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उज्जैन:खेल के मैदान में जमे पानी के बीच कोचिंग सेंटर तक जाने का रास्ता बनाया

वो कागज की कश्ती…

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वो बारिश का पानी…

उज्जैन। रिमझिम और झमाझम बरसात में भीगने का अपना मजा है। उम्र कोई हो इस अवसर को किसी भी उम्र का व्यक्ति हाथ से जाने नहीं देना चाहता है। इन सब के बीच खेल मैदान हो या खुला स्थान बरसात के जमा पानी में धींगा-मस्ती और शरारत का भी अपना आनंद है।

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कोविड की दो साल कड़ी बंदिशों में अब कोई बंधन नहीं है। हर कोई बरसात के इस मौसम का आनंद लेना चाहता है। फिर वह रिमझिम बारिश हो या खेल मैदान में जमा बरसात का पानी। इसी तरह के दृश्य कालिदास कन्या महाविद्यालय (पूर्व का माधव महाविद्यालय) में सामने आए।

यहां खेल का एक मैदान है और इसके किनारे कोचिंग सेंटर। दो दिन से रूक-रूक कर हो रही बरसात का पानी यहां जमा हो गया है। मैदान में पानी जमा हो तो खेलना तो दूर कोचिंग सेंटर तक की राह भी बंद हो गई। शुक्रवार को कई बच्चे अपने माता-पिता के साथ कोचिंग के लिए पहुंचे तो मैदान में पानी जमा होने से कोचिंग सेंटर तक जाने का रास्ता भी नहीं बचा था।

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कुछ देर मंथन करने के बाद निर्णय लिया गया कि मैदान के किनारे जमा बिल्डिंग मटेरियल से रास्ता बनाया जाए। इस काम में बच्चों का योगदान भी हो जाएगा और बरसात के पानी में उनकी मस्ती भी। अभिभावकों की मौजूदगी में यह सुझाव जैसे ही सामने आया शरारत के लिए तैयार बच्चे तो इशारा मिलते ही पानी में कूद पड़े और बनाने लगे सेंटर तक पहुंचने की राह।

कॉलेज परिसर में कई खेल ट्रेनिंग सेंटर

माधव कॉलेज के खेल मैदान में बारिश के मौसम में पानी भर जाता है जिससे यहां पर खेल गतिविधियों पर विराम लग जाता है जबकि महाविद्यालय के पिछले वाले हिस्से में बच्चे बॉस्केटबाल, मलखंभ, कबड्डी, व्हालीवाल का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। शुक्रवार को मस्ती के साथ बच्चों ने एकजुट होकर चूरी, पत्थर, बिल्डिंग मटेरियल आदि बिछाने का काम किया ताकि वे महाविद्यालय के पीछे स्थित अपने प्रशिक्षण कोर्ट और सेंटर पर पहुंच सके।

कोच और अभिभावकों ने किया उत्साहवर्धन

बच्चों के द्वारा शरारत के साथ स्वयं सेवा से बनाए जा रहे रास्ते से उनके कोच और मैदान पर मौजूद अभिभावक भी उत्साहित थे। काम करते बच्चों के सिर पर कोई शिकन नहीं थी। बच्चों को मेहनत करते देखकर उनके उत्साहवर्धन करने के साथ इन पलों को कोच और अभिभावक अपने मोबाइल में कैद कर रहे थे।

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