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एनजीटी की फटकार से निगम एक्शन मोड पर, सात दिन मेें सप्त सागरों की नपती कर अतिक्रमण हटाने के निर्देश

आयुक्त ने अफसरों को दी चेतावनी- कागजी कार्रवाई कर खानापूर्ति ना करें

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की तीखी फटकार और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को सीधे हस्तक्षेप के आदेश के बाद उज्जैन नगर निगम प्रशासन सप्तसागरों को लेकर एक्शन मोड में आ गया है।

शुक्रवार को निगमायुक्त अभिलाष मिश्रा ने बैठक कर सख्त निर्देश जारी किए कि सात दिनों के भीतर पौराणिक सप्त सागरों से हर प्रकार का अतिक्रमण हटाया जाए और विशेष सफाई अभियान चलाया जाए। एनजीटी के कड़े रुख को देखते हुए आयुक्त ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहिए।

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एनजीटी ने सिंहस्थ-2028 की को देखते हुए सप्त सागरों (रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णु सागर और पुरुषोत्तम सागर) के संरक्षण को मिशन मोड पर लेने के निर्देश दिए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सातों सागरों की हेल्थ रिपोर्ट यानी पानी की गुणवत्ता की जांच करने को कहा गया है, जबकि प्रमुख सचिव (पर्यावरण) को खुद इसकी मासिक निगरानी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वर्तमान में यह हाल हैं सप्त सागरों के

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गोवर्धन सागर की 18 बीघा जमीन पर है कब्जा- ट्रिब्यूनल की सुनवाई में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि खसरा नंबर 1281 में दर्ज गोवर्धन सागर की 36 बीघा जमीन में से 18.5 बीघा से अधिक हिस्से पर अवैध कब्जा हो चुका है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस भूमि पर किसी भी न्यायालय का कोई स्टे नहीं है, फिर भी प्रशासन ने वर्षों से इसे मुक्त कराने की जहमत नहीं उठाई। निगमायुक्त ने स्पष्ट किया है कि ऐसे सभी क्षेत्रों को चिन्हित कर तत्काल बुलडोजर चलाया जाए।

पुष्कर सागर- शहर के बीच स्थित पुष्कर सागर अब मात्र एक कुंड के रूप में बचा है। कहा जाता है कि किसी समय यह एक बड़े तालाब के स्वरूप में था, जो धीरे-धीरे सिमटता गया।

पुरुषोत्तम सागर- इंदिरा नगर में ईदगाह के पास स्थित पुरुषोत्तम सागर भी अतिक्रमण की चपेट में हैं। इसमें क्षेत्र का गंदा पानी भी छोड़ा जा रहा है।

रुद्रसागर-महाकाल मंदिर के पास रुद्रसागर अब दो हिस्सो में बंट गया है। अतिक्रमण भी है और एक हिस्से में गंदा पानी भी मिल रहा है।

क्षीरसागर- देखरेख के अभाव में जर्जर हालत है। तालाब में भरा गंदा पानी बदबू मार रहा है।

विष्णु सागर व रत्नाकर सागर- यहां हालात ठीक हैं। रत्नाकर सागर (उंडासा तालाब) से निगम पेयजल लेता है। इस कारण रखरखाव बेहतर है। विष्णु सागर पर स्थानीय रहवासियों का विशेष ध्यान है। विकास कार्यों की वजह से यह पर्यटन केेंद्र बन चुका है।

20 फरवरी को होना है अगली सुनवाई
प्रशासन के पास जमीनी कार्रवाई दिखाने के लिए अब बहुत कम समय बचा है, क्योंकि मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को निर्धारित है। निगमायुक्त ने अपर आयुक्त, उपायुक्त और सभी जोनल अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि सात दिन के भीतर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि उसे एनजीटी के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट के रूप में दाखिल किया जा सके।

गंदे पानी के मिलने पर लगेगी रोक
अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ निगम की टीमें अब यह भी सुनिश्चित करेंगी कि सप्त सागरों में सीवरेज या नालों का गंदा पानी न मिले। इसके लिए सोर्स ट्रेपिंग की योजना तैयार की गई है। अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि पौराणिक जल राशियों की पवित्रता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी निर्माण या गतिविधि को बख्शा नहीं जाएगा।

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