उच्च शिक्षण संस्थानों में बड़े पैमाने पर भर्ती होगी

लंबे समय से आरक्षित श्रेणी के पदों के लिए नहीं मिल रहे उम्मीदवार…
पदों की संख्या बढ़ाकर संस्थानों को न्यूनतम संख्या उपलब्ध कराना संभव
एम्स और अन्य संस्थानों के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया चल रही
नईदिल्ली, एजेंसी। उच्च शिक्षण संस्थानों, एम्स और अन्य मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसरों के पद बड़े पैमाने पर खाली हैं। आरक्षित श्रेणियों में उम्मीदवारों का नहीं मिलना इसकी एक प्रमुख वजह है। पद रिक्त होने से कामकाज पर असर न पड़े, इसके लिए सरकार बड़ी संख्या में पद बढ़ाने की तैयारी कर रही है, ताकि जरूरी न्यूनतम संख्या उपलब्ध रहे।
संस्थानों में बड़े पैमाने पर पदों के खाली होने से संस्थानों का काम प्रभावित हो रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार पदों की संख्या में बढ़ोतरी कर सकती है। इससे सामान्य और आरक्षित दोनों श्रेणियों के पद बढ़ेंगे। ऐसे में यदि आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवार नहीं भी मिलते हैं तो सामान्य पदों पर इतने उम्मीदवार भर्ती हो जाएंगे जिससे शिक्षण संस्थानों के कामकाज को सुचारू रूप से चलाया जा सकेगा। इस पर एम्स और अन्य संस्थानों में विचार-विमर्श की प्रक्रिया चल रही है।
खाली पद सामान्य में बदलने की प्रक्रिया लंबी
सूत्रों ने कहा कि आरक्षित श्रेणी के खाली पदों को सामान्य में बदलने की प्रक्रिया है, लेकिन वह बहुत लंबी है। इसके लिए कई बार विज्ञापन निकालने के बाद संबंधित मंत्रालय और कार्मिक मंत्रालय की अनुमति लेनी होती है। आरक्षित श्रेणियों के आयोगों से अनापत्ति हासिल करनी होती है। इसमें समय लगता है। आरक्षित पदों को दूसरी आरक्षित श्रेणियों में भी भेजने की व्यवस्था है, लेकिन तीनों श्रेणियों में उपलब्धता में दिक्कत है, इसलिए प्रावधान का फायदा नहीं है।
अभी यह कोशिशें हो रहीं
1. सरकार की ओर से सभी केंद्रीय संस्थानों से बैकलॉग रिक्तियों को तेजी से भरने के निर्देश दिए हैं।
2. देशभर के विश्वविद्यालयों में आरक्षित श्रेणियों की भर्ती के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाए जा रहे हैं
3. यूजीसी ने ‘सीयू-चयन’ नाम से ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया है। इससे भर्ती प्रक्रिया आसान हुई है।
एम्स में 40 फीसदी पद खाली
सरकार की ओर से संसद और आरटीआई के जरिये जो जानकारी दी गई है, उसके अनुसार एम्स में प्रोफेसरों के 40 फीसदी पद खाली हैं। देश में 23 में से 19 एम्स संचालित हैं जिनमें 6,376 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 2,561 पद खाली हैं। सबसे बड़ी वजह ओबीसी, एसटी, एसी पदों का खाली रह जाना है। इन तीन श्रेणियों में 49.5 फीसदी पद आरक्षित रहते हैं।
एम्स में हर तीन महीने में होता है इंटरव्यू
सूत्रों के अनुसार, रिक्त पद भरने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इसके तहत एम्स में हर तीन महीने में साक्षात्कार किए जाते हैं। यानी साल में चार बार भर्ती होती है। इसी प्रकार कुछ विश्वविद्यालयों ने पद रिक्त होने से छह महीने पहले भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी कदम उठाए हैं।









