ऐसे बिछड़े बचपन के यार, मौत के साथ जुदा हुए

अब्दालपुरा में मातम, सड़क हादसे में घायल तीसरे दोस्त की भी मौत
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। चार दोस्त, हर रोज करीब 10 घंटे साथ रहना, साथ ही काम, किसे पता था इन हंसती-खेलती जिंदगियों को मौत अपने साथ ले जाएगी। सोमवार रात साथ बैठे चारों दोस्तों में से एक ने कहा सांवरिया सेठ के दर्शन की बात की और बाकी तीन ने तत्काल हामी भर दी। पहले भी एक साथ कई जगह घूमने जा चुके दोस्त फिर चेहरों पर मुस्कान लिए सफर पर निकले लेकिन किसे पता था कि यह उनकी जिंदगी की आखिरी यात्रा होगी। इसमें दो दोस्त ऐसे थे जो बचपन से साथ थे। साथ बड़े हुए, साथ काम किया, घूमे-फिरे, सुख-दु:ख में एक दूसरे के हमदर्द। यहां तक कि दोनों के घर की दीवार भी एक ही थी। बचपन के यारों की ऐसी दोस्ती उनकी मौत के साथ टूटी।
दरअसल, उन्हेल रोड पर ग्राम गोयला के नजदीक मंगलवार सुबह सड़क दुर्घटना का शिकार हुए कैलाश उर्फ रिंकू पिता बंशीलाल शर्मा, देवेंद्र उर्फ कालू पिता चिंतामण जोशी की हादसे में मौके पर ही मौत हो गई थी। मंगलवार शाम एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान एक ओर साथी सुरेश नवलानी निवासी सिंधी कॉलोनी ने भी दम तोड़ दिया। इनके साथ कार में एक और दोस्त प्रमेश उर्फ पम्मी पिता सुभाष मारोठिया निवासी इंदिरा नगर भी जिसका निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। गोयला के पास सामने से तेज रफ्तार से आए आयशर ने इनकी कार को टक्कर मारी थी। यह इतनी भीषण थी कि कार और आयशर के अगले हिस्से पूरी तरह से चकनाचूर हो गए। जिसके बाद चारों दोस्त कार में फंस गए। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद इन्हें ग्रामीणों की मदद से बाहर निकाला गया।
सुबह दो का हुआ अंतिम संस्कार
सड़क हादसे का शिकार हुए अब्दालपुरा निवासी देवेंद्र जोशी का अंतिम संस्कार मंगलवार शाम ही हो चुका था। शेष दो मित्र कैलाश (रिंकू) शर्मा और सुरेश नवलानी का अंतिम संस्कार बुधवार सुबह किया गया। संघ और भाजपा से जुड़े रहे रिंकू शर्मा भाजपा विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा के विश्वासपात्र लोगों में से थे। उनके अंतिम संस्कार में गई गणमान्यजन शामिल हुए और अंतिम विदाई दी।
बचपन के दोस्त और पड़ोसी भी
कैलाश शर्मा और देवेंद्र जोशी बचपन के दोस्त थे। अब्दालपुरा में इन दोनों का पैतृक मकान एक दूसरे से सटा है। संघ की शाखा में भी दोनों साथ ही जाते, भाजपा में भी लगभग साथ ही आए और प्रापर्टी का कारोबार भी साथ ही शुरू किया। कैलाश शर्मा के परिवार की जूना सोमवारिया में बांस-बल्ली की दुकान भी है।
देवेंद्र और कैलाश दोनों ही दोस्त अपने-अपने परिवार में इकलौते बेटे थे और विवाहित थे। दोनों के दो-दो बच्चे हैं। बचपन से लेकर जवानी तक दोनों के दोस्तों का ग्रुप भी एक ही रहा। साथ ही बैठते और साथ ही कारोबार करते। अक्सर कैलाश शर्मा के निवास पर ही इनकी बैठक हुआ करती थी, यहीं कामकाज पर बातें होतीं और सभी दोस्त आपस में सुख-दु:ख भी बांटते। किसे पता था मौत भी साथ ही दस्तक देगी।









