इस साल 10 तस्करों को पकड़कर 214 ग्राम स्मैक पकड़ चुकी पुलिस

पिछले साल 57 केस बनाकर डेढ़ किलो स्मैक और एक क्विंटल गांजा पकड़ा था
उज्जैन। नए वर्ष के शुरुआती 15 दिनों में ही पुलिस 10 तस्करों को पकड़कर 214 ग्राम स्मैक पावडर जब्त कर चुकी है, जबकि पिछले वर्ष पुलिस ने 55 केस बनाकर डेढ़ किलो स्मैक पावडर जब्त किया था।
एसपी सत्येन्द्र कुमार शुक्ल ने बताया कि नशे के कारोबारियों के विरूद्ध पुलिस का अभियान जारी है। पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं जिनमें शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में स्मैक, गांजा सप्लाय करने वालों के नाम हैं। पुलिस द्वारा 1 जनवरी से 15 जनवरी के बीच महाकाल, नीलगंगा और चिमनगंज थाना क्षेत्र में ही पांच केस बनाकर 10 तस्करों को गिरफ्तार कर 214 ग्राम स्मैक पावडर जब्त किया जा चुका है।
एसपी शुक्ला ने बताया कि पिछले वर्ष शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में तस्करों के खिलाफ अभियान चलाते हुए कुल 57 केस बनाये गये थे। जिनमें डेढ़ किलो स्मैक पावडर जब्त करने के साथ ही 1 क्विंटल गांजा भी जब्त किया गया था।
चोरी और लूट को देते हैं अंजाम…
पुलिस द्वारा पकड़े गए नशा करने वालों से पुलिस को पूछताछ में पता चला है कि वह अपनी नशे की लत को पूरा करने के लिए रामघाट महाकाल क्षेत्र में मोबाइल और पर्स चोरी की वारदातों को अंजाम देते हैं कई बार नशे की लत पूरी करने के लिए लूट जैसी वारदात को अंजाम देने से भी नहीं चूकते।
0.2 ग्राम का टोकन पांच सौ का
स्मैक तस्करों द्वारा पावडर की ०.2 ग्राम की पुडिय़ा बनाकर टोकन तैयार किया जाता है। जिसे प्रति टोकन 500 रुपये के हिसाब से नशा करने वालों को बेचा जा रहा है, जबकि 1 ग्राम स्मैक की थोक कीमत 500 रुपये है। तस्कर कम मात्रा में स्मैक के टोकन लेकर नशा करने वालों तक पहुंचाते हैं ताकि पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद भी उन पर एनडीपीएस का केस दर्ज न हो पाये।
इन क्षेत्रों में बिकता है स्मैक और गांजा
शहर के महाकाल थाना क्षेत्र में आने वाले नरसिंह घाट रामघाट, कहारवाड़ी, बेगमबाग, जयसिंह पुरा आदि क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर स्मैक और गांजा बिकता है। वहीं दूसरी ओर नीलगंगा थाना क्षेत्र की मल्टी लालपुर के आसपास एकता नगर आदि क्षेत्रों में भी स्मैक तस्करी होती है। इधर जीवाजीगंज और भेरूगढ़ थाना क्षेत्र भी स्मैक और गांजा बिक्री के लिए प्रसिद्ध हैं।
पेडलर बनते हैं नशा करने वाले
जो लोग लंबे समय से इसमें पाउडर का नशा करते हैं उन्हें नशे के सौदागर पेडलर बनाकर टोकन लिखवाने का काम कर रहे हैं यह पेडलर दस टोकन ले कर बेचने निकलते हैं जिनमें से नो टोकन बेचने के बाद उन्हें एक टोकन मुफ्त में मिल जाता है जिसका नशा कर वह अपनी जरूरत पूरी कर लेते हैं









