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एक किनारे से दूसरे पर जाना मुश्किल…

उज्जैन। शिप्रा को शुद्ध रखने का दावा हर कोई करता रहे, लेकिन हकीकत का सामना करने वाला कोई नहीं है। जिम्मेदारों को चुनाव की चिंता है। अन्य काम और व्यवस्थाओं की फिक्र नहीं है। गणेशोत्सव और नवरात्रि पर शिप्रा में बढ़ी संख्या में मूर्तियों का विसर्जन किया था।

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उससे पहले नदी की बाढ़ के साथ वृक्षों की बड़ी-बड़ी शाखाएं पानी में बहकर आई थी। यह नदी के अलग-अलग हिस्सों में जमा होकर शिप्रा की खूबसूरती पर दाग लगा रही है, वहीं श्रद्धालुओं की परेशानी का कारण बन रही है।

रामघाट से दत्त अखाड़ा घाट को जोडऩे वाली रपट पर मूर्तियों के अवशेष और वृक्षों की शाखाएं कई दिनों से जमा है। श्रद्धालुओं का एक किनारे से दूसरे किनारे पर जाना मुश्किल है, लेकिन किसी का इस पर ध्यान नहीं है।

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