राजाधिराज महाकाल के आंगन में सबसे पहले जली होली, उत्सव का शुभ आरंभ

मंत्रोच्चार के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने किया पूजन

उज्जैन। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा महाकाल के आंगन में सोमवार शाम को देश में सबसे पहले होलिका दहन किया गया। संध्या आरती के पहले नैवेद्य कक्ष में भगवान चंद्रमौलेश्वर, कोटितीर्थ कुंड पर श्री कोटेश्वर-श्री रामेश्वर व सभामंडप में श्री वीरभद्र को गुलाल अर्पण करने के पश्यात संध्या आरती में भगवान महाकाल को परंपरा अनुसार शक्कर की माला धारण करवाकर हर्बल गुलाल अर्पित किया। बाबा महाकाल की संध्या आरती के बाद मंदिर परिसर में ओंकारेश्वर मंदिर के सामने मुख्य पुजारी पं. घनश्याम शर्मा द्वारा कंडों एवं लकड़ी से बनी होलिका का विधिवत पूजन-आरती कर दहन किया गया।
आरतियों का समय बदला
परंपरा अनुसार चैत्र कृष्ण प्रतिपदा 4 मार्च से अश्विन पूर्णिमा तक भगवान महाकाल की रोज होने वाली तीन आरतियों का समय भी बदल गया। इसमें भस्मार्ती तड़के 4 से 6 बजे तक, दद्योदक आरती सुबह 7 से 7.45 बजे तक, भोग आरती सुबह 10 से 10.45 बजे तक, संध्या पूजन शाम 5 से 5.45 बजे तक, संध्या आरती शाम 7 से 7.45 बजे तक और शयन आरती रात 10.30 से 11 बजे तक होगी। भस्मार्ती, संध्या पूजन एवं शयन आरती अपने निर्धारित समय पर ही होगी।
महाकाल ध्वज चल समारोह के लिए किया ध्वज पूजन, रंगपंचमी पर निकलेगा
उज्जैन। रंगपंचमी पर 8 मार्च को महाकाल ध्वज चल समारोह निकाला जाएगा। इसमें ढोल-ढमाकों के बीच आकर्षक झांकियां भी शामिल रहेंगी। सोमवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप स्थित भगवान वीरभद्र के पूजन के बाद ध्वज का पूजन किया जाएगा। इसके बाद आरती की गई जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। पुजारी ने बताया कि हर साल यह धर्म ध्वजा आशीर्वाद देने के लिए निकलती है।









