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उज्जैन:जिद के आगे हार गई जिन्दगी

डॉक्टर्स के ओपिनियन पर भारी पड़ा सांसद प्रतिनिधि का दबाव

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उज्जैन। कोरोना के बढ़ते संक्रमण और बिगड़ते हालत के बीच डॉक्टर की सलाह कितनी मायने रखती है इसका उदाहरण कल देखने को मिला जब डॉक्टर की सलाह के विपरीत जाकर मरीज के परिजनों ने उसे एम्बुलेंस से एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाने का प्रयास किया और रास्ते में मरीज ने दम तोड़ दिया।

5 दिन पूर्व शाजापुर जिले का एक कोरोना संक्रमित आरडी गार्डी कॉलेज में इलाज के लिए भर्ती हुआ। उसके फेंफड़ों में संक्रमण अधिक था और भर्ती होने के समय से ही वह वेंटीलेटर पर था। जहाँ उसकी हालत स्थिर बनी हुई थी। इसी बीच परिजनों ने मरीज को वहां से डिस्चार्ज करा के अमलतास में भर्ती कराने की इच्छा जताई जिस पर मरीज का इलाज कर रहे डॉक्टर्स ने ऐसा ना करने की सलाह दी और परिजनों को बार बार केस की गंभीरता से अवगत कराया। परन्तु वे लोग नहीं माने। मरीज को डिस्चार्ज और दूसरे अस्पताल में रेफेर करने के लिए राजनैतिक दबाव भी डलवाया। सूत्रों की माने तो उज्जैन सांसद के प्रतिनिधि राहुल जाट ने डॉक्टर्स पर मरीज को रेफर करने का दबाव बनाया। नेताओं की जिद के आगे कॉलेज प्रशासन की नहीं चली और उन्हें ना चाहते हुए भी मरीज को रेफर कर देना पड़ा।

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अस्पताल कर्मचारी को नहीं था पता : सुबह पीएम रूम कर्मचारी व अन्य स्टाफ रोज की तरह यहां पहुंचा। अपना काम किया लेकिन उन्हें सुबह 9 बजे बाद तक इसकी जानकारी नहीं थी कि कोरोना पॉजिटिव का शव फ्रीजर में रखा है। कोई कर्मचारी शव के संपर्क में आता तो वह भी संक्रमित हो सकता था। मामले में आरएमओ डॉ. जी.एस. धवन ने बताया कि स्टाफ को इसकी जानकारी नहीं होना गंभीर मामला है।

रास्ते में ही हो गई मौत : रेफेर के समय मरीज की जवाबदारी देवास के अमलतास अस्पताल ने ली परन्तु अस्पताल पहुंचने के पहले ही मरीज की मौत हो गई। मौत के उपरांत अमलतास अस्पताल प्रबंधन ने मरीज का शव रखने से मन कर दिया। बाद में विवाद बढ़ा तो मरीज के शव को सिविल अस्पताल की मर्चूरी में रखा गया। मरीज की मृत्यु होने पर सांसद प्रतिनिधि और मृतक के परिजनों को अपनी भूल का एहसास हुआ और आरडी गार्डी में मरीज का इलाज कर रहे डॉक्टर से अपनी गलती के लिए माफी मांगी।

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