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उज्जैन की धरती से बुलंद हुई भारत में विक्रम संवत लागू करने की आवाज

तीन दिवसीय विक्रमोत्सव के तहत अंतरराष्ट्रीय इतिहास समागम का शुभारंभ

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। नेपाल की तरह भारत में विक्रम संवत और एक पंचांग लागू करने की आवाज एक बार फिर कालगणना के प्रमुख केंद्र उज्जैन से बुलंद होगी। तीन दिवसीय विक्रमोत्सव का उद्घाटन सोमवार सुबह हुआ, जिसमें प्रसिद्ध पुरातत्वविद पद्मश्री केके मुहम्मद, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली के राष्ट्रीय मंत्री डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय सहित इतिहास के विद्वान शामिल हुए।

उज्जैन में आयोजित हो रहे 125 दिनों के विक्रमोत्सव शुभारंभ आज सुबह कालिदास अकादमी परिसर स्थित संकुल हॉल में हुआ। समारोह में तीन दिनों तक इतिहास पर मंथन का दौर शुरू हुआ। समारोह में पद्मश्री भगवतीलाल राजपुरोहित, कुलपति विक्रम विश्वविद्यालय डॉ. अर्पण भारद्वाज, डॉ. स्मिता कुमार, डॉ. तेजसिंह सेंधव, डॉ. राजेशसिंह कुशवाह, संयोजक पुरावेत्ता डॉ. रमण सोलंकी आदि ने दीप प्रज्जवलन कर शुभारंभ किया। समागम के संयोजक डॉ. रमण सोलंकी ने कहा नेपाल की तर्ज पर विक्रम संवत भारत में लागू हो और एक देश का एक पंचांग बने और उज्जैन में यह बने, इस पर चर्चा कर प्रस्ताव पारित किया जाए। संचालन कवि दिनेश दिग्गज ने किया।

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समारोह की खास बात यह है कि इसमें देश और विदेश के नामचीन विद्वान शामिल हो रहे हैं। 12 मार्च तक इतिहास के कई मुद्दों पर इसमें मंथन किया जाएगा। भारत में हिंदुओं के कई त्योहारों पर उत्पन्नहोने वाली मत मतांतर की स्थितियों पर चर्चा की जाएगी। श्रीकृष्ण पाथेय की विषय विशेषज्ञ समिति के सदस्य और पुरावेत्ता डॉ. रमण सोलंकी ने बताया नेपाल में लागू विक्रम संवत की तरह भारत में भी विक्रम संवत को राष्ट्रीय दर्जा देने के प्रस्ताव पर निर्णायक चर्चा की जाएगी। हालांकि इसको लेकर लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इस बार समागम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जा सकता है।

आर्कियोलॉजिस्ट मुहम्मद आए: इतिहास समागम में आर्कियोलॉजिस्ट केके मुहम्मद भी शामिल हुए। वे समारोह में अपनी बात रखेंगे। उनकी उपस्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि मथुरा हिंदुओं को सौंप देना चाहिए। उन्होंने खुलकर कहा था कि काशी-मथुरा हिंदुओं को सौंप देना चाहिए क्योंकि इनमें हिंदुओं की आस्था है। वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के क्षेत्रीय निदेशक भी रह चुके हैं और वर्तमान में आगा खान संस्कृति ट्रस्ट में पुरातात्विक परियोजना निदेशक हैं। अयोध्या में रामजन्मभूमि से जुड़े 12 शिलाओं की खोज कर मंदिर निर्माण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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विक्रम संवत के लिए सरकार प्रयासशील: विक्रमोत्सव के अंतर्गत तीन दिनों तक होने वाला इतिहास समागम का आयोजन महत्वपूर्ण है। विक्रम संवत को देश में लागू करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार भी पूरा प्रयास कर रही है।

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