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किसने बांटी ‘पास’ की खैरात…

पहली बार ऐसा कम्युनिकेशन गैप… हर गेट पर पुलिस व गार्ड थे लेकिन यह बताने वाला कोई नहीं था कि अंदर कहां से जाए

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@शैलेष व्यास

नागचंद्रेश्वर और श्रावण सोमवार अधिकारियों-कर्मचारियों में ऐसा कम्युनिकेशन गैप रहा कि किसी को पता नहीं था विशेष परिस्थितियों में क्या करना है और क्या नही..? सभी जैसा और जितना बताया उसी लकीर पर चल रहे थे। इसका परिणाम अव्यवस्था और श्रद्धालुओं की दिक्कत के तौर पर सामने आया। हर जगह पुलिस जवान व महाकाल मंदिर की सुरक्षा एजेंसी के गार्ड अपना ध्यान केवल इस पर था कि लोगों को कैसे रोकना है, कोई ये बताने को तैयार नहीं था कि दर्शन के लिए कहां कैसे जाए व वापस कहां से वापसी है।

दरअसल यह स्थिति ‘विशेष दर्शन के वीआईपी पास’ के कारण बनी। हजारों की संख्या में इंदौर से लेकर भोपाल तक ‘पास’ पहुंचा दिए गए,लेकिन यह नहीं बताया कि मार्ग और गेट कौन-सा रहने वाला है। जिसके हाथों में ‘पास’ था,उनके उधर से उधर से प्रवेश के प्रयासों से व्यवस्था बिगड़ती रही। खास बात तो यह कि 10 हजार से अधिक वीआईपी पास वितरीत किए गए,लेकिन ‘पास की खैरात’ किसके आदेश पर दी गई। अव्यवस्थाओं का ‘शोर’ मचने पर सभी के पास जानकारी थी कि ‘पास की खैरात’ किसने बांटी….पर चुप्पी साध रखी..।

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दोस्त भी दुश्मनी निभाने लगे हैं

जब चुनाव सामने हो तो दोस्ती-दुश्मनी के मायने भी इतनी तेजी से बदलते हैं कि देखने वाले भी हैरान रह जाते हैं। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली सूची जल्दी घोषित कर दी। कहते हैं सियासत में न दोस्ती स्थायी होती है न दुश्मनी। फिर जब चुनाव सामने हो तो दोस्ती-दुश्मनी के मायने भी इतनी तेजी से बदलते हैं कि देखने वाले भी हैरान रह जाते हैं।

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अब मालवा-निमाड़ के भाजपाई दावेदारों को ही लीजिए। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली सूची जल्दी घोषित कर दी। इसके बाद से ही टिकट का प्रसाद नहीं पाने वाले दावेदार भोपाल-दिल्ली एक किए हुए हैं। उज्जैन जिले में घोषित टिकट का भी विरोध हो रहा है। इसने वरिष्ठ नेताओं की चिंता बढ़ा दी है। चिंता लाजमी भी है क्योंकि 66 में से अभी तो सिर्फ 11 ही टिकट घोषित हुए हैं। आगे क्या होगा यह अभी से नजर आ रहा है।

साहब चले गए डॉगी रह गए….डॉगी प्रेमी एक साहब का दूसरे जिले में तबादला हो गया है। उन्होंने पदस्थापना वाले जिले में कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है। काफी समान रवाना भी हो गया है,लेकिन साहब के चार डॉगी अभी यही है। वे सरकारी बंगले है, पर खासबात यह कि इन डॉगी की देख-रेख और भोजन-पानी के लिए दिन और रात में अलग-अलग कर्मचारियों को ड्यूटी देना पड़ रही है।

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