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आज शाम सबसे पहले बाबा महाकाल के आंगन में होगा होलिका का दहन

कल भस्मार्ती में उड़ेगा रंग-गुलाल, भगवान को करेंगे हर्बल गुलाल अर्पित

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में हमेशा की तरह सबसे पहले होलिका दहन होगा। मंदिर की परंपरा के अनुसार 2 मार्च को संध्या आरती के पश्चात पंडे-पुजारी मंदिर परिसर स्थित ओंकारेश्वर मंदिर के सामने होलिका का विधि-विधान से पूजन करेंगे जिसके बाद होलिका दहन किया जाएगा। इसके बाद शहर में अन्य स्थानों पर होलिका दहन होगा। 3 मार्च को धुलेंडी पर भस्मार्ती में होली मनाई जाएगी। भगवान महाकाल को हर्बल गुलाल अर्पित किया जाएगा।

बदलेगा आरतियों का समय

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परंपरा अनुसार चैत्र कृष्ण प्रतिपदा 4 मार्च से अश्विन पूर्णिमा तक भगवान महाकाल की प्रतिदिन होने वाली तीन आरतियों का समय भी बदल जाएगा। इसमें भस्मार्ती तड़के 4 से 6 बजे तक, दद्योदक आरती सुबह 7 से 7.45 बजे तक, भोग आरती सुबह 10 से 10.45 बजे तक, संध्या पूजन शाम 5 से 5.45 बजे तक, संध्या आरती शाम 7 से 7.45 बजे तक और शयन आरती रात 10.30 से 11 बजे तक होगी। भस्मार्ती, संध्या पूजन एवं शयन आरती अपने निर्धारित समय पर ही होगी। 8 मार्च को रंगपंचमी पर परंपरानुसार बाबा महाकाल का ध्वज चल समारोह निकाला जाएगा।

चंद्रग्रहण के चलते बदलेगी व्यवस्था
3 मार्च को फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण के कारण श्री महाकालेश्वर मंदिर की पूजा पद्धति में परिवर्तन रहेगा। शाम 6.32 से 6.46 तक रहने वाले इस 14 मिनट के ग्रहण का वेद काल सुबह सूर्योदय से ही शुरू हो जाएगा। वेद काल के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में शुद्धिकरण, भगवान का स्नान-पूजन के बाद भोग अर्पित कर संध्या आरती की जाएगी।

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आम दर्शनार्थियों के रंग-गुलाल पर प्रतिबंध
श्री महाकालेश्वर मंदिर एवं महाकाल लोक में 2 व 3 मार्च को रंग-गुलाल ले जाना, एक-दूसरे पर लगाना और किसी विशेष उपकरण से उड़ाने पर प्रतिबंध रहेगा। श्रद्धालु भी रंग-गुलाल व अन्य कोई विशेष उपकरण लेकर प्रवेश नहीं कर सकेंगे। जांच के बाद ही एंट्री मिलेगी। यह आदेश मंदिर के पुजारी, पुरोहित, प्रतिनिधि, अधिकारी, पुलिसकर्मी, कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी, सफाई कर्मचारी, सेवक और मंदिर परिसर स्थित अन्य छोटे-बड़े मंदिर के पुजारी, सेवक व अन्य आउटसोर्स कर्मचारियों पर भी लागू होगा। मंदिर समिति के कंट्रोल रूम में तैनात अधिकारी एवं कर्मचारी सीसीटीवी कैमरों से सभी प्रवेश द्वार और परिक्षेत्र की निगरानी करेंगे। मंदिर एवं महाकाल लोक में कार्यरत कर्मचारी एवं सेवक भी अपने साथ लाए सामान की जांच करवाकर प्रवेश करेंगे।

सिंहपुरी में 5 हजार कंडों की होली
सिंहपुरी में 5 हजार कंडों (उपले) की ईको फ्रेंडली होली का दहन किया जाएगा। प्रदोष काल में ब्राह्मणों द्वारा होलिका का पूजन किया जाएगा। इसके बाद भजन-कीर्तन होंगे और ब्रह्ममुहूर्त में होलिका दहन किया जाएगा। बताया जाता है कि सिंहपुरी की होली काफी प्राचीन है जिसका पूजन करने के लिए दूर-दूर से महिलाएं यहां आती हैं।

खत्म होगा होलाष्टक
होली से 8 दिन पहले फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से शुरू हुआ होलाष्टक का समापन ३ मार्च को होगा। सनातन धर्म में होलाष्टक के दौरान शुभ कार्यों की मनाही होती है। मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान ग्रहों की स्थितियां अनुकूल नहीं होंती जिससे शुभ कामों में बाधा आती है। इसी कारण होलाष्टक पर शुभ कार्यों पर बे्रक लगता है।

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