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नागदा नपा में भाजपा के बहुमत पर संकट के बादल

16 पार्षदों ने पार्टी सौंप दिए इस्तीफे, मंजूर हो गए तो परिषद अल्पमत में

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:नागदा-खाचरौद में विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा से उम्मीदवार तय होने के बाद चल रही खींचतान का असर नागदा नगर पालिका में भाजपा के बहुमत पर हो सकता है। प्रत्याशी तय होने के विरोध में भाजपा के १६ पार्षद पार्टी से इस्तीफे दें चुके हंै। यदि यह मंजूर हो जाते हैं, तो पालिका परिषद में भाजपा अल्पमत में आ सकती है।
नागदा नगर पालिका में 36 में से 22 पार्षद भाजपा के हैं।

नागदा-खाचरौद से तेजबहादुरसिंह चौहान को भाजपा का टिकट दिए जाने से नाराज 16 पार्षदों द्वारा भाजपा जिलाध्यक्ष ग्रामीण को पार्टी से त्याग-पत्र सौंप चुके हंै। इसके बाद कांग्रेस नागदा नगर पालिका में परिषद पर कब्जा करने के लिए मौके के इंतजार में हंै। टिकट में परिवर्तन नहीं हुआ तो और पार्षदों के दबाव में त्याग-पत्र मंजूर हो जाते हैं तो नपा में बड़ा उलटफेर होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। परिषद अल्पमत में आ जाएगी। नीतिगत निर्णय नपाध्यक्ष नहीं ले पाएगी।

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खाचरौद में 7 पार्षदों के त्याग-पत्र:पूर्व विधायक दिलीपसिंह शेखावत के समर्थकों में नागदा के 16 पार्षदों द्वारा पार्टी त्याग-पत्र दिया है। हालांकि अभी तक किसी भी त्याग-पत्र मंजूर नहीं किया है। इस बीच खाचरौद के भाजपा पार्षदों ने पार्टी से त्याग-पत्र दिया है। सभी ने अपने त्याग-पत्र भाजपा जिलाध्यक्ष को दिए है। बताया जा रहा है कि वार्ड क्रमांक 20 के जनपद सदस्य रघुनाथसिंह बोड़ाना, वार्ड क्रमांक 3 की सदस्य माया मनोहर

बोड़ाना, वार्ड क्रमांक 11 की जनपद सदस्य पावत्री बाई वीरसिंह बोड़ाना, वार्ड क्रमांक 1 दशरथ शर्मा, वार्ड 6 श्यामूबाई चंद्रवंशी, वार्ड 12 के पदमाबाई रमेश, वार्ड 10 मनोहरसिंह राठौर, जिला पंचायत सदस्य वार्ड 14 की राधिका गजेंद्रसिंह केसरिया, वार्ड 15 शारदा बाई राकेश चंद्रवंशी आदि ने पार्टी से त्याग-पत्र दिया।

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भाजपा समर्थित केवल 6 पार्षद बचे

नगरपालिका में 36 में से 22 पार्षद भाजपा के हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष इसी दल के हैं। यदि 16 पार्षदों को पार्टी से बाहर मान लिया जाए तो परिषद में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित भाजपा समर्थित अब 6 पार्षद बचे हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी द्वारा उतारे गए प्रत्याशी पर पुन: विचार करने को लेकर 16 पार्षदों ने पार्टी से त्याग-पत्र दें दिया। 16 पार्षदों के त्याग-पत्र मंजूर हो गए तो भाजपा परिषद अल्पमत में जाएगी। कांग्रेस पार्षदों द्वारा आपत्ति लगाकर अध्यक्ष द्वारा नीतिगत निर्णय पर रोक लगाने की मांग करेगी।

नीतिगत निर्णय पर रोक लगने के बाद शहर के निर्माण कार्य भी अवरुद्ध हो जाएगा। 16 पार्षदों के त्याग-पत्र देने के बाद वर्तमान स्थिति में भाजपा के पास नपाध्यक्ष, 3 सभापति व दो पार्षद हैं। पीआइसी के लिए अध्यक्ष को छोड़ 7 सदस्य चाहिए, बचे दो पार्षदों को भी पीआइसी में लिया जाता है, तो भी दो पार्षद की और आवश्यकता होगी। इसमें एक निर्दलीय है। ऐसे में भाजपा को कांग्रेस से हाथ मिलाकर उनके एक पार्षद को पीआइसी में रखना पड़ सकता है। फिलहाल की स्थिति से कांग्रेस पार्षद उत्साहित है।

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