का उपयोग किया गया है। भवन के कुल निर्मित एरिया में एक लाख वर्गफीट क्षेत्रफल में स्टोन एरिया है। सेंड ब्लॉस्टिंग के बाद इन पत्थरों को प्राकृतिक रूप देने के लिए हाथों से फिनिशिंग का काम किया जा रहा है।

इसे एराईश वर्क कहा जाता है। इस प्रक्रिया में अफ्रीकी पत्थर द्वारा हाथ से घिसाई की जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि भवन में लगे पत्थरों के टूटे हुए भाग और दरारों को भरने के लिए पत्थर के मिश्रण का ही उपयोग किया जा रहा है। पत्थरों की पिसाई भी मशीन की बजाए हाथ से की जा रही है। इस कारण समय लग रहा है।

67.92 करोड़ रुपये से ये हो रहे विकास कार्य

19.91 करोड़ से महाराजवाड़ा स्कूल भवन हैरिटेज धर्मशाला में परिवर्तित कर रहे।

47 हजार वर्गफीट पर नए ३२ कमरे बना रहे।

1.15 लाख हजार वर्गफीट जमीन ग्रीन एरिया में बदल रहे।

8.14 करोड़ से महाराजवाड़ा परिसर में लैंड स्केपिंग की जा रही।

यहां पौधरोपण, फव्वारे एंव छत्रियों का विकास कर रहे।

छोटा रूद्र सागर को महाराजवाडा से जोडऩे के साथ अनुभूति वन, चिन्तन वन, पर्यटकों को बैठने की व्यवस्था एवं ध्यान केंद्र के लिए कुटिया बना रहे।

इसलिए समय लग रहा
रिनोवशन कार्य में प्रयुक्त मटेरियल पूर्ण रूप से नेचुरल है। इन्हें तैयार करने से लेकर पत्थरों को पिसने और भराई आदि सभी कार्य हाथ से किये जा रहे हैं। केमिकल और मशीन का प्रयोग नहीं होने से कार्य पूर्ण करने मेंं समय जरूर लग रहा है लेकिन यह आगामी कई वर्षों तक यथावत रहेगा। भूपेन्द्र सोनी, प्रोजेक्ट इंचार्ज राजपूताना कंस्ट्रक्शन राजस्थान

यही तरीका अपनाते रहे

इस कार्य में लगे सभी मजदूर और कारीगर राजस्थान के ही हैं। शुरुआत से ही यहां 50 से 60 वर्कर काम कर रहे हैं। काम बारिकी का है। यह हाथों से ही संभव है मशीन से नहीं। कंपनी द्वारा देश के अन्य हिस्सों में भी प्राचीन इमारतों के रिनोवेशन के काम इसी तरीके से किये गये हैं। रिंकू कुमार, सुपरवाइजर राजपूताना कंस्ट्रक्शन राजस्थान

पर्यटकों को मिलेंगे 32 कमरे

1 हेरिटेज धर्मशाला को पुरानी कला और साज-सज्जा से सजाया जाएगा। यहां ठहरने वालों को अलग अहसास होगा। 32 कमरों में पांच सितारा होटलों जैसी सुविधाएं मिलेंगी। रिसेप्शन और अन्य जरूरी सुविधाएं भवन में होंगी।

2 मुख्य भवन में आर्ट वर्क होगा तथा साइनेज लगाए जाएंगे। आकर्षक विद्युत सज्जा होगी। लिफ्ट, फायर इक्यूपमेंट व अलार्म आदि भी लगेंगे।

3 मुख्य भवन के पास के पुराने जर्जर भवनों को हटाकर वहां मल्टी पर्पज हॉल (प्रवचनधाम) बनाया जाएगा। यहां प्रवचन और धार्मिक आयोजन हो सकेंगे।

4 परिसर में आकर्षक लैंड स्केपिंग (हरियाली) होगी। इंट्रेंस प्लाजा विकसित होगा। महाराजवाड़ा से बड़ा गणेश तक मार्ग विकसित किया जाएगा। फव्वारे, लाइटिंग और फ्लोरिंग होगी।

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